मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती पर आज बन रहे विशेष योग, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती 1 दिसंबर 2025 को पड़ रही हैं। जानिए शुभ मुहूर्त, आध्यात्मिक महत्व, पूजा विधि, लाभ, और क्यों यह एकादशी आशीर्वाद, शांति और समृद्धि लेकर आती है।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड1 Dec 2025, 11:30 AM IST
मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती पर आज बन रहे विशेष योग, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व
मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती पर आज बन रहे विशेष योग, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

मोक्षदा एकादशी 2025 इस बार बेहद शुभ संयोग लेकर आ रही है, क्योंकि मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती दोनों ही 1 दिसंबर को मनाई जाएंगी। इसे साल की सबसे पवित्र एकादशियों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने, पूजा करने और गीता पाठ करने से पापों से मुक्ति, पूर्वजों की शांति और भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन किया गया व्रत और पूजा विशेष पुण्य, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति देती है।

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मोक्षदा एकादशी की तारीख और शुभ मुहूर्त

  • अगहन (मार्गशीर्ष) महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 30 नवंबर रात 9:29 बजे शुरू होकर 1 दिसंबर शाम 7:01 बजे समाप्त होगी।
  • उदय तिथि के अनुसार व्रत और सभी अनुष्ठान 1 दिसंबर 2025 को होंगे।
  • इस वर्ष अधिक मास होने की वजह से एकादशियों की कुल संख्या 24 की जगह 26 हो गई है, जिससे इस व्रत का महत्व और बढ़ गया है।

मोक्षदा एकादशी का महत्व

मोक्षदा एकादशी को सभी एकादशियों में विशेष स्थान प्राप्त है। इसे विष्णुप्रिया एकादशी भी कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा से दुख दूर होते हैं, पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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इस दिन किए गए तर्पण से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मुक्ति मिलती है, खासतौर पर उन पूर्वजों को जो अभी तक मोक्ष नहीं पा सके हैं।

गीता जयंती क्यों मनाई जाती है?

  • गीता जयंती वह दिन है जब भगवान कृष्ण ने महाभारत के युद्ध से पहले कुरुक्षेत्र में अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था।
  • यह उपदेश मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी को दिया गया था, इसलिए इसी दिन को गीता जयंती कहा जाता है।
  • भगवद्गीता को वेद, उपनिषद, धर्म, कर्म और जीवन दर्शन का सार माना जाता है। इसके 18 अध्याय जीवन के हर पहलू के लिए मार्गदर्शन देते हैं।

गीता जयंती पर इस पूजा विधि का करें पालन

अधिकतम शुभ फल पाने के लिए भक्तों को निम्न कार्य करने चाहिए:

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
  • भगवान कृष्ण की मूर्ति और भगवद्गीता को साफ कपड़े पर रखें
  • जल, अक्षत, पीले फूल, धूप, दीपक और नैवेद्य अर्पित करें
  • श्रद्धा से गीता पाठ करें
  • भगवद्गीता की प्रति दान करें — गीता दान को महादान कहा गया है

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गीता उपदेश का ऐतिहासिक संदर्भ

महाभारत युद्ध शुरू होने से ठीक पहले भगवान कृष्ण ने अर्जुन को दिव्य ज्ञान दिया था। इसलिए गीता में “श्रीभगवान उवाच” लिखा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह निर्देश केवल कृष्ण के नहीं, बल्कि सार्वभौमिक दिव्य ज्ञान के प्रतीक हैं।

गीता से जीवन और आध्यात्मिक सीख

  • कर्म करना जरूरी है
  • कर्म न करना भी एक प्रकार का कर्म है
  • हर कर्म का फल मिलता है
  • धर्म, संतुलन और कर्तव्य पालन जीवन का आधार है

मोक्षदा एकादशी के लाभ

  • मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति
  • पूर्वजों को शांति और मुक्ति
  • पाप और नकारात्मकता का नाश
  • आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि
  • संतान, धन और विवाह से जुड़े इच्छाओं की पूर्ति
  • गौदान, गीता दान और दान-पुण्य का विशेष महत्व
  • भगवान विष्णु का वैकुंठ आशीर्वाद

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1 दिसंबर 2025 को गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी का दुर्लभ योग भक्तों के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है। इस दिन व्रत, पूजा, गीता पाठ और दान करने से अत्यंत शुभ फल, दिव्य कृपा और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन प्राप्त होते हैं।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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