Success Story: 14 साल के लड़के ने कर दिया कमाल, दिल की बीमारी के लिए बनाया ऐप

Success Story: अब दिल की बीमारी का हाल जानना बेहद आसान हो जाएगा। 14 साल के एक भारतीय बच्चे ने एक ऐप बनाया है। इस ऐप के जरिए सिर्फ 7 सेकंड के भीतर दिल की बीमारी का पता चल जाएगा। इसके बाद इलाज आसान हो जाएगा।

Jitendra Singh
अपडेटेड2 Dec 2025, 06:02 AM IST
Success Story: अब ऐप बताएगा दिल की बीमारी का हाल
Success Story: अब ऐप बताएगा दिल की बीमारी का हाल

Success Story: आमतौर पर 14 साल की उम्र खेलने - कूदने की होती है। इस उम्र में बच्चे पढ़ाई के तरीके सीखते हैं, लेकिन 14 साल के सिद्धार्थ नंद्याला ने तो कमाल कर दिया है। सिद्धार्थ ने दिल की बीमारी का हाल जानने के लिए ऐप बना डाला। अब इस ऐप से सिर्फ 7 सेकंड के भीतर दिल की बीमारी का पता चल जाएगा। सिद्धार्थ की इस सफलता से आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्र बाबू नायडू बेहद खुश हो गए। नायडू ने सिद्धार्थ की हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी में क्रांतिकारी खोज के लिए सराहना की है।

न्यूज 18 में छपी खबर के मुताबिक, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की एक र‍िपोर्ट के अनुसार अमेरिका में लगभग 48% वयस्कों, यानी 121.5 मिलियन लोगों को किसी न किसी तरह की द‍िल से संबंध‍ित समस्या है। र‍िपोर्ट में कहा गया है कि सबसे ज्यादा लोगों की मौत हार्ट की समस्या से होती है। दुनिया में करीब 32 फीसदी लोगों की मौत हार्ट की वजह से होती है। सिद्धार्थ ने जो ऐप बनाया है वो दिल की धड़कन को रिकॉर्ड करता है। सिद्धार्थ मूलनिवासी भारत के हैं और अमेरिका में रहते हैं।

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फोन से रिकॉर्ड करें, 7 सेकंड में रिपोर्ट तैयार

इस ऐप को इस्तेमाल करना बेहद आसान है। मोबाइल को दिल के पास रखकर 7 सेकंड तक दिल की धड़कनों को रिकॉर्ड करना होता है। इसके बाद ऐप एक रिपोर्ट जनरेट करता है, जो बताता है कि दिल की धड़कन सामान्य है या किसी तरह की समस्या है। इस ऐप में AI और मशीन लर्निंग की मदद से दिल की आवाज़ को पढ़ा जाता है और उसमें छिपे संकेतों से बीमारी की पहचान की जाती है। इसमें नॉइस-कैंसलेशन तकनीक भी शामिल है, जिससे शोर-शराबे वाले माहौल में भी सटीक नतीजे मिलते हैं। सिद्धार्थ के ऐप की टेस्टिंग अमेरिका में 15,000 से ज़्यादा और भारत में करीब 700 मरीज़ों पर की जा चुकी है। भारत में यह टेस्ट गुंटूर गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल में हुआ था। नतीजों में इस ऐप ने 96 फीसदी से ज्यादा सटीकता दिखाई है।

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हालांक‍ि 14 साल के बालक के लिए, ये उनकी पहली टेक्‍नोलॉजी इनोवेशन नहीं है। उन्होंने पहले एक कम लागत वाली कृत्रिम भुजा डिजाइन की थी और STEM IT नाम से एक स्टार्टअप की स्थापना की थी जो छात्रों के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी किट बनाती है। सिद्धार्थ को तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन से बधाई पत्र भी मिला है। फिलहाल सिद्धार्थ टेक्सास से कंप्यूटर साइंस में स्टडी कर रहे हैं।

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