रमजान के दौरान शारीरिक गतिविधि और रोजा के बीच संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है। आप अपने वर्कआउट का समय रोजा न रहने वाले घंटों में रख सकते हैं, जैसे इफ्तार के बाद या सहरी से पहले। अगर आप रमजान में भी नियमित फिटनेस रूटीन बनाए रखना चाहते हैं और थकान या चोट से बचना चाहते हैं, तो समझदारी से योजना बनाना जरूरी है।
एचटी लाइफस्टाइल से बातचीत में एक्यूपंक्चर विशेषज्ञ और अकुशास्त्र प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक जैस्मिन मोदी ने कहा कि रमजान आध्यात्मिक चिंतन का समय है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि फिटनेस को नजरअंदाज किया जाए। सही तरीके से रोजा और वर्कआउट साथ-साथ चल सकते हैं।
उन्होंने बताया कि सहरी के समय या इफ्तार के बाद हल्के और कम प्रभाव वाले व्यायाम जैसे योग, पिलाटीज और बॉडीवेट ट्रेनिंग करना बेहतर है, क्योंकि उस समय शरीर को ऊर्जा मिल चुकी होती है। मध्यम तीव्रता वाली स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और कम समय का कार्डियो मसल्स और सहनशक्ति बनाए रखने में मदद करता है।
सबसे जरूरी है कि शरीर की सुनें। पानी की कमी न होने दें, पर्याप्त आराम करें और संतुलित तरीके से व्यायाम करें। रमजान का मकसद शरीर और आत्मा दोनों का ध्यान रखना है।
एचटी लाइफस्टाइल से बातचीत के दौरान फिजियोतत्व की क्लिनिकल और कॉरपोरेट वेलनेस हेड डॉ. धरित्री ब्रह्मभट्ट ने कहा कि रोजा के दौरान ऊर्जा का स्तर कम हो सकता है, इसलिए हल्का व्यायाम जरूरी है। लेकिन ध्यान रहे कि ज्यादा मेहनत न करें, क्योंकि दिन में खाना और पानी नहीं लिया जाता। सही समय पर सही व्यायाम करने से ऊर्जा और ताकत बनी रहती है।
वर्कआउट का सही समय क्या है?
- सहरी से पहले आप हल्का स्ट्रेचिंग या योग कर सकते हैं ताकि मांसपेशियां सक्रिय हो सकें।
- इफ्तार से पहले 30 से 45 मिनट तक हल्की गतिविधियां जैसे वॉकिंग या हल्के बॉडीवेट एक्सरसाइज कर सकते हैं।
- इफ्तार के बाद खाना खाने के तुरंत बाद व्यायाम न करें। कम से कम 45 मिनट से 1 घंटे का अंतर रखें। इस समय मध्यम स्तर का वर्कआउट करें और बहुत भारी एक्सरसाइज से बचें।
रमजान में किए जा सकने वाले वर्कआउट
कम प्रभाव वाला कार्डियो 30 से 45 मिनट तक, इफ्तार से पहले या बाद में। इसमें वॉकिंग, साइक्लिंग या हल्की जॉगिंग शामिल है, जिससे शरीर सक्रिय रहता है और ज्यादा थकान नहीं होती।
इफ्तार के बाद 30 से 40 मिनट की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग। इसमें स्क्वैट्स, लंजेस, पुशअप्स, प्लैंक और डंबल एक्सरसाइज जैसे बाइसेप्स और ट्राइसेप्स कर्ल शामिल हैं। अगर डंबल न हों तो पानी की बोतलों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सहरी या इफ्तार से पहले 20 से 30 मिनट योग और स्ट्रेचिंग। इससे लचीलापन बढ़ता है, तनाव कम होता है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।
इफ्तार के 45 मिनट से 1 घंटे बाद 20 से 30 मिनट का हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग किया जा सकता है, लेकिन केवल उन्हीं लोगों के लिए जो पहले से इसके आदी हैं। इसमें जम्पिंग जैक, स्क्वैट्स, हल्की दौड़ और कोर एक्सरसाइज शामिल हो सकती हैं। इफ्तार के बाद पर्याप्त पानी पीना जरूरी है।
डॉ. ब्रह्मभट्ट ने कहा कि व्यायाम से दिल की सेहत, मांसपेशियों की ताकत और शरीर की फिटनेस बेहतर होती है। रोजा के दौरान बहुत ज्यादा तीव्र व्यायाम से बचें, क्योंकि इससे चक्कर, कमजोरी या बेहोशी जैसा महसूस हो सकता है। सुबह या शाम के समय व्यायाम करना बेहतर है, जब गर्मी कम हो। ज्यादा गर्मी में व्यायाम करने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है और कमजोरी बढ़ सकती है।
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)