
Delhi Iftar Time Today: रमजान का पाक महीना चल रहा है। ये महीना इस्लाम धर्म में काफी खास होता है। इसमें 30 दिनों तक रोजेदार सुबह से शाम तक बिना खाना पानी के रहते हैं और शाम को नमाज के बाद रोजा खोलकर इफ्तारी करते हैं। इफ्तारी के साथ इसमें एक सेहरी का भी नियम है। इफ्तारी और सेहरी के बिना रोजा कबूल नहीं माना जाता है। एक महीने के रोजे का आज 16 वां दिन है। आइए जानते हैं आज आपके शहर में कितने बजे इफ्तारी होगी।
अगर आज इफ्तारी टाइमिंग को देखें तो पांच बड़े शहरों में अलग-अलग समय पर रोजा खोला जाएगा। दिल्ली में इफ्तार का समय शाम 6:25 बजे है, जबकि नोएडा में यह एक मिनट पहले यानी 6:24 बजे होगा। चेन्नई में रोज़ा शाम 6:19 बजे खोला जाएगा, वहीं लखनऊ में इफ्तार का समय थोड़ा जल्दी 6:11 बजे है। पुणे में रोजा सबसे देर से खुलेगा, यहां इफ्तार का समय शाम 6:43 बजे तय है।
| शहर का नाम (City) | इफ्तार समय (Iftar) |
|---|---|
| दिल्ली (Delhi) | 06:25 PM |
| नोएडा (Noida) | 06:24 PM |
| चेन्नई (Chennai) | 06:19 PM |
| लखनऊ (Lucknow) | 06:11 PM |
| पुणे (Pune) | 06:43 PM |
| मुंबई (Mumbai) | 06:47 PM |
| कोलकाता (Kolkata) | 05:43 PM |
| हैदराबाद (Hyderabad) | 06:25 PM |
| पटना (Patna) | 05:55 PM |
| भुवनेश्वर (Bhuvneshwar) | 05:54 PM |
| जयपुर (Jaipur) | 06:31 PM |
| इंदौर (Indore) | 06:33 PM |
| बेंगलुरु (Bengaluru) | 06:30 PM |
| अहमदाबाद (Ahmadabad) | 06:46 PM |
| सूरत (Surat) | 06:46 PM |
| कानपुर (Kanpur) | 06:14 PM |
| जम्मू (Jammu) | 06:42 PM |
| रांची (Ranchi) | 05:55 PM |
| चंडीगढ़ (Chandigarh) | 06:26 PM |
‘अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुम्तु, व बिका आमन्तु, व अलैका तवक्कल्तु, व अला रिज़्किका अफ़्तरतु।’
अर्थ- ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोजा रखा, तुझ पर ईमान लाया, तुझ पर भरोसा किया और तेरी दी हुई रोजी से रोजा खोला।
'Allahumma inni laka sumtu wa bika aamantu wa ‘alayka tawakkaltu wa ‘ala rizqika aftartu.'
Meaning- O Allah! I fasted for You, I believe in You, I trust in You and with Your sustenance I break my fast.
اللَّهُمَّ إِنِّي لَكَ صُمْتُ وَبِكَ آمَنْتُ وَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ وَعَلَى رِزْقِكَ أَفْطَرْتُ
रमजान मुख्य रूप से पवित्र कुरान के अवतरण (Nuzul-e-Quran) की खुशी और अल्लाह के प्रति आभार प्रकट करने के लिए मनाया जाता है, क्योंकि इसी महीने में इस्लाम की पवित्र किताब दुनिया में आई थी। इस पूरे महीने मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा (उपवास) रखते हैं, जिसका उद्देश्य आत्म-संयम सीखना, अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण पाना और भूखे-प्यासे रहकर गरीबों के दर्द को शिद्दत से महसूस करना है।
ये महीना केवल इबादत का ही नहीं, बल्कि दान-पुण्य (जकात) और रूहानी पाकीजगी का भी समय है, जो इंसान को धैर्यवान और संवेदनशील बनाता है।
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