Shani Dev Ashtakam Lyrics in hindi: भारतीय ज्योतिष और धर्म में शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है। लोग मानते हैं कि शनि ग्रह व्यक्ति के कर्मों के अनुसार फल देता है। इसी वजह से शनि स्तोत्र, शनि अष्टकम और शनि श्लोक का पाठ विशेष महत्व रखता है। ये व्रत और पाठ न केवल मानसिक शांति देता है बल्कि कठिन समय में धैर्य और शक्ति भी प्रदान करता है।
श्री शनि अष्टकम् (Shani Dev Ashtakam Lyrics in Hindi)
नमः कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठ निभाय च।
नमः कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नमः॥
नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च।
नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते॥
नमः पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नमः।
नमो दीर्घाय शुष्काय कालदंष्ट्र नमोऽस्तु ते॥
नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नमः।
नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने॥
नमस्ते सर्वभक्षाय बलीमुख नमोऽस्तु ते।
सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदाय च॥
अधोदृष्टेः नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तु ते।
नमो मन्दगते तुभ्यं निस्त्रिंशाय नमोऽस्तु ते॥
तपसा दग्ध-देहाय नित्यं योगरताय च।
नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नमः॥
ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज-सूनवे।
तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्॥
देवासुरमनुष्याश्च सिद्ध-विद्याधरोरगाः।
त्वया विलोकिताः सर्वे नाशं यान्ति समूलतः॥
प्रसाद कुरु मे सौरे! वारदो भव भास्करे।
एवं स्तुतस्तदा सौरिर्ग्रहराजो महाबलः॥
शनि अष्टकम का महत्व
शनि अष्टकम में शनिदेव की स्तुति की जाती है। इसमें उनके स्वरूप, शक्ति और प्रभाव का वर्णन है। भक्त मानते हैं कि इसका पाठ करने से जीवन में आने वाली कठिनाइयों को सहने की शक्ति मिलती है।