
शीतला अष्टमी को बसौड़ा पूजा भी कहा जाता है। इस दिन माता शीतला की पूजा की जाती है। माना जाता है कि माता शीतला ठंडक प्रदान करती हैं और बीमारियों से रक्षा करती हैं। खासकर गर्मियों में होने वाली बीमारियों से बचने के लिए इस दिन माता की पूजा का विशेष महत्व होता है।
इस दिन माता शीतला को बासी भोजन का भोग लगाने की परंपरा है। आइए जानते हैं शीतला अष्टमी 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार माता शीतला ने सोचा कि पृथ्वी पर जाकर देखना चाहिए कि लोग उनकी पूजा करते हैं या नहीं। जब वह धरती पर आईं तो उन्होंने देखा कि कहीं उनका मंदिर नहीं है और लोग उनकी विधि-विधान से पूजा भी नहीं कर रहे हैं।
माता शीतला गांव में घूमने लगीं। तभी एक गली से गुजरते समय किसी ने उन पर उबले चावल का गर्म पानी फेंक दिया। इससे उनके शरीर में तेज जलन होने लगी और फफोले पड़ गए। दर्द से परेशान होकर माता गांव में इधर-उधर मदद मांगती रहीं, लेकिन किसी ने उनकी सहायता नहीं की।
तभी एक गरीब कुम्हारिन ने उनकी हालत देखी और दया से उन्हें अपने घर ले गई। उसने माता को ठंडी बासी रोटी और दही खिलाया। ठंडा भोजन खाने से माता की जलन कम हो गई।
कुम्हारिन की सेवा और दया से प्रसन्न होकर माता शीतला ने उसे अपने असली रूप में दर्शन दिए और उसका दुख-दरिद्रता दूर कर दी। माता ने कहा कि जो भी भक्त होली के बाद आने वाली अष्टमी के दिन श्रद्धा से उनकी पूजा करेगा और ठंडा व बासी भोजन का भोग लगाएगा, उसके घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होगी। इसी मान्यता के कारण हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)
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