
Happy Republic Day: भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस अवस पर पूरे देश में तिरंगा फहराया जाएगा। भारत की राजधानी दिल्ली में कर्तव्य पथ पर आकर्षक झांकियां निकलेंगे। यूरोपीय परिषद के अध्यक्षएंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन गणतंत्र दिवस परेड की मुख्य अतिथि हैं। परेड में भारत की सांस्कृतिक और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन हुआ। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को भारत सरकार ने पद्म पुरस्कारों की भी घोषणा कर दी है। इस बार कुल 131 गणमान्य हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से नवाजने की घोषणा की है। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के हर बड़े अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री IAF ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को भारत के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।
मद्देनजर भारत-नेपाल सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। सशस्त्र सीमा बल की 42वीं वाहिनी के सेनानायक गंगा सिंह उदावत ने बताया कि ऐसी विशिष्ट सूचना मिली है कि 26 जनवरी को देश विरोधी तत्व कुछ हरकत कर सकते हैं। इसके मद्देनजर एसएसबी जवान सीमा से सटे सड़क, जंगल, पगडंडियों व जलीय क्षेत्र में चौबीसों घंटे सतर्कता बरत रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सभी सीमावर्ती इलाकों में गश्त बढ़ा दी गयी है। एसएसबी की 'फ्लड यूनिट' नदियों में दिन-रात गश्त कर रही है। सीमा पर 'डाग स्क्वायड', 'फेस डिटेक्टर डिवाइस', 'वाच टावर' तथा पूरा तंत्र मुस्तैद होकर सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बरत रहा है। उदावत ने बताया कि सीमा पर आने-जाने वालों की तलाशी लेकर तथा पहचान देखकर ही आवागमन की अनुमति दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह सख्ती आम जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की जा रही है तथा लोगों से जांच में सहयोग करने की अपील की गई है।
देश की 1,751 किलोमीटर लंबी नेपाल से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा का 551 किलोमीटर भाग उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। यह खुली सीमा राज्य के सात जिलों पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज से होकर गुजरती है। यह सीमा क्षेत्र मुख्य रूप से सशस्त्र सीमा बल की निगरानी में है।
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पुलिस, अग्निशमन, होमगार्ड एवं सिविल डिफेंस (HG&CD) तथा ‘करेक्शनल सर्विसेज’ (सुधारात्मक सेवा) के कुल 982 कर्मियों को वीरता और सेवा पदकों से सम्मानित करने की घोषणा की गई। केंद्रीय गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, इनमें 125 वीरता पदक शामिल हैं। वीरता पुरस्कारों में से अधिकांश में 45 कर्मियों को जम्मू-कश्मीर क्षेत्र से, 35 कर्मियों को वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित क्षेत्रों से, पांच कर्मियों को पूर्वोत्तर से और 40 कर्मियों को अन्य क्षेत्रों से उनके वीरतापूर्ण कार्यों के लिए सम्मानित किया जाएगा।
बयान के अनुसार, वीरता पदक प्राप्त करने वालों में चार अग्निशमन सेवा के बचावकर्मी भी शामिल हैं। आधिकारिक विवरण के मुताबिक, राज्यों में जम्मू कश्मीर पुलिस को सर्वाधिक 33 वीरता पदक ,इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस को 31, उत्तर प्रदेश पुलिस को 18 और दिल्ली पुलिस को 14 वीरता पदक प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है।
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) एकमात्र ऐसा बल है, जिसे 12 वीरता पदक प्राप्त हुए हैं। इस सूची में अधिकारियों और कर्मियों को दिए गए 101 राष्ट्रपति विशिष्ट सेवा पदक (पीएसएम) और 756 सराहनीय सेवा पदक (एमएसएम) भी शामिल हैं।
एक अन्य बयान में, मंत्रालय ने कहा कि 30 व्यक्तियों को 2025 के लिए जीवन रक्षा पदक पुरस्कार श्रृंखला से सम्मानित किया गया है। इसमें छह-छह व्यक्तियों को सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक और उत्तम जीवन रक्षा पदक तथा 18 व्यक्तियों को जीवन रक्षा पदक शामिल हैं। इनमें से छह को मरणोपरांत यह पुरस्कार दिया जा रहा है।
