Success Story: UP का लाल पहले था बेरोजगार, अब केचुआ खाद से हो गया मालामाल

Success Story: उत्तर प्रदेश के अंकित कुमार ने ऑस्ट्रेलिया से केंचुए मंगाए। इसके बाद केचुआ खाद बनाने का काम शुरू किया। कभी बेरोजगारी से परेशान अंकित कुमार आज केंचुआ खाद से मोटी कमाई कर रहे हैं।

Jitendra Singh
अपडेटेड1 Nov 2025, 06:02 AM IST
Success Story: केंचुआ खाद की मांग इन दिनों बढ़ती जा रही है।
Success Story: केंचुआ खाद की मांग इन दिनों बढ़ती जा रही है।

Success Story: देश में बेरोजगारी सुरसा की तरह मुंह फैलाए खड़ी है। ज्यादातर युवा बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। ऐसे ही उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के रहने वाले अंकित कुमार बेरोजगारी से परेशान थे। फिर अंकित ने ऑस्ट्रेलिया केंचुए मंगाए और केंचुआ खाद बनाने का काम शुरू कर दिया है। केंचुआ खाद को वर्मी कंपोस्ट भी कहते हैं। आज अंकित केंचुआ खाद से बंपर कमाई कर रहे हैं।

न्यूज 18 में छपी खबर के मुताबिक, अंकित कुमार ने जैविक खाद बनाने की ट्रेनिंग ली। शुरुआती दौर में अंकित ने केचुआ से खाद बनाने का काम छोटे पैमाने पर किया। फिर धीरे-धीरे अंकित ने अपना बिजनेस बढ़ाना शुरू किया। अंकित ने इसके लिए जेवी फार्म नाम की कंपनी बनाई। जे.वी. फार्म पर 70 बेड बनाकर गोबर से खाद बनाना शुरू किया। इस खाद को तैयार करने के लिए ऑस्ट्रेलियन केंचुओं का इस्तेमाल किया जाता है। आज अंकित बड़े पैमाने पर जैविक खाद बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं।

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500 पैकेट रोजाना जैविक खाद की बिक्री

लोकल 18 से बातचीत करते हुए अंकित ने कहा कि वो रोजाना जैविक खाद की बिक्री करते हैं। इस जैविक खाद को लेने के लिए दूर - दूर से लोग आते हैँ। उसके यहां रोजाना 500 पैकेट की जैविक खाद की बिक्री हो रही है। किसान भाई खेतों में शुद्ध और प्राकृतिक तरीके से खेती करने के लिए इस जैविक खाद का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। अभी आलू की बुवाई का सीजन चल रहा है ऐसे में रोजाना उसके यहां से जैविक खाद बिक रही है। बता दें कि केंचुआ खाद (Vermicompost) भी एक ऐसा ही प्राकृतिक खाद है जिसे बेचकर किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं।

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जानिए क्या है वर्मी कम्पोस्ट?

केंचुए को अगर गोबर के रूप में भोजन दिया जाए इसे खाने के बाद विघटित होकर बने नए उत्पाद को केचुआ खाद यानी वर्मी कम्पोस्ट कहते हैं। गोबर के वर्मी कम्पोस्ट में बदल जाने के बाद इसमें बदबू नहीं आती है। इसमें मक्खियां और मच्छर भी नहीं पनपते हैं। इससे पर्यावरण में भी शुद्धि रहती है। इसमें 2-3 फीसदी नाइट्रोजन, 1.5 से 2 फीसदी सल्फर, और 1.5 से 2 फीसदी पोटाश पाया जाता है। इसीलिए केचुआ को किसानों का मित्र कहा जाता है।

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