Success Story: सिंदूर भारतीय संस्कृति और परंपरा का अहम हिस्सा माना जाता है। खासकर विवाहित महिलाओं के लिए इसका विशेष महत्व है। हालांकि, बाजार में मिलने वाले अधिकांश सिंदूर में सीसा (Lead) और पारा (Mercury) जैसे हानिकारक रसायन मिलाए जाने की बात सामने आती रही है, जो त्वचा और बालों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इसी समस्या का प्राकृतिक समाधान खोजने के लिए उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के रहने वाले अशोक तपस्वी ने अनोखी पहल की। उन्होंने अपनी बंजर पुश्तैनी जमीन को भारत के पहले ऑर्गेनिक सिंदूर फार्म में बदल दिया।
आज उनका यह प्रयोग एक सफल व्यवसाय बन चुका है और इससे वे ₹45 लाख से अधिक की कमाई कर चुके हैं। अशोक तपस्वी पहले महाराष्ट्र के पुणे में रहते थे। शहर में अच्छी जिंदगी होने के बावजूद उन्होंने अपने गांव लौटने और पुश्तैनी जमीन पर कुछ अलग करने का फैसला किया। उनका उद्देश्य केवल खेती करना नहीं था, बल्कि लोगों को केमिकल युक्त सिंदूर का प्राकृतिक विकल्प उपलब्ध कराना भी था।
अनाट्टो पौधे से मिली नई राह
अशोक ने शोध के दौरान अनाट्टो (Annatto) पौधे के बारे में जानकारी जुटाई। इस पौधे के बीजों से प्राकृतिक लाल रंग निकलता है, जिसका उपयोग सुरक्षित और ऑर्गेनिक सिंदूर बनाने में किया जा सकता है। शुरुआत में उन्होंने केवल 5-6 पौधे लगाए और लगातार प्रयोग करते रहे।
जैविक तरीके से तैयार की उपजाऊ जमीन
जिस जमीन पर खेती शुरू की गई थी, वह काफी समय से बंजर थी। अशोक ने जैविक खेती की तकनीकों और आयुर्वेद आधारित शोध की मदद से मिट्टी को दोबारा उपजाऊ बनाया। कई वर्षों की मेहनत के बाद आज उनके फार्म में 400 से अधिक अनाट्टो के पेड़ लगे हैं और लगातार उत्पादन हो रहा है।
सिर्फ सिंदूर नहीं, कई उत्पादों में हो रहा इस्तेमाल
अनाट्टो के बीजों से निकलने वाला प्राकृतिक लाल रंग केवल सिंदूर तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग लिपस्टिक, प्राकृतिक फूड कलर, कपड़ों की रंगाई और कॉस्मेटिक उत्पादों में भी किया जा रहा है। इससे अशोक को अपनी आय बढ़ाने के कई नए अवसर मिले हैं।
10 ग्राम सिंदूर की कीमत ₹500
अशोक तपस्वी अपने ऑर्गेनिक सिंदूर को ₹500 प्रति 10 ग्राम की कीमत पर बेचते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक वे इस कारोबार से ₹45 लाख से अधिक की कमाई कर चुके हैं। उनके उत्पाद की मांग धीरे-धीरे देश के कई हिस्सों में बढ़ रही है।
सिर्फ कमाई नहीं, एक सामाजिक मिशन भी
अशोक तपस्वी का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं है। वे चाहते हैं कि लोग केमिकल युक्त सिंदूर की जगह प्राकृतिक और सुरक्षित सिंदूर का इस्तेमाल करें। उनका मानना है कि इससे महिलाओं के स्वास्थ्य की रक्षा होगी और जैविक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।
किसानों के लिए बनी प्रेरणा
अशोक तपस्वी की कहानी बताती है कि यदि खेती में नवाचार, शोध और धैर्य के साथ काम किया जाए तो बंजर जमीन भी करोड़ों की संभावनाओं में बदली जा सकती है। उनकी सफलता आज उन किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करना चाहते हैं।