Ramadan 2026: माह-ए-रमजान का मुबारक महीना मुसलमानों के लिए सभी 12 महीनों में सबसे खास महत्व रखता है। रमजान का पूरा महीना इबादत, पश्चाताप, उपवास (रोजा), आध्यात्मिक प्रहति और उदारता को समर्पित होता है। इसके साथ ही यह महीना खुद को बेहतर बनाने में भी मदद करता है। रोजा में अन्न-जल का त्याग करने की प्रक्रिया सिर्फ भूखे रहने का नाम न होकर समग्र रूप से अल्लाह को तलाशने का काम भी है।
रमजान महीने में संयम और समर्पण के साथ रोजेदार रोजा रखकर खुदा की इबादत करते हैं। खाने-पीने सहित दुनियाभर की तमाम आदतों पर संयम किए जाने वाले रोजा को ही अरबी में 'सोम' कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है रोजा रखकर इंद्रियों को वश में करना।
सातवां रोजा क्यों है महत्वपूर्ण
फिलहाल रमजान में रोजा रखने का सिलसिला अब सातवें रोजे तक पहुंचने वाला है। सातवें रोज तक रोजेदार संयम सत्कर्म को अपनाते हुए बेशुमार नेकियों का हकदार हो जाता है। नेकियों के सैलाब का जरिया ही रोजेदारों को अल्लाह से जोड़ती है। इसलिए कहा जाता है कि रमजान का सातवां रोजा अल्लाह तक पहुंचने का मार्ग दिखाता है। कुरान से 30वें पारे की सूरह अलइन्किशाक की आयत 6 में जिक्र मिलता है कि, ‘या अय्युहल इन्सानु इन्नाका कादिहुन इला रब्बेला कदहन फमुलाकीह’। इसका अर्थ है कि ऐ इंसान तू अपने परवरदिगार की ओर पहुंचने की खूब कोशिश करता है सो उससे जा मिलेगा।
सहरी और इफ्तार का धार्मिक महत्व
रमजान सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्मअनुशासन, सब्र और अल्लाह की इबादत का महीना है। सहरी दिनभर की ऊर्जा का जरिया होती है, जबकि इफ्तार पूरे दिन के सब्र का इनाम। रोजा इंसान को अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना सिखाता है और जरूरतमंदों की तकलीफ को समझने का मौका देता है। इसी वजह से Sehri Iftar Timing Bhopal Ramadan 2026 जैसी जानकारी रोजेदारों के लिए बेहद अहम हो जाती है।
सहरी-इफ्तार की सही टाइमिंग जानना क्यों है जरूरी?
हर शहर में सूर्योदय-सूर्यास्त का समय अलग होता है। जिससे रोजा शुरू और खत्म करने का समय मिनटों में बदल सकता है। सही टाइमिंग से रोजा सही तरीके से पूरा होता है। आइये जानते हैं 25 फरवरी को दिल्ली, मुंबई समेत अन्य शहरों में कब इफ्तार और सहरी का समय…