
Starlink jobs in India: भारत के लोगों को जल्द ही सैटेलाइट इंटरनेट मिलने वाला है। एलॉन मस्क की स्टारलिंक की सर्विस भारतीयों को जल्द ही मिलने वाली है। इसके लिए स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड ने भारत में हायरिंग का पहला राउंड शुरू कर दिया है। SpaceX वेबसाइट पर जॉब्स पेज के अनुसार, कंपनी ने 4 लोगों की भर्ती की लिस्ट निकाली है। शुरुआती दौर में कंपनी बेंगलुरु में अकाउंट और फाइनेंस डिपार्टमेंट में भर्तियां कर रही हैं। शुरू कर दी है। इनमें पेमेंट्स मैनेजर, अकाउंटिंग मैनेजर, सीनियर ट्रेजरी एनालिस्ट और टैक्स मैनेजर जैसे पद शामिल हैं।
SpaceX ने जॉब डिस्क्रिप्शन में लिखा है कि कंपनी जैसे-जैसे अपना इंटरनेशनल विस्तार कर रही है और पूरी दुनिया में स्टारलिंक सर्विस दे रही है, वैसे-वैसे SpaceX की पूरी तरह से सब्सिडियरी कंपनी स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड, भारत में एक अकाउंटिंग मैनेजर के पद पर भर्तियां शुरू कर रही है। कंपनी अपनी फाइनेंशियल टीम मजबूत करना चाहती है। कंपनी ने कहा कि सभी जॉब पर स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह काम वर्क फ्राम होम या हाइब्रिड मोड पर नहीं होगा।
स्टारलिंक भारत में 2025 के आखिर या 2026 की शुरुआत में कमर्शियल लॉन्चिंग हो सकती है। मौजूदा समय में सिक्योरिटी और रेगुलेटरी जरूरतों पर काम चल रहा है। इस हफ्ते के शुरुआत में कंपनी ने मुंबई के चांदिवली इलाके में ऑफिस स्पेस अगले 5 साल के लिए लीज पर लिया है। कंपनी भारत के 9 शहरों में अपना बेस स्टेशन बनाएगी, जिनमें मुंबई के अलावा दिल्ली से सटे नोएडा, चंडीगढ़, कोलकाता जैसे शहर शामिल हैं। कंपनी का यह ऑफिस 1,294 वर्ग फुट का है। 5 साल के लिए 2.33 करोड़ रुपये के किराये की लीज पर लिया गया है। भारत में यह स्टारलिंक की पहली आधिकारिक मौजूदगी मानी जा रही है।
एलॉन मस्क की कंपनी Starlink दुनिया के 105 से ज्यादा देशों में अपनी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस मुहैया कराती है। हाल ही में कंपनी ने डायरेक्ट-टू-सेल कैपेबिलिटीज वाले सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में लॉन्च किया है। इन सैटेलाइट्स के जरिए यूजर्स के स्मार्टफोन में सैटेलाइट कनेक्टिविटी मिल सकेगी। पिछले दिनों स्टारलिंक ने अपनी डायरेक्ट-टू-सेल कैपेबिलिटीज (D2C) को अमेरिकी टेलीकॉम ऑपरेटर T-Mobile के साथ टेस्ट किया था।
स्टारलिंक एलॉन मस्क की SpaceX कंपनी की ओर से विकसित एक सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस है। यह सेवा दुनिया के सबसे बड़े लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट नेटवर्क का उपयोग करती है, जो पृथ्वी से 550 किमी ऊपर स्थित होते हैं। इसकी खासियत यह है कि यह दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में भी हाई-स्पीड, लो-लेटेंसी ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी मिल सकती है।
Oops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.