
How to stop diabetes naturally: डायबिटीज की वैश्विक राजधानी बनते जा रहे भारत के लिए एक राहत भरी खबर है। हाल ही में आई एक महत्वपूर्ण भारतीय स्टडी बताती है कि अगर सही समय पर ध्यान दिया जाए, तो डायबिटीज से ठीक पहले की स्टेज यानी प्रीडायबिटीज को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। रिसर्च के मुताबिक, बीमारी का पता चलने के शुरुआती दो से तीन साल सबसे अहम होते हैं। इस दौरान लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव आपको जीवन भर की दवाइयों और इंसुलिन से बचा सकते हैं।
'जर्नल ऑफ डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक डिसऑर्डर्स' में नवंबर 2025 में प्रकाशित इस स्टडी ने उम्मीद की नई किरण दिखाई है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि प्रीडायबिटीज से नॉर्मल ब्लड शुगर लेवल में लौटने की संभावना शुरुआती 2-3 वर्षों में सबसे ज्यादा, लगभग 60% होती है। इसका मतलब यह है कि अगर डायग्नोस होने के तुरंत बाद आप सक्रिय हो जाएं, तो बीमारी को वहीं रोका जा सकता है। इस अवधि के बाद रिकवरी की दर धीरे-धीरे कम होने लगती है।
इस स्टडी के मुख्य शोधकर्ता पलक शर्मा और उनकी टीम ने मुंबई के एक सरकारी अस्पताल के डेटा का विश्लेषण किया। उन्होंने 2012 से 2022 तक यानी पूरे 10 वर्षों के रिकॉर्ड खंगाले। इस दौरान 30 वर्ष से अधिक उम्र के 1,670 वयस्कों पर नजर रखी गई, जिन्हें शुरुआत में डायबिटीज नहीं थी। इसमें यह देखा गया कि सामान्य शुगर लेवल, प्रीडायबिटीज और डायबिटीज के बीच लोगों की स्थिति कैसे बदलती है।
स्टडी में एक रोचक बात यह सामने आई कि पुरुषों और महिलाओं के शरीर पर इसका असर अलग-अलग होता है। पुरुषों में प्रीडायबिटीज से टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा ज्यादा पाया गया। वहीं, महिलाओं में प्रीडायबिटीज से रिकवरी की दर बेहतर पाई गई। यानी वे लाइफस्टाइल में बदलाव करके जल्दी ठीक हो सकती हैं। आंकड़ों की बात करें तो प्रीडायबिटीज वाले लोगों में बीमारी आगे बढ़ने की दर प्रति 1100 व्यक्ति पर 41.74 थी, जबकि नॉर्मल शुगर वाले लोगों में यह सिर्फ 15.89 थी।
ICMR-IndiaB की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में भारत में करीब 13.6 करोड़ लोग प्रीडायबिटीज के शिकार थे। यह एक खतरनाक स्थिति है। चिंता की बात यह है कि अगर इसका इलाज न किया जाए, तो अगले 5 सालों में इनमें से 50% लोग पूरी तरह डायबिटीज के मरीज बन जाते हैं। यह अध्ययन बताता है कि प्रीडायबिटीज से डायबिटीज में जाने की संभावना करीब 30% होती है।
अक्सर लोग सोचते हैं कि बीमारी को रोकने के लिए बहुत सख्त डाइट या कड़े व्यायाम करने होंगे। लेकिन यह स्टडी कहती है कि 'लगातार किए गए मामूली बदलाव' सबसे ज्यादा असरदार होते हैं। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि आपको अपनी दिनचर्या में बस ये चीजें शामिल करनी हैं।
सही डाइट: खाने में कैलोरी की मात्रा थोड़ी कम करें और प्रोसेस्ड फूड की जगह साबुत अनाज और सब्जियां खाएं।
एक्टिव रहें: हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की मॉडरेट एक्सरसाइज करें या छोटी सैर करने की आदत डालें।
वजन नियंत्रण में रखें: शुरुआती 2 सालों में अगर आप अपना वजन 5-10% भी कम कर लेते हैं, तो डायबिटीज का रिस्क 58% तक कम हो जाता है।
नींद पर्याप्त, तनाव कम: 7 से 8 घंटे की पूरी नींद लें और तनाव कम करें।
डॉक्टरों का मानना है कि जब आप ये बदलाव करते हैं, तो शरीर में 'चुपचाप मेटाबॉलिक सुधार' होने लगते हैं। लीवर में जमा फैट कम होता है और मसल्स में ग्लूकोज का इस्तेमाल बेहतर होने लगता है। इससे पैन्क्रियाज (अग्न्याशय) पर दबाव कम होता है और वह इंसुलिन का सही इस्तेमाल कर पाता है। यह स्टडी साफ करती है कि प्रीडायबिटीज एक 'वॉर्निंग साइन' है, न कि अंतिम फैसला। अगर आप इसे 2-3 साल के भीतर रिवर्स कर लेते हैं, तो किडनी फेलियर और हार्ट की बीमारियों का खतरा भी टल जाता है।
Disclaimer: यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। स्वास्थ्य संबंधी कोई भी निर्णय प्रमाणित चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सुझाव के आधार पर ही लें। आपके किसी भी कार्य या निर्णय के लिए मिंट हिंदी तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।
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