बाल समय रबि भक्षि लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारो - संकटमोचन हनुमानाष्टक

Sankatmochan Hanuman Ashtak: हनुमान अष्टक में “बाल समय रवि भक्ष लियो तब, तीनों लोक भयो अंधियारा” जैसे दोहे आते हैं। इसका पाठ करना बहुत शुभ और लाभकारी माना जाता है। हनुमान चालीसा के साथ हनुमान अष्टक पढ़ने से मंगल दोष और डर-भय दूर होते हैं।

Manali Rastogi
अपडेटेड27 Jan 2026, 05:59 AM IST
संकटमोचन हनुमानाष्टक
संकटमोचन हनुमानाष्टक

बाल समय रबि भक्षि लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारो ।

ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो ॥

देवन आन करि बिनती तब, छांड़ि दियो रबि कष्ट निवारो ।

को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 1 ॥

बालि की त्रास कपीस बसै गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो ।

चौंकि महा मुनि शाप दिया तब, चाहिय कौन बिचार बिचारो ॥

के द्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के शोक निवारो ।

को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥2॥

अंगद के संग लेन गये सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो ।

जीवत ना बचिहौ हम सो जु, बिना सुधि लाय इहाँ पगु धारो ॥

हेरि थके तट सिंधु सबै तब, लाय सिया-सुधि प्राण उबारो ।

को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥3॥

रावन त्रास दई सिय को सब, राक्षसि सों कहि शोक निवारो ।

ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाय महा रजनीचर मारो ॥

चाहत सीय अशोक सों आगि सु, दै प्रभु मुद्रिका शोक निवारो ।

को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥4॥

बाण लग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सुत रावण मारो ।

लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ॥

आनि सजीवन हाथ दई तब, लछिमन के तुम प्राण उबारो ।

को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥5॥

रावण युद्ध अजान कियो तब, नाग कि फांस सबै सिर डारो ।

श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयोयह संकट भारो ॥

आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो ।

को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥6॥

बंधु समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पाताल सिधारो ।

देबिहिं पूजि भली बिधि सों बलि, देउ सबै मिति मंत्र बिचारो ॥

जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावण सैन्य समेत सँहारो ।

को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥7॥

काज किये बड़ देवन के तुम, वीर महाप्रभु देखि बिचारो ।

कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसों नहिं जात है टारो ॥

बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होय हमारो ।

को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥8॥॥

दोहा :

॥लाल देह लाली लसे, अरू धरि लाल लंगूर ।

बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर ॥

॥ इति संकटमोचन हनुमानाष्टक सम्पूर्णम ॥

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(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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