
Today Iftar timing 14 March 2026: रमजान का महीना मुसलमानों के लिए बेहद खास और पवित्र माना जाता है। इस दौरान रोजेदार सुबह फज्र की नमाज से पहले सेहरी करके रोजा रखते हैं और पूरे दिन धैर्य, संयम और इबादत के साथ समय बिताते हैं। दिन भर भूखे-प्यासे रहने के बाद जब सूर्यास्त का समय आता है, तो रोजेदार मगरिब की अजान के साथ इफ्तार करके रोजा खोलते हैं।
रमजान के आखिरी दस दिनों को खास तौर पर बहुत अहम माना जाता है, क्योंकि इस दौरान इबादत और दुआ का महत्व और बढ़ जाता है। ऐसे में रोजेदारों के लिए यह जानना जरूरी होता है कि उनके शहर में इफ्तार का सही समय क्या है।
आज यानी 14 मार्च 2026 को दुनिया भर के मुसलमान 24वां रोजा रख रहे हैं। यह वक्त बहुत खास है क्योंकि हम रमजान के आखिरी दस दिनों (अशरे) के बेहद करीब हैं, जिसे इबादत के लिहाज से सबसे अहम माना जाता है। रोजा सुबह फज्र की नमाज से पहले शुरू होता है और सूर्यास्त के समय मगरिब की अजान के साथ खत्म होता है। इसी वक्त रोजेदार इफ्तार करते हैं और दिन भर का रोजा खोलते हैं।
भारत के अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त का समय अलग-अलग होता है, इसलिए इफ्तार का समय भी हर शहर में थोड़ा अलग होता है। आज 14 मार्च 2026 को प्रमुख शहरों में इफ्तार का समय इस प्रकार है:
| शहर | इफ्तार का समय |
|---|---|
| दिल्ली | शाम 6:29 बजे |
| अहमदाबाद | शाम 6:49 बजे |
| पुणे | शाम 6:44 बजे |
| चेन्नई | शाम 6:20 बजे |
| मुंबई | शाम 6:49 बजे |
| कोलकाता | शाम 5:46 बजे |
| लखनऊ | शाम 6:15 बजे |
| चंडीगढ़ | शाम 6:31 बजे |
| कोच्चि | शाम 6:36 बजे |
| गुरुग्राम | शाम 6:30 बजे |
| आगरा | शाम 6:26 बजे |
| बेंगलुरु | शाम 6:31 बजे |
| भोपाल | शाम 6:30 बजे |
| भुवनेश्वर | शाम 5:56 बजे |
| कोयंबटूर | शाम 6:33 बजे |
| गुवाहाटी | शाम 5:32 बजे |
| हैदराबाद | शाम 6:26 बजे |
| इंदौर | शाम 6:36 बजे |
| जयपुर | शाम 6:35 बजे |
| जम्मू | शाम 6:38 बजे |
| नोएडा | शाम 6:29 बजे |
| पटना | शाम 5:58 बजे |
| कोझिकोड | शाम 6:38 बजे |
| सिकंदराबाद | शाम 6:26 बजे |
| सिलीगुड़ी | शाम 5:45 बजे |
ध्यान रखें कि स्थानीय मस्जिद या इलाके के अनुसार समय में एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है।
इस्लामिक परंपरा के अनुसार रोजा मगरिब की अजान के बाद खोला जाता है। जैसे ही सूर्यास्त होता है, रोजेदार इफ्तार करते हैं। सुन्नत के मुताबिक रोजा खजूर या पानी से खोलना बेहतर माना जाता है। इसके बाद मगरिब की नमाज अदा की जाती है और फिर सामान्य भोजन किया जाता है।
‘अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुम्तु, व बिका आमन्तु, व अलैका तवक्कल्तु, व अला रिज़्किका अफ़्तरतु।’
मतलब- ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा, तुझ पर ईमान लाया, तुझ पर भरोसा किया और तेरी दी हुई रोजी से रोजा खोला।
'Allahumma inni laka sumtu wa bika aamantu wa ‘alayka tawakkaltu wa ‘ala rizqika aftartu.'
Meaning- O Allah! I fasted for You, I believe in You, I trust in You and with Your sustenance I break my fast.
इफ्तार सिर्फ रोजा खोलने का समय नहीं होता, बल्कि यह एक आध्यात्मिक पल भी माना जाता है। पूरे दिन रोजा रखने के बाद जब इफ्तार किया जाता है, तो लोग अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं और दुआ करते हैं। इस्लामी मान्यताओं के अनुसार इफ्तार के समय की गई दुआ के कबूल होने की उम्मीद ज्यादा होती है। इसलिए रोजेदार इस समय अपने परिवार, दोस्तों और पूरी दुनिया की भलाई के लिए दुआ करते हैं।
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