Sakat Chauth Vrat Katha: 6 या 7 जनवरी, जानिए कब है सकट चौथ? संतान की रक्षा के लिए पढ़ें ये व्रत कथा

सकट चौथ 2026 निर्जला व्रत होता है। इस दिन शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की पूजा की जाती है। पूजा में उपयोग होने वाली सामग्री (सामग्री सूची), पूजा करने की विधि और चंद्रमा की पूजा के नियमों का पालन करना जरूरी होता है। इससे व्रत सफल माना जाता है और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

Manali Rastogi
अपडेटेड6 Jan 2026, 07:42 AM IST
Sakat Chauth Vrat Katha: 6 या 7 जनवरी, जानिए कब है सकट चौथ? संतान की रक्षा के लिए पढ़ें ये व्रत कथा
Sakat Chauth Vrat Katha: 6 या 7 जनवरी, जानिए कब है सकट चौथ? संतान की रक्षा के लिए पढ़ें ये व्रत कथा

सकट चौथ के दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है। यह दिन बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने बच्चों की लंबी और सुखी उम्र के लिए निर्जल व्रत रखती हैं। यह व्रत पूरे भारत में मनाया जाता है। सकट चौथ को संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है।

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व्रत के दौरान महिलाएं सकट कथा सुनती हैं और शाम को भगवान गणेश की पूजा करती हैं। रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है। इस दिन भगवान गणेश को शकरकंद, मौसमी फल और तिल-गुड़ के लड्डू चढ़ाए जाते हैं।

शुभ मुहूर्त (6 जनवरी 2026)

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:26 से 6:21
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 से 12:48
  • विजय मुहूर्त: 2:11 से 2:53
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:36 से 6:04
  • अमृत काल: सुबह 10:46 से 12:17
  • निशिता मुहूर्त: रात 12:00 से 12:54 (7 जनवरी)
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 7:15 से 12:17

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सकट चौथ पूजा सामग्री

गणेश जी की मूर्ति, लाल फूल, दूर्वा, चौकी, जनेऊ, सुपारी, पान, पीला कपड़ा, घी, दीपक, अगरबत्ती, गंगाजल, रोली, कुमकुम, अक्षत, हल्दी, मौली, तिल के लड्डू, मोदक, फल, कलश, दूध, शक्कर, इत्र और सकट कथा की किताब।

सकट चौथ पूजा विधि

  • सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  • संभव हो तो लाल कपड़े पहनें।
  • अक्षत और फूल हाथ में लेकर व्रत का संकल्प लें और गणेश जी को अर्पित करें।
  • पूजा स्थान पर लड्डू, शकरकंद, फल और अन्य सामग्री रखें।
  • शाम को फिर से स्नान करके मुख्य पूजा करें।
  • दीपक जलाएं, तिलक लगाएं और गणेश मंत्रों का जाप करें।
  • सकट कथा सुनें, आरती करें और भोग लगाएं।
  • रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें।

चंद्रमा की पूजा कैसे करें?

चंद्रमा निकलने पर जल में गंगाजल, कच्चा दूध, सफेद तिल, अनाज और फूल मिलाकर अर्घ्य दें। फिर धूप-दीप दिखाएं, भोजन अर्पित करें और चंद्रमा की तीन परिक्रमा करें।

यहां पढ़ें सकट चौथ व्रत कथा (Sakat Chauth Vrat Katha In Hindi)

एक गांव में एक कुम्हार रहता था। वह मिट्टी के बहुत सुंदर बर्तन बनाता और उन्हें भट्टी में पकाता था। एक साल ऐसा हुआ कि भट्टी में आग होने के बाद भी बर्तन पक नहीं रहे थे। कुम्हार ने बहुत कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। परेशान होकर वह राजा के पास गया।

राजा ने यह बात राजपुरोहित को बताई। राजपुरोहित ने कहा कि भट्टी को सही से चलाने के लिए हर बार एक बालक की बलि देनी होगी। राजा ने यह आदेश पूरे राज्य में लागू कर दिया। डर के कारण सभी परिवार एक-एक करके अपने बच्चों को देने लगे।

कुछ समय बाद एक बूढ़ी महिला की बारी आई। उसका केवल एक ही बेटा था, जो उसके जीवन का सहारा था। उस दिन सकट चौथ का पर्व था। महिला बहुत दुखी और डरी हुई थी, लेकिन राजा के आदेश को टाल नहीं सकती थी।

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वह सकट माता की बहुत बड़ी भक्त थी। उसने अपने बेटे को सकट की सुपारी और दूब का बीड़ा दिया और कहा कि भट्टी में जाते समय माता से प्रार्थना करना। उसे विश्वास था कि सकट माता उसके बेटे की रक्षा करेंगी।

बालक को भट्टी में बैठा दिया गया। उधर माँ ने पूरी रात सकट माता की पूजा और प्रार्थना की। जिस भट्टी को पकने में कई दिन लगते थे, वह एक ही रात में तैयार हो गई।

अगले दिन कुम्हार जब भट्टी देखने आया तो चौंक गया। बूढ़ी महिला का बेटा सुरक्षित था। इतना ही नहीं, पहले जिन बच्चों की बलि दी गई थी, वे भी सभी जीवित हो गए थे।

यह देखकर सभी लोगों ने सकट माता की महिमा को माना। मां और बेटे की भक्ति की सभी ने प्रशंसा की। तभी से सकट चौथ का पर्व मनाया जाने लगा। इस दिन माताएं सकट माता की पूजा करती हैं और अपनी संतान की रक्षा के लिए प्रार्थना करती हैं।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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