Vijaya Ekadashi 2026 Vrat Katha: विजया एकादशी आज, विष्णु पूजा के समय ये व्रत कथा पढ़ने से पूरी होगी हर मनोकामना

विजया एकादशी 2026 भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण हिंदू व्रत है। इसे श्रद्धा और भक्ति के साथ रखा जाता है, ताकि जीवन में आध्यात्मिक शक्ति और मन की शांति प्राप्त हो सके।

Manali Rastogi
अपडेटेड13 Feb 2026, 06:06 AM IST
विजया एकादशी व्रत कथा
विजया एकादशी व्रत कथा

Vijaya Ekadashi 2026 Vrat Katha: हर साल फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को भक्त विजया एकादशी का व्रत रखते हैं। इस पवित्र दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है और पीले रंग की वस्तुओं का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। वर्ष 2026 में विजया एकादशी 13 फरवरी को मनाई जाएगी।

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हिंदू धर्मग्रंथों में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। इसे सबसे प्रभावशाली धार्मिक व्रतों में से एक माना जाता है। इसकी खास बात यह है कि इस व्रत से मिलने वाला पुण्य किसी अन्य व्यक्ति को भी समर्पित किया जा सकता है। कहा जाता है कि विजया एकादशी का व्रत रखने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

विजया एकादशी व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजया एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और पवित्र मंत्रों का जाप करने से परेशानियां दूर होती हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। भक्तों का विश्वास है कि यह व्रत कठिन समय में मन को मजबूत बनाता है और सही निर्णय लेने की शक्ति देता है।

विजया एकादशी व्रत कथा (Vijaya Ekadashi Vrat Katha In Hindi)

एक बार युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि फाल्गुन कृष्ण एकादशी का क्या महत्व है। भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि इस एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है। यह व्रत करने से व्यक्ति को अपने कामों में सफलता मिलती है, पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। ब्रह्मा जी ने नारद मुनि को इस एकादशी का महत्व बताया था।

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कथा के अनुसार त्रेतायुग में अयोध्या के राजा दशरथ के चार पुत्र थे, राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न। कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगे। उन्होंने राम को 14 वर्ष का वनवास और भरत को राजगद्दी देने की मांग की। वचन निभाने के लिए राम वन चले गए। उनके साथ माता सीता और भाई लक्ष्मण भी गए।

वन में रावण ने सीता का हरण कर लिया और उन्हें लंका ले गया। सीता की खोज के लिए राम ने वानर सेना की मदद ली। जब उन्हें पता चला कि सीता लंका में हैं, तब उन्होंने वहां जाने का निश्चय किया। लेकिन समस्या यह थी कि बीच में विशाल समुद्र था, जिसे पार करना आसान नहीं था।

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तब लक्ष्मण ने बताया कि पास में वकदालभ्य ऋषि का आश्रम है। राम उनसे मार्गदर्शन लेने पहुंचे। ऋषि ने कहा कि आप फाल्गुन कृष्ण एकादशी का व्रत करें और भगवान विष्णु की पूजा करें। यह व्रत आप अपने भाई और पूरी सेना के साथ मिलकर करें। इस व्रत के प्रभाव से कठिन कार्य भी सफल हो जाते हैं।

राम ने ऋषि की बात मानी। फाल्गुन कृष्ण एकादशी के दिन उन्होंने विधि अनुसार व्रत रखा और भगवान विष्णु की पूजा की। व्रत के पुण्य से वानर सेना ने समुद्र पर सेतु बनाया और लंका पहुंच गई। वहां युद्ध हुआ और राम ने रावण का वध किया। माता सीता को मुक्त कराया गया।

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अंत में राम, सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौट आए। इस कथा से यह सीख मिलती है कि जो भी श्रद्धा और विश्वास के साथ विजया एकादशी का व्रत करता है, उसे अपने जीवन में सफलता और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।

हिंदू परंपरा में एकादशी का महत्व

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की कृपा पाने का एक बहुत प्रभावी उपाय माना जाता है। एकादशी हर महीने दो बार आती है, एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। लेकिन फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। इसे विजया एकादशी कहा जाता है।

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मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से सफलता, प्रगति और आध्यात्मिक शक्ति मिलती है। भक्तों का विश्वास है कि यह व्रत करने से जीवन और करियर की बाधाएं दूर होती हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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