ईश सिंह ने वर्ष 2012 में दिल्ली आईआईटी से ग्रैजुएशन डिग्री ली। अगले वर्ष ही उन्हें गोल्डमैन सैक्स के बेंगलुरु ऑफिस में जॉब मिल गई। वार्षिक वेतन मिला 35 लाख रुपये। चार वर्ष यहां नौकरी करने के बाद वह जेपी मॉर्गन की जॉब के लिए लंदन चले गए और वहां पांच वर्ष बिताया। फिर लंदन में ही दो वर्ष तक गूगल की नौकरी की और 2024 में नौकरी छोड़-छाड़कर भारत लौट आए। ईश सिंह ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म रेडिट पर बताया कि अब उनकी जिंदगी कैसी कट रही है।
33 वर्ष की उम्र में लंदन की नौकरी छोड़ लौटे थे भारत
ईश सिंह ने जब नौकरी छोड़ी थी, तब वह 33 वर्ष के थे और अविवाहित थे। अब उनका विवाह हो चुका है और अब वह पत्नी के साथ जॉर्जिया में रह रहे हैं। जॉर्जिया पूर्वी यूरोप और पश्चिम एशिया की सीमाओं पर बसा एक देश है। वो 2024 में भारत लौटने के बाद दिल्ली में अपने माता-पिता के साथ रहे। हालांकि, यात्रा के शौकीन होने के कारण वो बार-बार विदेशी दौरों पर जाते रहते थे। फिर काम की वजह से भी यात्राएं बढ़ गईं तो अंततः जॉर्जिया में स्थायी निवास बना लिया।
क्या अब कोई काम नहीं कर रहे ईश सिंह?
ईश ने अपने ताजा रेडिट पोस्ट में रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी पर विस्तार से बताया है। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट का मतलब उनके लिए ऑफिस के लिए भागदौड़ वाली जिंदगी से तौबा करने से है, काम तो वो अब भी कर रहे हैं। ईश सिंह ने अब क्वांटयोग (QuantYog) और रेडिश एआई (Radish AI) नाम के दो ऑनालइन प्लैटफॉर्म का संचालन कर रहे हैं। उनका कहना है कि रैडिश एआई को स्थापित करने के चक्कर में उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ा- वजन बढ़ गया, नींद की समस्या हुई। हालांकि, अब वो इस ओर ध्यान दे रहे हैं तो ये समस्याएं भी दूर हो रही हैं।
रिटायरमेंट के बाद कैसे कट रही है जिंदगी?
ईश का कहना है कि इन दो वेंचर्स में उनका इतना वक्त निकल जाता है कि सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट डालना और अपने यूट्यूब चैनल के लिए पॉडकास्ट तैयार करना लगभग छूट सा गया है। उन्होंने बताया है कि पैसे की कोई कमी नहीं है क्योंकि उन्हें 11 वर्ष की नौकरी में इतने पैसे मिल गए और होशियारी से ऐसा निवेश कर दिया है कि वह अगले 100 वर्ष तक बिना कमाए खर्च करते रह सकते हैं।
ईश सिंह के मुताबिक FIRE का मतलब
ईश सिंह का परोपकार में गहरा विश्वास है। वो कहते हैं कि 1,000 बच्चों को गरीब और बेसहारा बच्चों की जिंदगी संवारना उनका लक्ष्य है। उनकी इच्छा है कि अगले कुछ वर्षों में एक किताब लिखें। उन्होंने रिटायरमेंट के तीन वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि परिवार, मित्र, आजादी, स्वस्थ एवं संतुष्ट जीवन को बताते हैं। वो कहते हैं, फिलहाल फिटनेस वाला मोर्चा थोड़ा गड़बड़ हो गया है, लेकिन स्वतंत्र एवं संतुष्ट जिंदगी से कोई समझौता नहीं। ईश सिंह का कहना है रिटायरमेंट मतलब कुछ भी नहीं करना नहीं होता है, बल्कि बंधन से मुक्त होकर स्वतंत्र कार्य करना होता है।
Disclaimer: यह ईश सिंह के सोशल मीडिया पर बताई गई बातों पर आधारित लेख है। हर व्यक्ति के सामने अपनी-अपनी परिस्थितियां होती हैं। इसलिए नौकरी छोड़ने या जल्दी रिटायरमेंट का फैसला गहन योजना के बाद ही लें।