Republic Day 2026: देशभर में आज गणतंत्र दिवस की धूम मची हुई है। देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कर्तव्य पथ पर बुदेलखंड के बांदा जिले का मशहूर कलिंजर किला आकर्षण का केंद्र बिंदु बन गया। कर्तव्य पथ पर हर प्रदेश की झांकी पेश की जा रही थी। इस दौरान जब उत्तर प्रदेश की झांकी पेश की गई तो दिल्ली में यूपी की झांकी में सबकी निगाहें टिक गईं। बुंदेलखंड की प्राचीन विरासत और आधुनिक उत्तर प्रदेश का अनूठा संगम देख लोग तालियां बजाते हुए अपनी जगह पर ही खड़े होने को मजबूर हो गए। प्रदेश की झांकी की थीम ‘बुंदेलखंड की शाश्वत भव्यता’ पर आधारित थी।
उत्तर प्रदेश की झांकी के सामने वाले हिस्से में एकमुखी शिवलिंग (कालिंजर की प्रसिद्ध मूर्तियों में से एक) का भव्य चित्रण नजर आया। यह बुंदेलखंड की गहरी आध्यात्मिकता और असाधारण वास्तुकला विरासत का उदहारण है। बीच का हिस्सा इस क्षेत्र की जीवित शिल्प परंपराओं को उजागर करता है, मिट्टी के बर्तन (मृद्भांड कला), मनके का काम (मनका शिल्प) और जीवंत स्थानीय हाट। ये सभी वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत आते हैं। यह बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक आत्मनिर्भरता की रीढ़ हैं।
बुंदेली लोक नृत्य ने झांकी में लगाए चार चांद
झांकी में पारंपरिक बुंदेली लोक नर्तकों ने रंग-बिरंगे परिधानों, लय और गति से जीवंत बना दिया। यह बुन्देलखंड की सांस्कृतिक पहचान को बिलकुल हूबहू दर्शा रही है। इसके बाद झांकी आधुनिक उत्तर प्रदेश के शक्तिशाली चित्रण में बदल गई, कालिंजर किले से प्रेरित वास्तुकला के मुखौटे के अंदर एक्सप्रेसवे, औद्योगिक विकास, विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा और नए जमाने की मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) के दृश्य आकर्षित कर रहे थे।
उत्तर प्रदेश की झांकी ने रच दिया इतिहास
कुल मिलकर उत्तर प्रदेश की झांकी ने इस बार कर्तव्य पथ पर इतिहास रच दिया। इस झांकी के जरिए प्रदेश के विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को पेश किया गया। इसमें उत्तर प्रदेश अपनी संस्कृति और आधुनिकता के साथ कदम ताल कर रहा है। इस झांकी के प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग खड़े होकर ताली बजाते और वीडियो बनाते नजर आए।