Social Jet Lag: थकान, नींद, चिड़चिड़ापन… क्या आप भी हैं सोशल जेटलैग के शिकार? जानें क्या है यह

symptoms of social jetlag and metabolic syndrome: छुट्टी के दिनों में देर तक जागना और फिर देर से उठना 'सोशल जेटलैग' कहलाता है। यह आदत आपकी बॉडी क्लॉक बिगाड़कर डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड29 Dec 2025, 03:28 PM IST
सोशल जेटलैग को समझें (सांकेतिक तस्वीर)
सोशल जेटलैग को समझें (सांकेतिक तस्वीर)(pexels)

Health risks of social jetlag: अक्सर लोग सोचते हैं कि जेटलैग सिर्फ लंबी हवाई यात्रा से होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर बैठे भी आप इसका शिकार हो सकते हैं? शहरी जीवनशैली और वीकेंड की मौज-मस्ती के चक्कर में लाखों भारतीय अपनी जैविक घड़ी से खिलवाड़ कर रहे हैं। काम के दिनों और छुट्टी के दिनों में सोने-जागने के समय का यह बड़ा अंतर आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है।

क्या है सोशल जेटलैग और क्यों होता है?

सोशल जेटलैग तब होता है जब आपके ऑफिस के दिनों और छुट्टी के दिनों के सोने-जागने के समय में बहुत अंतर आ जाता है। यह आपकी बॉडी क्लॉक और सामाजिक शेड्यूल के बीच तालमेल बिगड़ने के कारण होता है। मान लीजिए आप ऑफिस जाने के लिए रात 11:30 बजे सोते हैं और सुबह 6 बजे जागते हैं। वहीं वीकेंड पर आप रात 3 बजे तक वेब सीरीज देखते हैं या पार्टी करते हैं और दोपहर में सोकर उठते हैं। सोमवार की सुबह जब ये दो अलग-अलग टाइम जोन टकराते हैं, तो शरीर इसे झेल नहीं पाता।

शरीर पर पड़ता है भारी दबाव

नींद की दवा के विशेषज्ञ डॉ. जेसी सूरी के अनुसार, सोने और जागने के मध्यबिंदु में एक घंटे से अधिक का अंतर खतरनाक है। यह शरीर की कार्यप्रणाली पर साप्ताहिक तनाव पैदा करता है। इससे शरीर के हार्मोन, मेटाबॉलिज्म और बीमारियों से लड़ने की क्षमता (Immunity) पर बुरा असर पड़ता है।

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सोशल जेटलैग क्या है, समझें (AI Generated Graphic)
(Notebook LM)

गंभीर बीमारियों का बढ़ जाता है खतरा

नवंबर 2025 के एक अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जो लोग सामान्य अवधि की नींद लेते हैं, लेकिन उनके वीकेंड और वर्कडे के समय में एक घंटे से ज्यादा का अंतर है, उनमें मेटाबॉलिक सिंड्रोम की संभावना बढ़ जाती है। इसके कारण डायबिटीज, स्ट्रोक और दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम काफी ज्यादा हो जाता है।

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इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

सोशल जेटलैग के कारण सिर्फ थकान ही नहीं होती, बल्कि कई और लक्षण भी दिखते हैं। इनमें शामिल हैं...

  • सुबह उठते ही सिरदर्द और भारीपन महसूस होना।
  • स्वभाव में चिड़चिड़ापन और बार-बार मूड बदलना।
  • याददाश्त में कमी या मानसिक धुंधलापन।
  • जोड़ों में दर्द और शरीर टूटना, खासकर बुजुर्गों में।
  • वजन का बढ़ना और पाचन खराब होना।
  • हाई ब्लड प्रेशर और इंसुलिन से जुड़ी समस्याएं।

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कैसे सुधारें अपनी स्लीप साइकिल?

अपनी बॉडी क्लॉक को दोबारा पटरी पर लाने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं। जैसे...

निश्चित समय: ऑफिस हो या छुट्टी, रोज जागने का एक ही समय तय करें।

कैफीन से दूरी: देर शाम चाय, कॉफी या ज्यादा मीठी चीजों का सेवन न करें।

डिजिटल डिटॉक्स: सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन से दूर हो जाएं।

धूप का सहारा: सुबह की धूप बॉडी क्लॉक को रीसेट करने का सबसे अच्छा तरीका है।

रिलैक्स करें: सोने से पहले नहाने या किताब पढ़ने जैसी रिलैक्स करने वाली दिनचर्या अपनाएं।

Disclaimer: यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। स्वास्थ्य संबंधी कोई भी निर्णय प्रमाणित चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सुझाव के आधार पर ही लें। आपके किसी भी कार्य या निर्णय के लिए मिंट हिंदी तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।

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