Jaya Ekadashi Vrat Katha: जया एकादशी पर पढ़ें जया एकादशी व्रत कथा, पूरी होगी हर मनोकामना

जया एकादशी 29 जनवरी 2026 को मनाई जा रही है। यह व्रत पापों से मुक्ति, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और व्रत कथा का पाठ किया जाता है। श्रद्धा से व्रत करने पर सुख, शांति और मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती है।

Manali Rastogi
अपडेटेड29 Jan 2026, 06:18 AM IST
जया एकादशी की व्रत कथा
जया एकादशी की व्रत कथा

जया एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे भारत और दुनिया के कई हिस्सों में श्रद्धालु पूरे भक्ति भाव से मनाते हैं। वर्ष 2026 में जया एकादशी गुरुवार, 29 जनवरी को पड़ेगी। यह एकादशी माघ माह के शुक्ल पक्ष में आती है और इसका हिंदू धर्म में विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 28 जनवरी को शाम 4:35 बजे शुरू होगी और 29 जनवरी को दोपहर 1:55 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार व्रत 29 जनवरी को रखा जाएगा। जया एकादशी का व्रत अगले दिन पारण के साथ पूरा किया जाता है। इस वर्ष पारण का शुभ समय 30 जनवरी को सुबह 7:10 बजे से 9:20 बजे के बीच बताया गया है। इस दिन व्रत रखने से पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती है।

यहां पढ़िए जया एकादशी की व्रत कथा (Jaya Ekadashi Vrat Katha In Hindi)

भगवान श्रीकृष्ण ने महाराज युधिष्ठिर को यह कथा सुनाई थी। उन्होंने बताया कि एक बार इंद्र की सभा में अप्सराएं नृत्य कर रही थीं। उसी सभा में प्रसिद्ध गंधर्व पुष्पवंत, उसकी पुत्री पुष्पवती, चित्रसेन की पत्नी मालिनी और उनका पुत्र माल्यवान भी उपस्थित थे।

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सभा के दौरान पुष्पवती माल्यवान को देखकर मोहित हो गई। उसके मन में कामभाव जाग उठा। उसने अपने रूप और हाव-भाव से माल्यवान को आकर्षित किया। पुष्पवती के सुंदर रूप से माल्यवान भी उस पर आसक्त हो गया। दोनों अपने वश में न रह सके और अनुचित आचरण में लिप्त हो गए।

जब इंद्र ने यह देखा तो उन्होंने दोनों को अलग करने के लिए नृत्य करने का आदेश दिया। इंद्र की आज्ञा मानकर दोनों नाचने लगे, लेकिन मन में कामभाव होने के कारण वे ठीक से नृत्य नहीं कर पा रहे थे। इंद्र सब समझ गए और क्रोधित होकर उन्होंने दोनों को शाप दे दिया कि वे मृत्यु लोक में जाकर पिशाच योनि में जन्म लेंगे और अपने कर्मों का फल भोगेंगे।

इंद्र के शाप से दोनों हिमालय में पिशाच बनकर दुख भरा जीवन जीने लगे। उन्हें रात भर नींद नहीं आती थी। एक दिन पिशाच ने अपनी पत्नी से कहा कि पता नहीं पिछले जन्म में हमने कौन से पाप किए थे, जिनके कारण हमें यह कष्टदायक जीवन मिला।

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एक दिन उनकी भेंट देवर्षि नारद से हुई। नारद जी ने उनके दुख का कारण पूछा। तब दोनों ने पूरी कहानी सुना दी। नारद जी ने उन्हें माघ मास के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करने की सलाह दी।

नारद जी की बात मानकर दोनों ने श्रद्धा से जया एकादशी का व्रत किया और पूरी रात भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए जागरण किया। अगले दिन प्रभात होते ही भगवान विष्णु की कृपा से उनकी पिशाच देह समाप्त हो गई और वे अपने पूर्व स्वरूप में लौट आए।

इसके बाद दोनों इंद्र लोक पहुंचे और इंद्र को प्रणाम किया। उन्हें पूर्व रूप में देखकर इंद्र भी आश्चर्यचकित हो गए और पूछा कि उन्होंने पिशाच योनि से कैसे मुक्ति पाई। तब दोनों ने जया एकादशी के व्रत की पूरी कथा इंद्र को सुना दी।

जानिए जया एकादशी की तिथि और महत्व

  • जया एकादशी की तिथि: गुरुवार, 29 जनवरी 2026
  • एकादशी तिथि शुरू: बुधवार, 28 जनवरी 2026 को शाम 4:35 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को दोपहर 1:55 बजे
  • पारण (व्रत खोलने का समय): शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 को सुबह 7:10 बजे से 9:20 बजे तक

जया एकादशी को पापों से मुक्ति, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बहुत शुभ माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सच्चे मन से इस व्रत को करने से व्यक्ति अपने पुराने कर्मों के बंधन से मुक्त होता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करता है। यह व्रत मोक्ष की प्राप्ति में भी सहायक माना गया है।

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इस दिन भक्त प्रातः जल्दी उठकर स्नान करते हैं और पूजा-पाठ के साथ व्रत का संकल्प लेते हैं। कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ अपनी क्षमता के अनुसार फल या दूध से व्रत करते हैं।

घर और मंदिरों में भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”, पवित्र ग्रंथों का पाठ और जया एकादशी व्रत कथा का श्रवण किया जाता है। विष्णु मंदिरों में विशेष आरती और भजन-कीर्तन होते हैं।

यह व्रत आत्मसंयम, सांसारिक आसक्तियों से दूरी और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रद्धा और नियम के साथ जया एकादशी का व्रत करने से भक्त सुख, शांति, समृद्धि और ईश्वरीय संरक्षण की कामना करते हैं।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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