
Shani Stotra Lyrics in Hindi: शनिदेव की पूजा में शनि स्तोत्र का पाठ बहुत अहम माना जाता है। इस स्तोत्र में शनिदेव के स्वरूप और शक्ति का वर्णन है, जिन्हें श्रद्धा से पढ़ने पर भक्तों को शांति और साहस मिलता है।
कोणांतगो रौद्र यमोऽथ बभ्रुः
कृष्णः शनिः पिंगल मन्दसौरिः।
नित्यं स्मृतो यो हरते च पीडां
तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥ 1॥
सुरासुराः किं पुरुषा गजेन्द्रा
गन्धर्व-विद्याधर-पन्नगाश्च।
पीड्यन्ति सर्वे विषमस्थिते च
तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥ 2॥
नरा नरेन्द्राः पशवो गजेन्द्राः
सरीसृपाः कीट-पतंग-भृङ्गाः।
पीड्यन्ति सर्वे विषमस्थिते च
तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥ 3॥
देशाश्च दुर्गाणि वनानि येन
ग्रामाश्च देशाः पुर-पत्तनानि।
पीड्यन्ति सर्वे विषमस्थिते च
तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥ 4॥
स्रष्टा स्वयं भूर्भुवनत्रयस्य
त्राणे हरिः संहरणे महेशः।
एकस्त्रिधा ऋग्यजुसाममूर्तिः
तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥ 5॥
प्रयागकूले यमुनातटे च
सरस्वती पुण्यजले गुहायाम्।
यो योगिभिर्ध्येय शरीरसूक्ष्मः
तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥ 6॥
अन्यत्र देशात् स्वगृहं प्रविष्टा
यदीय वारे सुखिनो नराः स्युः।
गृहाद्गता ये न पुनः प्रयान्ति
तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥ 7॥
तिलैर्यवैर्माष-गुडान्न-दानैः
लोहेन नीलाम्बर-दानतो वा।
प्रीणाति मन्त्रैर्निजवासरेण
तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥ 8॥
शन्यष्टकं यः पठति प्रभाते
नित्यं स सूतैः पशु-बान्धवैश्च।
करोति राज्यं भुवि भूरि सौख्यं
प्राप्नोति निर्वाणपदं तथान्ते॥ 9॥
शनि स्तोत्र में शनिदेव को सूर्यपुत्र और न्याय के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है। इसका पाठ करने से जीवन की कठिनाइयों को सहने की शक्ति मिलती है और मन में स्थिरता आती है।
इन श्लोकों में देवता, असुर, मनुष्य, पशु-पक्षी सभी पर शनि के प्रभाव का वर्णन है। यह बताता है कि शनिदेव का असर हर जीव पर पड़ता है और उनका स्मरण करने से पीड़ा कम होती है।
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शनि स्तोत्र में तिल, गुड़, लोहे और नील वस्त्र के दान का महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इन दानों से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की कठिनाइयां कम होती हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
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