षटतिला एकादशी का पर्व वर्ष 2026 में 14 जनवरी, बुधवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। यह व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को आता है और भगवान विष्णु की विशेष पूजा का दिन होता है।
मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन पवित्र होता है और व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। इस एकादशी पर तिल (तिलहन) का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, तिल का छह अलग-अलग तरीकों से उपयोग करने से जाने-अनजाने में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं।
षटतिला एकादशी व्रत कथा (Shattila Ekadashi Vrat Katha In Hindi)
बहुत समय पहले काशी नगरी में एक गरीब लकड़हारा रहता था। वह जंगल से लकड़ी काटकर अपना और अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। कई बार ऐसा होता कि उसे कोई कमाई नहीं होती और उसे अपने बच्चों के साथ भूखे पेट सोना पड़ता।
एक दिन वह लकड़ी बेचने शहर गया। वहां एक अमीर व्यापारी ने उसकी सारी लकड़ी खरीद ली। जब लकड़हारा व्यापारी के घर पहुंचा, तो उसने देखा कि घर में षटतिला एकादशी के व्रत की तैयारियां चल रही हैं। लकड़हारे ने व्यापारी से इसके बारे में पूछा।
व्यापारी ने बताया कि षटतिला एकादशी का व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
यह सुनकर लकड़हारे और उसकी पत्नी ने पूरे एक वर्ष तक श्रद्धा और नियम से षटतिला एकादशी का व्रत किया और तिल का दान किया। भगवान विष्णु की कृपा से उनकी गरीबी दूर हो गई और वह काशी का सबसे धनवान व्यापारी बन गया।
हे माता एकादशी! जिस प्रकार आपने उस गरीब लकड़हारे का भाग्य बदला और उसे धन-समृद्धि का वरदान दिया, उसी प्रकार आप सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)