
हिंदू धर्म में जब भी भगवान श्रीकृष्ण का नाम लिया जाता है तो उससे पहले राधा रानी का नाम अवश्य लिया जाता है। अक्सर आपने लोगों को राधे कृष्ण, राधा कृष्ण या राधे श्याम कहते हुए सुना होगा, लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा कि आखिर राधा रानी का नाम श्रीकृष्ण से पहले क्योंलिया जाता है। दरअसल, इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक कारण है। यह केवल परंपरा या आदत नहीं है बल्कि प्रेम और भक्ति का सबसे सुंदर संदेश है।
राधा रानी और श्रीकृष्ण का संबंध केवल एक नारी और पुरुष का नहीं बल्कि आत्मा और परमात्मा का है। श्रीकृष्ण स्वयं भगवान हैं और राधा उनकी सर्वोच्च भक्त हैं। जब हम राधा रानी का नाम पहले लेते हैं तो इसका अर्थ होता है कि परमात्मा तक पहुंचने के लिए हमें पहले भक्ति और प्रेम का सहारा लेना पड़ता है। बिना भक्ति के भगवान तक पहुंचना असंभव है। राधा रानी भक्ति का प्रतीक हैं और कृष्ण भगवान का स्वरूप हैं। इसीलिए उनका नाम पहले लिया जाता है।
कहा जाता है कि भगवान कृष्ण अपने भक्तों से तभी प्रसन्न होते हैं जब उनमें सच्चा प्रेम और समर्पण हो। राधा रानी ने अपने जीवन में कृष्ण के प्रति वही पूर्ण समर्पण और निष्काम प्रेम दिखाया। उनके प्रेम में कोई स्वार्थ नहीं था। राधा ने कभी कृष्ण से कुछ मांगा नहीं बल्कि हर पल केवल उनका स्मरण और आराधना की। यही वजह है कि श्रीकृष्ण भी राधा रानी के नाम के बिना अधूरे माने जाते हैं।
राधा रानी का नाम पहले लेने का एक और अर्थ है कि भक्त और भगवान का रिश्ता तभी जीवंत होता है जब उसमें मध्यस्थ के रूप में प्रेम की शक्ति जुड़ती है। राधा वही शक्ति हैं। जब हम राधे कृष्ण कहते हैं तो हम यह स्वीकार करते हैं कि भगवान तक हमारी पहुंच भक्ति और प्रेम के बिना संभव नहीं है। यह संसार का नियम है कि आत्मा जब तक भक्ति से शुद्ध न हो जाए, वह परमात्मा के पास नहीं पहुंच सकती।
यह भी कहा जाता है कि कृष्ण स्वयं चाहते थे कि उनका नाम राधा के नाम के बिना न लिया जाए क्योंकि वे मानते थे कि यदि किसी ने राधा रानी जैसी भक्ति को स्वीकार नहीं किया तो वह उन्हें सही अर्थों में समझ ही नहीं सकता। भगवान का असली स्वरूप भक्ति के द्वारा ही प्रकट होता है और राधा उस भक्ति की सर्वोच्च मूर्ति हैं।
इस प्रकार राधा रानी का नाम पहले लेना यह संदेश देता है कि भगवान तक पहुंचने का मार्ग केवल भक्ति है। जब हम राधा का नाम लेते हैं तो हम अपने भीतर प्रेम और समर्पण को जगाते हैं और जब उस भाव के साथ कृष्ण का नाम लिया जाता है तो वह सच्ची पुकार बन जाती है। यही कारण है कि भक्तजन पहले राधा का नाम लेते हैं और फिर कृष्ण का।
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