प्रोटीन आजकल हेल्दी डाइट का सबसे बड़ा ट्रेंड बन चुका है। हर कोई इसकी बात करता है, हर पैकेट पर हाई प्रोटीन लिखा होता है। ऐसा लगता है कि जितना ज़्यादा प्रोटीन, उतना बेहतर शरीर और मज़बूत मांसपेशियां। लेकिन इंटीग्रेटिव लाइफस्टाइल एक्सपर्ट ल्यूक कुटिन्हो मानते हैं कि प्रोटीन को लेकर यह जुनून सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकता है।
19 जनवरी को इंस्टाग्राम पर ल्यूक ने कहा कि सिर्फ प्रोटीन की मात्रा पर ध्यान देना सूजन बढ़ा सकता है, आंतों की सेहत बिगाड़ सकता है और ब्लड शुगर को भी प्रभावित कर सकता है, खासकर भारतीयों में। फिट होने या मसल्स बनाने के चक्कर में खाया गया खाना कई बार फैट बढ़ाने का कारण बन जाता है।
ल्यूक ने कहा, “हम सब उस जादुई प्रोटीन नंबर के पीछे भाग रहे हैं। मसल्स, एनर्जी और सेल रिपेयर के लिए इसे सब कुछ मान लिया गया है। लेकिन प्रोटीन शेक, बार और स्नैक्स खाते समय हम उनमें छुपी खराब चीज़ों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।” उन्होंने तीन ऐसे तत्व बताए जो प्रोटीन बार और स्नैक्स में आमतौर पर होते हैं और शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं।
पाम ऑयल
कई प्रोटीन बार और पैकेज्ड स्नैक्स में पाम ऑयल या पाम कर्नेल ऑयल होता है, ताकि उनका स्वाद और शेल्फ लाइफ बनी रहे। लेकिन यह सेहत के लिए अच्छा नहीं है। ल्यूक के अनुसार, इसमें सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है, जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ाकर दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि प्रोसेस्ड पाम ऑयल में ऐसे तत्व हो सकते हैं जो अंगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और कैंसर का जोखिम भी बढ़ा सकते हैं। उनकी सलाह साफ है कि जहां तक हो सके पैकेज्ड चीज़ों से दूर रहें और साबुत, असली खाना खाएं। जैसे पनीर, दही, दालें, अनाज के साथ दालें, अंडे और चिकन लीवर।
रिफाइंड आटा और प्रोसेस्ड कार्ब्स
कई हाई प्रोटीन स्नैक्स में रिफाइंड गेहूं या इसी तरह का आटा भराव के तौर पर इस्तेमाल होता है। ल्यूक कहते हैं कि इनमें फाइबर, विटामिन और मिनरल नहीं होते। ये तेजी से ब्लड शुगर बढ़ाते हैं, फैट जमा करते हैं और शरीर में हल्की सूजन पैदा करते हैं। उनके मुताबिक, ऐसे स्नैक्स असल में “महंगे कैंडी बार” जैसे होते हैं। ये आंतों को नुकसान पहुंचाते हैं, इंसुलिन बढ़ाते हैं और सेहत सुधारने के बजाय बिगाड़ते हैं।
आर्टिफिशियल स्वीटनर
सुक्रालोज, एस्पार्टेम और एसेसल्फेम-के जैसे स्वीटनर को ज़ीरो कैलोरी और सेफ बताया जाता है, इसलिए इन्हें प्रोटीन प्रोडक्ट्स में डाला जाता है। लेकिन ल्यूक इससे सहमत नहीं हैं। उनके अनुसार, रिसर्च बताती है कि ये आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा सकते हैं, मेटाबॉलिज़्म बिगाड़ सकते हैं, ज़्यादा खाने की इच्छा बढ़ा सकते हैं और सूजन व मेटाबॉलिक समस्याओं का खतरा बढ़ा सकते हैं।
ये स्वीटनर भूख के नैचुरल संकेतों को भ्रमित कर देते हैं। इंसान को ज़्यादा भूख लगती है, ज़्यादा क्रेविंग होती है और धीरे-धीरे फैट बढ़ने लगता है। ल्यूक का मकसद प्रोटीन को गलत बताना नहीं है, बल्कि उसे आंख बंद करके पूजने से रोकना है।
वे कहते हैं कि पैकेट पर लिखे दावों के बजाय सामग्री की सूची पढ़ना ज़रूरी है। आज भी साबुत और कम प्रोसेस्ड खाना सबसे बेहतर है। जैसे देसी घास पर पले जानवरों का मांस, अंडे, मछली, मेवे, सोया, दालें, अनाज और डेयरी प्रोडक्ट्स। अगर सप्लीमेंट लेना ज़रूरी हो, तो ऐसे विकल्प चुनें जिनमें सूजन बढ़ाने वाले तत्व न हों।
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)