दिनभर में सिर्फ डेढ़ मील लेती हैं सोनाली बेंद्रे, 18 से 20 घंटे एक्ट्रेस का रहता है फास्टिंग रूटिंग, जानें शेड्यूल

कैंसर से उबरने के बाद सोनाली बेंद्रे ने बताया कि वह रोज 18–20 घंटे इंटरमिटेंट फास्टिंग करती हैं और दिन में डेढ़ या दो बार खाना खाती हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह तरीका हर किसी के लिए सही नहीं होता।

Manali Rastogi
अपडेटेड17 Jul 2026, 02:36 PM IST
Sonali Bendre
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कैंसर से उबरने के बाद अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे ने अपनी हेल्दी लाइफस्टाइल के बारे में खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि वह रोज़ाना 18 से 20 घंटे तक इंटरमिटेंट फास्टिंग करती हैं और आमतौर पर दिन में डेढ़ बार खाना खाती हैं। उनका कहना है कि यह रूटीन उनके शरीर के लिए सही साबित हुआ है और वह कई सालों से इसे अनुशासन के साथ फॉलो कर रही हैं।

हालांकि, उनकी डाइट को लेकर लोगों में काफी दिलचस्पी है, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर व्यक्ति की पोषण संबंधी ज़रूरतें अलग होती हैं। इसलिए किसी और का डाइट प्लान हर किसी के लिए सही नहीं हो सकता।

सोनाली बेंद्रे ने क्या बताया?

हाल ही में Mashable India को दिए एक इंटरव्यू में सोनाली ने बताया कि वह रोज़ 18 से 20 घंटे तक फास्टिंग करती हैं। वह ज्यादातर दिनों में डेढ़ बार खाना खाती हैं, जबकि कुछ दिनों में दो बार भी भोजन करती हैं।

उन्होंने कहा कि वह हमेशा ज़रूरत से कम खाने में विश्वास रखती हैं। समय के साथ उन्होंने अपने शरीर और लाइफस्टाइल के हिसाब से ऐसा रूटीन बनाया है, जो उनके लिए सबसे बेहतर काम करता है।

क्या है इंटरमिटेंट फास्टिंग?

इंटरमिटेंट फास्टिंग एक ऐसा खानपान तरीका है, जिसमें कुछ समय तक खाना नहीं खाया जाता और फिर तय समय के भीतर भोजन किया जाता है। इसमें इस बात पर ज़्यादा ध्यान दिया जाता है कि आप कब खाते हैं, न कि सिर्फ क्या खाते हैं।

इंटरमिटेंट फास्टिंग के कुछ सामान्य पैटर्न इस तरह हैं:

  • 12:12 – 12 घंटे फास्टिंग और 12 घंटे खाने का समय
  • 14:10 – 14 घंटे फास्टिंग और 10 घंटे खाने का समय
  • 16:8 – 16 घंटे फास्टिंग और 8 घंटे खाने का समय
  • 18:6 – 18 घंटे फास्टिंग और 6 घंटे खाने का समय

18 से 20 घंटे की फास्टिंग काफी सख्त मानी जाती है और यह हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होती।

क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग से सेहत को फायदा होता है?

अगर सही तरीके से और सही व्यक्ति द्वारा अपनाई जाए, तो इंटरमिटेंट फास्टिंग के कुछ फायदे हो सकते हैं, जैसे:

  • ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
  • इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर हो सकती है।
  • वजन नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
  • कुल कैलोरी का सेवन कम हो सकता है।
  • मेटाबॉलिक हेल्थ बेहतर हो सकती है।

हालांकि, इन फायदों का असर सिर्फ फास्टिंग पर नहीं, बल्कि आपकी डाइट, नींद, शारीरिक गतिविधि और पूरी जीवनशैली पर भी निर्भर करता है।

किन लोगों को लंबे समय तक फास्टिंग नहीं करनी चाहिए?

लंबे समय तक फास्टिंग हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं होती। इसे शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह लेना ज़रूरी है, खासकर अगर आप:

  • डायबिटीज के मरीज हैं या ब्लड शुगर की दवा लेते हैं।
  • गर्भवती हैं या बच्चे को स्तनपान करा रही हैं।
  • पहले कभी ईटिंग डिसऑर्डर की समस्या रही है।
  • बहुत कम वजन वाले हैं।
  • किसी गंभीर या लंबे समय से चल रही बीमारी से पीड़ित हैं।
  • किसी बीमारी या सर्जरी से ठीक हो रहे हैं।

अगर फास्टिंग के दौरान चक्कर आना, कमजोरी, बहुत ज़्यादा थकान या ध्यान लगाने में परेशानी जैसी दिक्कतें महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

हर किसी के लिए एक जैसा नहीं होता वेलनेस का तरीका

सोनाली बेंद्रे ने जो डाइट रूटीन अपनाया है, वह उनके लिए कई सालों से काम कर रहा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वही तरीका हर व्यक्ति के लिए सही होगा।

हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी सेलिब्रिटी की डाइट या लाइफस्टाइल को बिना सोचे-समझे अपनाने के बजाय, अपने शरीर, उम्र, स्वास्थ्य और ज़रूरतों के हिसाब से सही खानपान चुनना चाहिए। बेहतर होगा कि ऐसा कोई भी बदलाव डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटिशियन की सलाह लेकर ही किया जाए।

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