स्मृति मंधाना को अब नहीं होती चीनी खाने की इच्छा, एक्सपर्ट ने बताया क्रिकेटर के जीरो क्रेविंग का कारण

कई लोग समय के साथ मीठा खाने की इच्छा कम महसूस करने लगते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार ऐसा इसलिए होता है क्योंकि धीरे-धीरे दिमाग और गट खुद को फिर से सेट करने लगती है। जब शुगर का सेवन कम होता है तो दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम शांत हो जाते हैं और अच्छे बैक्टीरिया बढ़ते हैं।

Manali Rastogi
अपडेटेड10 Dec 2025, 06:09 PM IST
स्मृति मंधाना को अब नहीं होती चीनी खाने की इच्छा, एक्सपर्ट ने बताया क्रिकेटर के जीरो क्रेविंग का कारण
स्मृति मंधाना को अब नहीं होती चीनी खाने की इच्छा, एक्सपर्ट ने बताया क्रिकेटर के जीरो क्रेविंग का कारण

कभी–कभी मीठा खाने की आदत छोड़ पाना मुश्किल होता है। लेकिन समय के साथ कुछ लोग खुद ही मीठा खाने की इच्छा कम महसूस करने लगते हैं। हाल ही में भारतीय महिला क्रिकेटर स्मृति मंधाना ने जतिन सप्रू को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि अब उन्हें पहले जैसा मीठा खाने का मन नहीं करता। उन्होंने कहा कि अब अगर वे मिठाई खाती भी हैं तो सिर्फ अपनी मां की खुशी के लिए, न कि अपनी इच्छा से।

लोग एक समय के बाद मीठे की इच्छा क्यों छोड़ देते हैं?

कंसलटेंट डायटीशियन और डायबिटीज एडुकेटर कनिका मल्होत्रा बताती हैं कि मीठे की इच्छा कम होना दिमाग में होने वाले बदलाव का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जब मीठा खाने की चाह धीरे–धीरे घटती है, तो यह दिमाग की आनंद से जुड़ी नसों में बदलाव यानी पुनर्निर्माण का संकेत है।

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बहुत अधिक और बार–बार चीनी लेने से दिमाग के डोपामिन ग्रहक कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे मीठा खाने पर पहले जैसा आनंद नहीं मिलता। लेकिन जब चीनी कम हो जाती है, तो ये ग्रहक दोबारा संवेदनशील होने लगते हैं और दिमाग धीरे–धीरे मीठे की ओर आकर्षित होना बंद कर देता है।

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साधारण भाषा में कहें तो, जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक मीठा नहीं खाता, तो उसका दिमाग नई अवस्था में ढल जाता है। जो मिठास पहले खुशी देती थी, वह अब वैसी नहीं लगती। इस तरह दिमाग धीरे–धीरे मीठे की चाह खो देता है।

पेट और पाचन कैसे मीठे की तलब कम करने में मदद करते हैं?

मल्होत्रा बताती हैं कि यह बदलाव केवल दिमाग में ही नहीं होता, बल्कि पेट और आंतों के जीवाणुओं में भी परिवर्तन आता है। जब व्यक्ति मीठा, तला–भुना या बहुत संसाधित भोजन कम करके, रेशेदार और प्राकृतिक भोजन अधिक लेने लगता है, तो उसकी आंतों में अच्छे जीवाणु बढ़ने लगते हैं। समय के साथ ये जीवाणु मजबूत होते हैं, जिससे मीठा खाने की इच्छा स्वाभाविक रूप से कम होने लगती है।

क्या मीठा छोड़ने के लिए बहुत सख्त डाइट अपनाने जरूरी हैं?

अक्सर लोग सोचते हैं कि मीठे पर नियंत्रण केवल इच्छाशक्ति का मामला है, लेकिन असल में यह दिमाग और पाचन तंत्र दोनों से जुड़ा जैविक परिवर्तन है। और सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए कठोर नियम या भोजन–त्याग जरूरी नहीं होता।

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बस धीरे–धीरे भोजन को संतुलित, प्रोटीन, रेशा और अच्छे वसा से भरपूर बनाना शुरू करें। जब शरीर पूरा पोषण पाने लगता है, तो पुरानी मीठे की तलब अपने–आप घटने लगती है। स्मृति मंधाना का अनुभव इसी बात का उदाहरण है कि एक समय ऐसा आता है जब शरीर और दिमाग स्वयं मीठा कम चाहने लगते हैं।

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