भारत अपने गणतंत्र दिवस के अवसर पर लगभग हर साल किसी न किसी देश के शासनाध्यक्ष या राजनेता को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करता रहा है। यह आमंत्रण दो देशों या समूहों के बीच कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण साधन के रूप में इस्तेमाल होते रहे हैं, लेकिन ऐसा भी हुआ है कि इस समारोह में पड़ोसी और धुर-प्रतिद्वंद्वी देश पाकिस्तान के राजनेताओं को दो बार आमंत्रित किया है।
अपने पांचवें गणतंत्र दिवस (1955) में भारत ने पहली बार अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान के तत्कालीन गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था। यह आज के कटु संबंधों को देखते हुए एक असंभव सी बात लगती है, लेकिन तब भी रिश्तों में कोई बहुत मिठास नहीं थी, हालांकि तब इतनी खटास भी नहीं थी।
दोनों नवनिर्मित देश अपनी-अपनी समस्याओं से तो जूझ ही रहे थे, लेकिन अपने संबंधों को लेकर भी जूझ रहे थे, ऐसे में भारत ने मलिक गुलाम मोहम्मद को आमंत्रित कर एक उदार और साहसी कदम उठाया था। मलिक गुलाम मोहम्मद ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पढ़ाई की थी और हैदराबाद निजाम के लिए वित्तीय सलाहकार के रूप में काम किया था। तब दोनों देशों के आकार लेते रिश्तों की पृष्ठभूमि में भारत यह उम्मीद कर रहा था कि श्री मोहम्मद के भारत से व्यक्तिगत जुड़ाव का दोनों देशों के संबंधों को सकारात्मक लाभ होगा।
स्थितियों में लेकिन बहुत सुधार नहीं हुआ, परंतु भारत ने एक बार और उदार कदम उठाते हुए एक दशक बाद फिर से पाकिस्तान के एक अन्य प्रमुख राजनेता को आमंत्रित किया। पाकिस्तान के तत्कालीन कृषि एवं खाद्य मंत्री राना अब्दुल हामिद 15वें गणतंत्र दिवस में मुख्य अतिथि बने। यह विडंबना ही है कि यह साल 1965 था। मात्र तीन महीनें बाद दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू हो गया और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयास के रूप चल रहा आमंत्रण का यह सिलसिला यहीं थम गया।
आज जब भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेताओं एंटोनियो कोस्टा एवं उर्सुला वॉन डेर लेयेन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इस समय दोनों (भारत और ईयू) एक महत्वपूर्ण आर्थिक समझौते को पूरा करने के काफी नजदीक हैं, लेकिन वहीं दो पड़ोसी देश (भारत और पाकिस्तान) कटु संबंधों के दौर से गुजर रहे हैं।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) अपनी हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल एलआर-एएसएचएम का प्रदर्शन करेगा। यह मिसाइल स्थिर और गतिशील लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है और विभिन्न प्रकार के पेलोड ले जाने के लिए डिजाइन की गई है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के मोटरसाइकिल सवारों की संयुक्त टीम 'डेयर डेविल्स' दर्शकों को रोमांचित करेगी।
भारतीय वायुसेना की टुकड़ी चार अधिकारियों और 144 एयरमेन का होगा। टुकड़ी कमांडर स्क्वाड्रन लीडर जगदेश कुमार होंगे, जबकि स्क्वाड्रन लीडर निकिता चौधरी, फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रखर चंद्राकर और फ्लाइट लेफ्टिनेंट दिनेश सुपरन्यूमेररी अधिकारी के रूप में होंगे। इस मार्चिंग दस्ते के साथ हवाई फ्लाई-पास्ट भी होगा, जिसमें दो राफेल, दो मिग-29, दो सुखोई-30 और एक जैगुआर विमान 'स्पीयरहेड फॉर्मेशन' में उड़ान भरेंगे, जो 'सिंदूर फॉर्मेशन' का प्रतीक होगा।
हवाई फ्लाई-पास्ट में 29 विमान शामिल होंगे। इनमें 16 लड़ाकू विमान, चार परिवहन विमान और नौ हेलीकॉप्टर होंगे। इसमें राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिग-29 और जैगुआर विमान शामिल हैं। साथ ही रणनीतिक विमान सी-130 और सी-295 और भारतीय नौसेना का पी-8आई विमान भी शामिल होगा। फॉर्मेशन में अर्जन, वज्रांग, वरुण और विजय शामिल होंगे।
