Shani Dev Shlok-Ashtak Lyrics in Hindi: अष्टकम, श्लोक और स्तोत्र का पाठ, भक्तों पर बरसती है शनिदेव की कृपा

Shani Dev Puja: शनि अष्टकम, शनि स्तोत्र और शनि श्लोक शनिदेव की स्तुति में गाए जाते हैं। इनमें उनके स्वरूप, न्यायप्रियता और कठोरता का वर्णन है। माना जाता है कि इनका पाठ करने से कठिनाइयां कम होती हैं और मानसिक शांति मिलती है।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड3 Jan 2026, 06:39 AM IST
कठिन समय में क्यों करें शनि स्तोत्र का पाठ?
कठिन समय में क्यों करें शनि स्तोत्र का पाठ?

Shani Dev Puja Ashtakam, Shlok, Stotra: भारतीय ज्योतिष और धर्म में शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है। लोग मानते हैं कि शनि ग्रह व्यक्ति के कर्मों के अनुसार फल देता है। इसी वजह से शनि स्तोत्र, शनि अष्टकम और शनि श्लोक का पाठ विशेष महत्व रखता है। यह न केवल मानसिक शांति देता है बल्कि कठिन समय में धैर्य और शक्ति भी प्रदान करता है।

श्री शनि अष्टकम् (Shani Dev Ashtakam Lyrics in Hindi)

नमः कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठ निभाय च।

नमः कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नमः॥

नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च।

नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते॥

नमः पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नमः।

नमो दीर्घाय शुष्काय कालदंष्ट्र नमोऽस्तु ते॥

नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नमः।

नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने॥

नमस्ते सर्वभक्षाय बलीमुख नमोऽस्तु ते।

सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदाय च॥

अधोदृष्टेः नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तु ते।

नमो मन्दगते तुभ्यं निस्त्रिंशाय नमोऽस्तु ते॥

तपसा दग्ध-देहाय नित्यं योगरताय च।

नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नमः॥

ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज-सूनवे।

तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्॥

देवासुरमनुष्याश्च सिद्ध-विद्याधरोरगाः।

त्वया विलोकिताः सर्वे नाशं यान्ति समूलतः॥

प्रसाद कुरु मे सौरे! वारदो भव भास्करे।

एवं स्तुतस्तदा सौरिर्ग्रहराजो महाबलः॥

शनि स्तोत्र (कोणांतगो रौद्र यमः) (Shani Dev Stotra Lyrics in hindi)

कोणांतगो रौद्र यमोऽथ बभ्रुः

कृष्णः शनिः पिंगल मन्दसौरिः।

नित्यं स्मृतो यो हरते च पीडां

तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥ 1॥

सुरासुराः किं पुरुषा गजेन्द्रा

गन्धर्व-विद्याधर-पन्नगाश्च।

पीड्यन्ति सर्वे विषमस्थिते च

तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥ 2॥

नरा नरेन्द्राः पशवो गजेन्द्राः

सरीसृपाः कीट-पतंग-भृङ्गाः।

पीड्यन्ति सर्वे विषमस्थिते च

तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥ 3॥

देशाश्च दुर्गाणि वनानि येन

ग्रामाश्च देशाः पुर-पत्तनानि।

पीड्यन्ति सर्वे विषमस्थिते च

तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥ 4॥

स्रष्टा स्वयं भूर्भुवनत्रयस्य

त्राणे हरिः संहरणे महेशः।

एकस्त्रिधा ऋग्यजुसाममूर्तिः

तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥ 5॥

प्रयागकूले यमुनातटे च

सरस्वती पुण्यजले गुहायाम्।

यो योगिभिर्ध्येय शरीरसूक्ष्मः

तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥ 6॥

अन्यत्र देशात् स्वगृहं प्रविष्टा

यदीय वारे सुखिनो नराः स्युः।

गृहाद्गता ये न पुनः प्रयान्ति

तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥ 7॥

तिलैर्यवैर्माष-गुडान्न-दानैः

लोहेन नीलाम्बर-दानतो वा।

प्रीणाति मन्त्रैर्निजवासरेण

तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥ 8॥

शन्यष्टकं यः पठति प्रभाते

नित्यं स सूतैः पशु-बान्धवैश्च।

करोति राज्यं भुवि भूरि सौख्यं

प्राप्नोति निर्वाणपदं तथान्ते॥ 9॥

शनि श्लोक (ॐ नीलांजनसमाभासं) (Shani Dev Shlok Lyrics in hindi)

ॐ ॐ ॐ ॐ

नीलांजनसमाभासं

रविपुत्रं यमाग्रजम्।

छायामार्तण्डसंभूतं

तं नमामि शनैश्चरम्॥

नीलांजनसमाभासं

रविपुत्रं यमाग्रजम्।

छायामार्तण्डसंभूतं

तं नमामि शनैश्चरम्॥

नमो नमो शनैश्चरम्

नमो नमो शनैश्चरम्

नमो नमो शनैश्चरम्

नीलांजनसमाभासं

रविपुत्रं यमाग्रजम्।

छायामार्तण्डसंभूतं

तं नमामि शनैश्चरम्॥

नमो नमो शनैश्चरम्

नमो नमो शनैश्चरम्

नमो नमो शनैश्चरम्

नमो नमो

नीलांजनसमाभासं

रविपुत्रं यमाग्रजम्।

छायामार्तण्डसंभूतं

तं नमामि शनैश्चरम्॥

नमो नमो शनैश्चरम्

नमो नमो शनैश्चरम्

नमो नमो

नीलांजनसमाभासं

रविपुत्रं यमाग्रजम्।

छायामार्तण्डसंभूतं

तं नमामि शनैश्चरम्॥

नमो नमो नमो नमो शनैश्चरम् नमो नमो

नमो नमो नमो नमो शनैश्चरम् नमो नमो

नीलांजनसमाभासं

रविपुत्रं यमाग्रजम्।

छायामार्तण्डसंभूतं

तं नमामि शनैश्चरम्॥

नमो नमो नमो नमो शनैश्चरम् नमो नमो

नमो नमो नमो नमो शनैश्चरम् नमो नमो

नीलांजनसमाभासं

रविपुत्रं यमाग्रजम्।

छायामार्तण्डसंभूतं

तं नमामि शनैश्चरम्॥

नमो नमो नमो नमो शनैश्चरम् नमो नमो

नमो नमो नमो नमो शनैश्चरम् नमो नमो

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

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