Ramadan Mubarak: क्या होता है सदका-ए-फित्र? जानिए कितना देना होता है फित्र और ये क्यों है जरूरी

फित्रा या जकात-उल-फित्र रमजान के अंत में ईद की नमाज से पहले दिया जाने वाला अनिवार्य दान है। यह हर सक्षम मुसलमान पर जरूरी है और घर का मुखिया सभी आश्रितों की ओर से अदा करता है। इसका उद्देश्य जरूरतमंदों को भी ईद की खुशी में शामिल करना है।

Manali Rastogi
अपडेटेड19 Feb 2026, 06:38 AM IST
क्या होता है सदका-ए-फित्र? जानिए कितना देना होता है फित्र और ये क्यों है जरूरी
क्या होता है सदका-ए-फित्र? जानिए कितना देना होता है फित्र और ये क्यों है जरूरी

दुनिया भर के मुसलमान जब रमजान 2026 की शुरुआत के साथ ईद की खुशियों की तैयारी करते हैं, तो वे एक और अहम इबादत की तैयारी करते हैं जिसे “फित्रा” कहा जाता है। फित्रा, जिसे जकात-उल-फित्र, फित्राना या सदका-ए-फित्र भी कहा जाता है, एक अनिवार्य दान है जो ईद-उल-फित्र की नमाज से पहले दिया जाता है। यह एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण मदद है, ताकि समाज के जरूरतमंद लोग भी ईद को सम्मान और खुशी के साथ मना सकें।

फित्र (जकात-उल-फित्र) क्या है?

जकात-उल-फित्र एक अनिवार्य दान है, जो ईद-उल-फित्र की नमाज से पहले दिया जाता है। रमजान के अंत में हर सक्षम मुसलमान पर फित्रा देना जरूरी होता है। यह दान अल्लाह का शुक्र अदा करने के लिए दिया जाता है, जिन्होंने रोजा रखने की ताकत, हिम्मत और सब्र दिया।

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घर का मुखिया अपने साथ-साथ अपने आश्रितों, जैसे बच्चों और बुजुर्ग परिवारजनों की ओर से भी फित्रा अदा करता है। फित्रा देने की परंपरा हजरत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के समय से चली आ रही है।

फित्रा देना किस पर जरूरी है और कितना देना होता है?

हर वह मुसलमान जिसके पास पर्याप्त आर्थिक साधन हैं, उस पर फित्रा देना जरूरी है। इसकी मात्रा रोजमर्रा के मुख्य खाद्य पदार्थों के आधार पर तय की जाती है और व्यक्ति की क्षमता के अनुसार होती है।

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यहां “खाद्य पदार्थ” से मतलब गेहूं, जौ, खजूर, किशमिश या बाजरा जैसे आम अनाज से है। परंपरागत रूप से हर सदस्य के लिए लगभग 2.25 किलोग्राम अनाज के बराबर फित्रा दिया जाता है। चूंकि यह अनाज की कीमत पर आधारित होता है, इसलिए हर साल इसकी राशि बदल सकती है।

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कोलकाता में नखोदा मस्जिद की मस्जिद-ए-नखोदा मरकज़ी रूयत-ए-हिलाल कमेटी बैठक के बाद सदका-ए-फित्र की राशि की घोषणा करती है। मस्जिद के ट्रस्टी और कमेटी के संयोजक नासिर इब्राहिम हर रमजान में आधिकारिक तौर पर फित्रा की रकम घोषित करते हैं।

फित्र कब देना चाहिए?

फित्र रमजान के आखिरी दिन सूरज ढलने के बाद और ईद-उल-फित्र की नमाज से पहले देना चाहिए। ईद की नमाज अगली सुबह सूर्योदय के थोड़ी देर बाद अदा की जाती है। यह दान सुनिश्चित करता है कि जरूरतमंद मुसलमान भी पूरे समुदाय के साथ ईद की खुशियों में शामिल हो सकें।

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