भारतीय नौसेना की टुकड़ी 144 युवा अधिकारियों और जवानों की होगी, जिसका नेतृत्व कॉन्टीजेंट कमांडर के तौर पर लेफ्टिनेंट करन नाग्याल करेंगे, जबकि लेफ्टिनेंट पवन कुमार गांडी, लेफ्टिनेंट प्रीति कुमारी और लेफ्टिनेंट वरुण द्वेरेरिया प्लाटून कमांडर के तौर पर करेंगे। इसके बाद नौसेना की झांकी होगी, जो ‘मजबूत राष्ट्र के लिए मजबूत नौसेना’ विषय का जीवंत चित्रण करेगी। इस झांकी में पांचवीं शताब्दी ईस्वी की पारंपरिक नौका शामिल होगी, जिसे अब आईएनएसवी कौंडिन्य नाम दिया गया है। साथ ही अग्रणी स्वदेशी प्लेटफ़ॉर्म, जैसे विमान वाही पोत आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरि भी शामिल होंगे। झांकी में आईएनएसवी तारिणी द्वारा ‘नाविका सागर परिक्रमा-दो’ अभियान के दौरान अपनाये गए परिक्रमा मार्ग का भी चित्रण होगा। इसके अलावा, मुंबई में समुद्री कौशल सिखाने वाली गैर-सरकारी संस्था सी कैडेट्स कॉर्प्स के युवा कैडेट भी झांकी के साथ मार्च करेंगे।
गणतंत्र दिवस 2026 के परेड में पहली बार भारतीय सेना का चरणबद्ध 'बैटल ऐरे फॉर्मेट' प्रदर्शित किया जाएगा, जिसमें हवाई घटक भी शामिल होगा। इसमें एक उच्च गतिशीलता वाला टोही वाहन और भारत का पहला स्वदेश निर्मित बख्तरबंद हल्का विशेष वाहन शामिल होगा। हवाई सहायता स्वदेशी ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और इसका सशस्त्र संस्करण, रुद्र, प्रहार फॉर्मेशन में प्रदान करेंगे। ये युद्धक्षेत्र की रणनीति का प्रदर्शन करेंगे।
इसके बाद, सलामी मंच के सामने से टी-90 भीष्म और मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन अपाचे एएच-64ई और आसमान में प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर गुजरेंगे। अन्य मेकनाइज्ड कॉलम में बीएमपी-दो इंफैंट्री कॉम्बैट व्हीकल के साथ नाग मिसाइल सिस्टम (ट्रैक्ड) एमके-2 शामिल होंगे। सेना के तीनों अंगों की एक झांकी में मई की शुरुआत में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना द्वारा तैनात प्रमुख हथियार प्रणालियों के मॉडल होंगे। यह परेड का प्रमुख आकर्षण रहने की संभावना है। यह झांकी भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों के प्रति निर्णायक प्रतिक्रिया देने के संकल्प का प्रतिनिधित्व करेगी।
समारोह की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक जाने से होगी जहां वह शहीदों को पूरे राष्ट्र की ओर से श्रद्धांजलि देने के लिए पुष्पचक्र अर्पित करेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मुख्य अतिथियों के पारंपरिक बग्गी में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने की संभावना है। राष्ट्रपति मुर्मू के साथ उनके अंगरक्षक भी होंगे जो उन्हें सुरक्षा प्रदान करेंगे।
करीब 100 सांस्कृतिक कलाकार परेड की शुरुआत करेंगे, जिसका विषय ‘विविधता में एकता’ होगा। यह परेड संगीतमय वाद्यों का भव्य प्रदर्शन होगी जो देश की एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करेगी। 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के ध्वज फॉर्मेशन में चार एमआई-17 चार हेलीकॉप्टर पुष्प वर्षा करेंगे। इसके बाद परेड की शुरुआत होगी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सलामी लेंगी। परेड का नेतृत्व परेड कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल भावनिश कुमार, जनरल ऑफिसर कमांडिंग, दिल्ली एरिया करेंगे, जो दूसरे पीढ़ी के अधिकारी हैं।
सर्वोच्च वीरता पुरस्कारों के गौरवशाली विजेता भी इसमें शामिल होंगे। इस दल में परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव (सेवानिवृत्त) और सूबेदार मेजर संजय कुमार शामिल होंगे। अशोक चक्र विजेता मेजर जनरल सी. ए. पिथावालिया (सेवानिवृत्त) और कर्नल डी. श्रीराम कुमार भी दल का हिस्सा होंगे। परेड में यूरोपीय संघ (ईयू) की एक छोटी सैन्य टुकड़ी भी शामिल होगी।
