साल 2026 की होली इस बार खास रहने वाली है, क्योंकि फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। माना जा रहा है कि ऐसा संयोग करीब 100 साल बाद बना है। इसी वजह से होलिका दहन और पूजा के समय को लेकर लोगों में उलझन है।
चंद्र ग्रहण का समय
3 मार्च 2026 को दोपहर 3:20 बजे से चंद्र ग्रहण शुरू होगा और शाम 6:47 बजे तक रहेगा। ग्रहण से 9 घंटे पहले यानी सुबह 6:20 बजे से सूतक काल लग जाएगा। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ या धार्मिक कार्य नहीं किए जाते। यह ग्रहण दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में चंद्रोदय के समय थोड़ी देर के लिए दिखाई देगा।
होलिका दहन की तिथि को लेकर भ्रम
फाल्गुन पूर्णिमा की शुरुआत 2 मार्च की शाम 5:56 बजे से हो रही है और 3 मार्च की शाम 5:07 बजे तक रहेगी। कुछ पंचांगों के अनुसार होलिका दहन 2 मार्च की शाम प्रदोष काल में किया जा सकता है, लेकिन उस दिन भद्रा का प्रभाव रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में होलिका दहन शुभ नहीं माना जाता।
कब करना सही रहेगा होलिका दहन?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार होलिका दहन भद्रा और सूतक काल में नहीं किया जाता। चूंकि 2 मार्च की रात भद्रा है और 3 मार्च को सुबह से सूतक काल शुरू हो जाएगा, इसलिए अधिकतर पंचांग 3 मार्च को सूतक समाप्त होने के बाद होलिका दहन करने की सलाह दे रहे हैं। भले ही उस समय पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाए, लेकिन दिन पूर्णिमा की उदया तिथि का रहेगा, इसलिए यह मान्य होगा।
हालांकि, महिलाएं होली का पूजन 2 मार्च को ही करेंगी, क्योंकि 3 मार्च की सुबह 6:20 बजे से सूतक काल लग जाएगा। इस तरह दोनों परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार होलिका दहन और होली का उत्सव मना सकते हैं।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)