आज के समय में जब पूरी दुनिया में डायबिटीज और ब्लड शुगर की समस्या बढ़ रही है, लोग ऐसे सस्ते और आसान फूड आइटम ढूंढ रहे हैं जो शुगर को कंट्रोल करने में मदद करें। जब शकरकंद की बात आती है, तो कई लोग सोचते हैं कि क्या यह ब्लड शुगर के लिए ठीक है। क्योंकि इसका स्वाद मीठा होता है, इसलिए अक्सर लगता है कि यह शुगर बढ़ा देगा। लेकिन न्यूट्रीशन से जुड़ी रिसर्च कुछ और ही बताती है।
शकरकंद एक साधारण जड़ वाली सब्जी है, जिसमें फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और धीरे-धीरे पचने वाला स्टार्च भरपूर मात्रा में होता है। रिसर्च बताती है कि शकरकंद एक स्मार्ट कार्बोहाइड्रेट है। सही तरीके से पकाकर और सीमित मात्रा में खाने पर यह ब्लड शुगर को स्थिर रखने, इंसुलिन की कार्यक्षमता सुधारने और लंबे समय तक मेटाबॉलिक हेल्थ को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है। यह कोई दवा नहीं है, लेकिन सही डाइट का अच्छा सहायक जरूर बन सकता है।
जो लोग प्रीडायबिटीज, डायबिटीज से जूझ रहे हैं या फिर अपनी एनर्जी और मेटाबॉलिक हेल्थ बेहतर रखना चाहते हैं, उनके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि शकरकंद कैसे चुनें, कैसे पकाएं और कितनी मात्रा में खाएं।
धीरे कार्बोहाइड्रेट रिलीज होने से संतुलित रहता है ब्लड शुगर
कई स्टार्च वाले खाद्य पदार्थ जल्दी ब्लड शुगर बढ़ा देते हैं, लेकिन शकरकंद ऐसा नहीं करता। इसमें मौजूद फाइबर और रेजिस्टेंट स्टार्च पाचन को धीमा करते हैं, जिससे ग्लूकोज धीरे-धीरे खून में पहुंचता है। इससे खाने के बाद शुगर अचानक नहीं बढ़ती। इसी वजह से शकरकंद, रिफाइंड अनाज या ज्यादा जीआई वाले आलू की तुलना में बेहतर कार्ब विकल्प माना जाता है।
फाइबर और रेजिस्टेंट स्टार्च पाचन और शुगर कंट्रोल में मददगार
एक मीडियम शकरकंद में लगभग 4 ग्राम फाइबर होता है, जो पाचन को धीमा करने और आंतों की सेहत सुधारने में मदद करता है। इसमें मौजूद रेजिस्टेंट स्टार्च छोटी आंत में तुरंत नहीं पचता, बल्कि बड़ी आंत तक पहुंचता है, जहां अच्छे बैक्टीरिया इसे तोड़ते हैं। इससे ऐसे तत्व बनते हैं जो मेटाबॉलिज्म और ब्लड शुगर कंट्रोल को बेहतर बनाते हैं।
एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर
शकरकंद में विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन बी6, पोटैशियम और मैंगनीज जैसे जरूरी पोषक तत्व होते हैं। ये सभी इंसुलिन के काम और शरीर के मेटाबॉलिज्म में अहम भूमिका निभाते हैं। डायबिटीज में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन बड़ी समस्या होती है, और शकरकंद के एंटीऑक्सिडेंट इसमें कमी लाने में मदद कर सकते हैं।
इंसुलिन की कार्यक्षमता बेहतर करने की संभावना
कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि शकरकंद में मौजूद कुछ तत्व इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बना सकते हैं। इसका मतलब है कि शरीर इंसुलिन का बेहतर इस्तेमाल कर पाता है और ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है। कुछ रिसर्च में टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में शकरकंद को डाइट में शामिल करने से फास्टिंग ब्लड शुगर में सुधार देखा गया।
पकाने का तरीका रखता है मायने
हर तरह से पका शकरकंद एक जैसा असर नहीं करता। अगर शकरकंद को उबालकर खाया जाए, तो इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम या मध्यम रहता है और शुगर धीरे बढ़ती है। वहीं अगर इसे भूनकर, बेक करके या तलकर खाया जाए, खासकर बिना छिलके के, तो इसका जीआई काफी बढ़ सकता है और शुगर तेजी से बढ़ सकती है। इसलिए ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए उबला या भाप में पका शकरकंद, वह भी छिलके के साथ, बेहतर माना जाता है।
पेट भरा रहने में मदद और वजन कंट्रोल
फाइबर और धीरे पचने की वजह से शकरकंद लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है। इससे बार-बार खाने की इच्छा कम होती है और वजन कंट्रोल में मदद मिलती है। वजन संतुलित रहना ब्लड शुगर और इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने के लिए बहुत जरूरी है।
संतुलित डाइट में शामिल किया जा सकने वाला पौष्टिक कार्ब
शकरकंद एक ऐसा कार्बोहाइड्रेट है जिसमें पोषण की कोई कमी नहीं होती। इसे प्रोटीन और हरी सब्जियों के साथ मिलाकर संतुलित भोजन बनाया जा सकता है। सफेद चावल या प्रोसेस्ड ब्रेड जैसे रिफाइंड कार्ब्स की तुलना में शकरकंद ज्यादा देर तक ऊर्जा देता है और सेहत के लिए बेहतर विकल्प साबित होता है।
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)