भारत सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में अपनी विकास यात्रा, सांस्कृतिक विविधता और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करेगा। इस दौरान हाल ही में गठित सैन्य इकाइयों के साथ-साथ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तैनात प्रमुख हथियार प्रणालियों के मॉडल भी प्रदर्शित किए जाएंगे। कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस समारोह का थीम 'वंदे मातरम के 150 वर्ष' है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस समारोह की अगुवाई करेंगी, जो सुबह 10:30 बजे शुरू होगा और लगभग 90 मिनट तक चलेगा। इस साल कुल 30 झांकी कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत होंगी। इसमें से 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की और 13 विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की होंगी। इस वर्ष लगभग 2,500 सांस्कृतिक कलाकार हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से कर्तव्य पथ पर प्रदर्शन करेंगे।
भारत 15 अगस्त, 1947 को स्वतंत्र हुआ था परंतु 26 जनवरी, 1950 को इसके संविधान को आत्मसात किया गया। उसी दिन से भारत देश एक लोकतांत्रिक, संप्रभु तथा गणतंत्र देश घोषित किया गया। 26 जनवरी, 1950 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी के साथ ध्वजारोहण कर भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया। यह ऐतिहासिक क्षणों में गिना जाने वाला समय था। इसके बाद से हर वर्ष इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है तथा इस दिन देशभर में राष्ट्रीय अवकाश रहता है। हमारा संविधान देश के नागरिकों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी सरकार चुनने का अधिकार देता है। संविधान लागू होने के बाद डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने प्रथम राष्ट्रपति की शपथ ली थी।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार और कई महत्वपूर्ण पहलों को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से भारत की चार दिवसीय यात्रा पर शनिवार को ही दिल्ली पहुंच गई थीं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 27 जनवरी को कोस्टा और वॉन डेर लेयेन के साथ शिखर वार्ता करेंगे। यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की आर्थिक और सुरक्षा नीतियों के कारण उत्पन्न वैश्विक चिंताओं के बीच आयोजित हो रही है।
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा रविवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेंगे। ये दोनों शीर्ष यूरोपीय नेता 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और यूरोपीय संघ द्वारा बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के निष्कर्ष की घोषणा करने की संभावना है। इसके अलावा, दोनों पक्ष एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी समझौते और भारतीय पेशेवरों की आवाजाही के लिए एक रूपरेखा को भी अंतिम रूप दे सकते हैं। हवाई अड्डे पर केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने उनकी अगवानी की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर उनके आगमन की जानकारी देते हुए कहा, 'भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी के अगले चरण की तैयारी। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की भारत की राजकीय यात्रा पर उनका हार्दिक स्वागत है।' भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं। एक समूह के रूप में यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का ईयू के साथ कुल व्यापार लगभग 136 अरब डॉलर रहा, जिसमें निर्यात 76 अरब डॉलर और आयात 60 अरब डॉलर था।
भारत की राजधानी दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय 'वैश्विक बौद्ध सम्मेलन' में भाग लेने वाले 40 देशों के भिक्षुओं का एक बड़ा समूह कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड के 'गणमान्य अतिथियों' में शामिल है। यह सम्मेलन 24 से 25 जनवरी को 'इंटरनैशनल बुद्धिस्ट कन्फेडरेशन' (IBC) भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया गया। आईबीसी के महासचिव, वेन. शारत्से खेनसुर रिनपोचे जांगचुप चोडेन ने रविवार को कहा, 'परेड में, भारत अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेगा, लेकिन यह बुद्ध धर्म की भूमि भी है, जो दुनिया के कई देशों में शांति, प्रेम और करूणा का संदेश फैलाती है।'
