Rajya Sabha Winter Session: 5 नहीं 25 लाख का हो बीमा... बैंक डूबने पर बढ़े बीमा कवर, राज्यसभा में उठा मुद्दा

Rajya Sabha Winter Session: राज्यसभा के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने बैंकों के डूबने के मामलों पर चिंता जताई और बीमा कवर को पांच लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की मांग की। उन्होंने बुजुर्गों की जमा राशि के सुरक्षा पर भी जोर दिया…

Anuj Shrivastava( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
अपडेटेड3 Dec 2025, 03:38 PM IST
बैंक डूबने पर बढ़े बीमा कवर
बैंक डूबने पर बढ़े बीमा कवर

Rajya Sabha Winter Session: राज्यसभा के शीतकालीन सत्र में बुधवार को कई अहम मुद्दे उठाए गए। कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने बैंकों के डूबने के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए मांग की कि बैंक खातों में जमा राशि पर बीमा कवर को मौजूदा पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये किया जाए।

शून्यकाल के दौरान उच्च सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस के नीरज डांगी ने कहा कि हर तरह के बैंक खातों में जमा राशि पर पांच लाख रुपये तक का बीमा होता है, चाहे बैंक में जमा राशि कितनी भी हो।उन्होंने कहा कि अगर बैंक डूबा तो पूरी राशि डूब जाएगी लेकिन बीमा केवल पांच लाख रुपये का ही होगा और यही राशि खाता धारक को मिलेगी।

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बुजुर्गों के लिए परेशान डांगी

डांगी ने कहा कि इस ओर सरकार को ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन खातों की पूरी राशि का बीमा नहीं है, उनमें से अधिकांश राशि बुजुर्गों की है और उनका जीवन यापन उसी राशि पर निर्भर है। ये राशि डूब जाए तो उनका बुढ़ापा कैसे कटेगा। उन्होंने कहा कि बैंक डूबने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, अत: बैंकों में जमा राशि के बीमा कवर को पांच लाख रुपये से बढ़ा कर 25 लाख रुपये किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा बैंक बंद हो रहे हैं, इसलिए ‘डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन’ के तहत जमाकर्ताओं के लिए बेहतर सुरक्षा की जरूरत है। डांगी ने कहा कि पिछली बार बीमा राशि को पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक संकट के बाद फरवरी 2022 में एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया गया था।

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भाजपा की सुमित्रा वाल्मीक ने महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि काम के लिए बाहर जाने वाली महिलाएं सुरक्षित वापस लौटें। उन्होंने कहा कि वैसे तो सुरक्षा होती है लेकिन बस, मेट्रो, ऑटो में सफर के बाद उतर कर घर तक करीब एक-दो किलोमीटर की यात्रा उन्हें जोखिम के बीच करनी होती है। वह इस दौरान वहां खड़े ई-रिक्शा या ऑटो से जाती हैं और अपने घर पर लगातार बात करती रहती हैं ताकि असुरक्षा की भावना कुछ कम हो सके।

सुमित्रा ने सुझाव दिया कि बस स्टैंड, मेट्रो स्टेशन पर उतरने वाली महिलाओं के लिए बेहतर होगा कि वहां उनके लिए जो ई-रिक्शा उपलब्ध हों, उन्हें महिलाएं ही चलाएं। उन्होंने कहा कि क्यू आर कोड आधारित ट्रैकिंग व्यवस्था होनी चाहिए। यात्री बैठने से पहले उसे स्कैन करे ताकि गाड़ी का नंबर और ड्राइवर का ब्यौरा उनके घर और पुलिस थाने तक पहुंचे। रास्तों पर लाइट की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।

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