Snowfall in Delhi: दिल्ली-गुरुग्राम में जिस तरह की ठंड पड़ रही है, उसे देखकर लोग बस भगवान से एक ही प्रार्थना कर रहे हैं कि प्रभु बस बर्फ और पड़वा दो! लेकिन क्या ये हो सकता है? बीते दो दिनों से दिल्ली शून्य के करीब और गुरुग्राम का तापमान 0 के तक लुढक गया है। ऐसे में कंपकंपा देने वाली ठंड की वजह से लोग घरों में छिपने को मजबूर हो गए हैं। कुछ लोगों का तो ये भी कहना है कि जैसी ठंड पड़ रही है, वैसे तो कुछ सालों में दिल्ली में बर्फबारी पड़ने लगेगी। अगर आप भी ऐसा ही सोच रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि आपकी सोच सच हो सकती है या नहीं।
गुरुग्राम में बीते दो दिन पहले तापमान 0 पहुंच गया था, जिसके बाद ही बर्फबारी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई थी। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मैदानी इलाकों में बर्फ गिरने की कोई संभावना नहीं हैं। हालांकि तापमान नीचे जाने पर पेड़ पर गाड़ी पर कुछ ओस की बूंदे जमी हुई दिख सकती है। हाल ही में कुछ वीडियो भी आए हैं, जिसमें गाड़ी के शीशे पर ओस जमी हुई दिख रही थी। इस ओस को जमने को पाला कहते हैं।
स्नोफॉल और पाला में अंतर
बादलों से जमे हुए बर्फ के क्रिस्टल (स्नोफ्लेक्स) के रूप में जमीन पर गिरने को स्नोफॉल कहते हैं। बादलों में तापमान 0°C से नीचे होने पर बारिश सीधे बर्फ के कणों में बदल जाती है, जो हल्के-फुल्के और सफेद परत बनाते हैं। ये उसी जगह पर होती है, जहां हवा में पर्याप्त नमी और कम तापमान होता है।
वहीं पाला जमीन या वस्तुओं (पेड़, घास, कार) पर जमने वाली सफेद बर्फीली परत है। रात में साफ आसमान और शांत हवाओं के कारण सतह का तापमान 0°C से नीचे चला जाता है, तब हवा की नमी सीधे जमी हुई क्रिस्टल बनाकर चिपक जाती है।
दिल्ली में स्नोफॉल क्यों है मुश्किल?
स्नोफॉल के लिए तापमान -2°C से नीचे, हाई नमी (90%+) और स्थिर हवाएं चाहिए। दिल्ली में अभी तापमान 3°C+ है, नमी तो है लेकिन हवाएं तेज हैं। IMD ने ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों (15-30 जनवरी) में बर्फबारी का अलर्ट जारी किया, लेकिन मैदानी इलाकों में बर्फबारी को कोई अलर्ट नहीं है।