अभिनेता धर्मेंद्र और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री एवं दिग्गज वामपंथी नेता वीएस अच्युतानंदन को मरणोपरांत देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया जाएगा। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जारी बयान में सरकार ने साल 2026 के लिए 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की, जिनमें पांच पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्मश्री शामिल हैं। इनमें दो ऐसे मामले भी शामिल हैं, जिनमें एक पुरस्कार के लिए दो व्यक्तियों को चुना गया है। बयान के मुताबिक, पद्म पुरस्कारों के लिए चुनी गई हस्तियों में 90 महिलाएं और अनिवासी भारतीय (एनआरआई), भारतीय मूल के लोग (पीआईओ) तथा प्रवासी भारतीय नागरिक (ओसीआई) जैसी श्रेणियों के छह व्यक्ति शामिल हैं।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर आयोजित राष्ट्रीय परेड में राजस्थान की भव्य झांकी प्रदर्शित की जाएगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाली इस वर्ष की झांकी में बीकानेर की उस्ता कला, रावणहत्था वादन सहित पारंपरिक कलाकृतियों को शामिल किया गया है। 'राजस्थान-मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श' की थीम पर आधारित इस झांकी के माध्यम से देशभर के लोग प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, अद्वितीय शिल्पकला और गौरवशाली विरासत के जीवंत चित्रण के साक्षी बनेंगे।
बीकानेर की विश्वविख्यात 'उस्ता कला' इस झांकी का मुख्य आकर्षण है। यह कला सोने की बारीक नक्काशी, पारंपरिक शिल्प और उत्कृष्ट कारीगरी का बेजोड़ नमूना है। झांकी में उस्ता कला से सजी सुराही, कुप्पी की भव्य प्रस्तुति राजस्थान की हस्तकला परंपरा की ऊंचाई और शिल्पकारों की सृजनशीलता को दर्शाएगी। झांकी में रावणहत्था वाद्ययंत्र बजाते कलाकार की 180 डिग्री घूमती प्रतिमा को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है। यह अनूठा नवाचार राजस्थान के लोकसंगीत की गहराई और सांस्कृतिक जीवंतता को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करेगा।
झांकी में मरुधरा की पहचान के प्रतीक ऊंट की प्रतिमा एवं पारंपरिक कलाकृतियों के साथ ही लोक संगीत एवं लोक नृत्य भी समाहित किए गए हैं। यह समग्र प्रस्तुति राजस्थान की लोक परंपरा, विविधता और सांस्कृतिक गौरव को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी रूप से प्रदर्शित करेगी। राजस्थान की यह झांकी देश-दुनिया के समक्ष प्रदेश की कला, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्प कौशल का गौरवपूर्ण परिचय देगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कहा कि राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उत्सव मनाये जा रहे हैं और इसे 'राष्ट्र-वंदना' का एक स्वर बताया जो हर भारतीय में देशभक्ति की भावना पैदा करता है। मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों का आयोजन पिछले साल सात नवंबर से किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'भारत माता के दैवी स्वरूप की वंदना का यह गीत, जन-मन में राष्ट्र-प्रेम का संचार करता है।'
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीयता के महाकवि सुब्रमण्य भारती ने तमिल भाषा में 'वन्दे मातरम् येन्बोम्' अर्थात 'हम वन्दे मातरम् बोलें' इस गीत की रचना करके वन्दे मातरम् की भावना को और भी व्यापक स्तर पर जनमानस के साथ जोड़ा। उन्होंने बताया कि समय के साथ-साथ वंदे मातरम् के अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद भी लोकप्रिय हो गए, जिससे इसका संदेश पूरे देश में और अधिक फैल गया।
मुर्मू ने दार्शनिक एवं स्वतंत्रता सेनानी श्री अरबिंदो की भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जिन्होंने गीत का अंग्रेजी में अनुवाद किया, जिससे इसके सार का व्यापक स्तर पर प्रसार करने में मदद मिली। राष्ट्रपति ने कहा, 'बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् भारत के स्वतंत्रता संग्राम और सांस्कृतिक चेतना में एक अद्वितीय स्थान रखता है और यह हमारी राष्ट्र-वंदना का स्वर है।'