Russian Vodka: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा ने लोगों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। दो दिन के इस दौरे में लोग उनकी कार, ठहरने की जगह और मोबाइल फोन तक गूगल कर रहे हैं। इसी बीच रूस का एक और चर्चित पहलू सामने आता है- वोडका। रूसियों की यह पसंद सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति और इतिहास का हिस्सा है।
वोडका का रूस से क्या है रिश्ता?
वोडका का नाम ही रूसी शब्द voda (पानी) से निकला है। शादी से लेकर अंतिम संस्कार तक, हर मौके पर यह ड्रिंक मौजूद रहती है। रूसियों के लिए यह सिर्फ शराब नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान है।
कैसे शुरू हुआ वोडका पीने का सिलसिला?
वोडका की शुरुआत कहां हुई, इसे लेकर अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं। रूस, पोलैंड और स्वीडन तीनों ही इसे अपनी खोज बताते हैं। रूस का दावा है कि 1430 में मॉस्को के एक मठ में पहली बार वोडका बनाई गई थी। शुरुआत में इसे पीने के बजाय दवा के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था, क्योंकि इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं।
आज के समय में वोडका हर मौके पर पी जाती है। औसत रूप से रूस में हर व्यक्ति महीने में लगभग 17 ग्लास वोडका पी जाता है। केवल रोजमर्रा की जिंदगी में ही नहीं, बल्कि राजनीति और अर्थव्यवस्था में भी इसका गहरा असर देखा जा सकता है।
कैसे बनती है वोडका?
वोडका बनाने में मुख्य तौर पर ऐसे पदार्थों का इस्तेमाल होता है जिनमें शुगर या स्टार्च ज्यादा हो, जैसे आलू, गेहूं, राई या शुगर बीट। प्रक्रिया शुरू होती है कच्चे पदार्थ को पीसकर उबालने से, फिर उसे फर्मेंटेशन के लिए रखा जाता है। तीन-चार दिन बाद इसमें शराब बनने लगती है। इसके बाद इसे डिस्टिलेशन से शुद्ध किया जाता है। जितनी बार डिस्टिल करेंगे, उतनी ही शुद्ध और ताकतवर शराब तैयार होगी। आखिरी में इसे पानी मिलाकर मनचाही ताकत और कभी-कभी चारकोल फिल्ट्रेशन से शुद्धता बढ़ाई जाती है।
पुतिन की भारत यात्रा के बीच यह जानना कि वोडका कैसे बनती है और इसका रूस में महत्व क्या है, हमें उनके देश की परंपराओं और लोगों की जीवनशैली को समझने का मौका देता है।