
पूर्णिमा हर हिंदू चंद्र महीने के शुक्ल पक्ष की 15वीं तिथि होती है। हर महीने एक बार पूर्णिमा आती है, इसलिए पूरे साल में 12 पूर्णिमा तिथियां होती हैं। इस दिन चंद्रदेव पूरे आकाश में अपनी पूर्ण रोशनी से चमकते हैं और भक्तों को आध्यात्मिक और भौतिक लाभ देते हैं।
इसी कारण, हिंदू धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्व है। ऐसी ही एक पवित्र तिथि है कार्तिक पूर्णिमा। इस दिन भक्त भगवान विष्णु और भगवान शिव की कृपा पाने के लिए व्रत रखते हैं। साल 2025 में कार्तिक पूर्णिमा व्रत 5 नवंबर को रखा जा रहा है।
बहुत समय पहले तारकासुर नाम का एक राक्षस था। उसके तीन पुत्र तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युनमाली थे। तारकासुर बहुत बलशाली था और धरती व स्वर्ग में आतंक फैलाता था। देवता उसकी अत्याचारों से दुखी होकर भगवान शिव से सहायता की प्रार्थना करने लगे। भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना सुनकर तारकासुर का वध कर दिया, जिससे देवता बहुत प्रसन्न हुए।
तारकासुर के तीनों पुत्र दुखी होकर बदला लेने के लिए भगवान ब्रह्मा की कठोर तपस्या करने लगे। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उन्हें वरदान मांगने को कहा। तीनों ने अमर होने का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्मा जी ने कहा कि अमरता का वरदान नहीं दिया जा सकता।
फिर तीनों ने कहा, “हे प्रभु, हमारे लिए तीन अलग-अलग नगर बनाइए, जिनसे हम आकाश और पृथ्वी पर घूम सकें। और जब हजार साल बाद ये तीनों नगर एक सीध में आएं, तभी कोई देवता हमें एक ही बाण से नष्ट कर सके।”
ब्रह्मा जी ने उनकी इच्छा पूरी की। मयदानव ने तीनों नगर बनाए सोने का नगर तारकाक्ष के लिए, चांदी का कमलाक्ष के लिए और लोहे का विद्युनमाली के लिए। तीनों ने मिलकर तीनों लोकों पर शासन करना शुरू किया। देवता फिर से भयभीत हो गए और इंद्रदेव ने भगवान शिव से सहायता मांगी।
भगवान शिव ने तब एक दिव्य रथ बनाया। इस रथ के पहिए सूर्य और चंद्रमा थे, चार घोड़े इंद्र, वरुण, यम और कुबेर थे। हिमालय धनुष बना और शेषनाग धनुष की डोरी बने। भगवान शिव स्वयं बाण बने और अग्निदेव बाण की नोक।
जब तीनों राक्षसों के नगर एक सीध में आए, तब भगवान शिव ने एक ही बाण से तीनों नगरों को नष्ट कर दिया। देवता अत्यंत प्रसन्न हुए और भगवान शिव को ‘त्रिपुरारी’ नाम दिया गया।
व्रत के दौरान केवल फल, दूध और पानी का सेवन किया जा सकता है या निर्जल उपवास रखा जा सकता है। इस दिन अनाज, मसाले, तंबाकू, चाय और कॉफी जैसी चीजों से परहेज़ करना चाहिए।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन व्रत रखने और दान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)
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