
पपीता लगभग हर उस सूची में शामिल होता है जो डायबिटीज़ के लिए फायदेमंद मानी जाती है। लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है। कच्चा पपीता खाएं या पका हुआ? दोनों अलग दिखते हैं और शरीर पर अलग असर डालते हैं। अगर आपको डायबिटीज़ या बॉर्डरलाइन शुगर की समस्या है, तो यह फर्क समझना बहुत जरूरी है। क्योंकि पपीते के पकने के साथ उसका असर भी बदल जाता है।
कच्चा और पका पपीता पोषण के मामले में एक जैसे नहीं होते। जैसे-जैसे पपीता पकता है, उसमें शुगर, फाइबर और ग्लाइसेमिक असर बदल जाता है।
एक रिसर्च के अनुसार पपीते में मौजूद विटामिन C, फाइबर, फ्लेवोनॉयड्स और सैपोनिन ब्लड शुगर कम करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन यह असर इस बात पर निर्भर करता है कि आप कच्चा पपीता खा रहे हैं या पका हुआ। यही वजह है कि डायबिटीज से जूझ रहे लाखों लोग इस बात को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं।
दोनों ही पोषक हैं, लेकिन शुगर और फाइबर का फर्क साफ दिखता है।
फायदे:
पका पपीता मुलायम और मीठा होता है। इसकी मिठास ज्यादा फ्रक्टोज के कारण होती है।
इसका मतलब:
ग्लाइसेमिक इंडेक्स बताता है कि कोई भोजन कितनी तेजी से ब्लड शुगर बढ़ाता है।
इसी वजह से डायबिटीज़ में कच्चा पपीता ज्यादा बेहतर माना जाता है।
सीधा जवाब है: दोनों खा सकते हैं, लेकिन सही तरीके से।
आपकी दवा और शुगर लेवल के हिसाब से इसमें बदलाव जरूरी हो सकता है। इसके लिए डाइटीशियन से सलाह लेना अच्छा रहता है।
पपीता आमतौर पर सुरक्षित है, लेकिन कुछ लोगों को ध्यान रखना चाहिए:
ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए कच्चा पपीता ज्यादा बेहतर माना जाता है क्योंकि इसमें फाइबर ज्यादा और शुगर कम होती है। पका पपीता भी खा सकते हैं, लेकिन सीमित मात्रा में। सही मात्रा, समय और तरीके से खाने पर ही इसका पूरा फायदा मिलता है।
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)
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