बंजर जमीन भी उगलने लगी सोना, UP के लाल की सिंदूर की खेती से बंपर कमाई

Success Story: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के अशोक तपस्वी ने महाराष्ट्र के पुणे से अपनी आरामदायाक जिंदगी छोड़कर पैतृक घर आ गए। इसके बाद उन्होंने बंजर जमीन पर ऑर्गेनिक सिंदूर की खेती शुरू कर दी। अशोक सिंदूर में मिलाए जाने वाले केमिकल के खिलाफ हैं। इसके लिए वो आंदोलन भी चला रहे हैं।

Jitendra Singh
अपडेटेड28 Dec 2025, 06:23 AM IST
Success Story: अशोक सिंदूर की खेती के साथ कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।
Success Story: अशोक सिंदूर की खेती के साथ कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। (The better india)

Success Story: सिंदूर का भारतीय संस्कृति में बड़ा महत्व है, खास कर जो महिलाएं सुहागिन हैं , उनके लिए यह बेहद जरूरी है। आजकल बाजार में केमिकल युक्त सिंदूर सबसे ज्यादा बिक रहा है। यह सेहत के लिए हानिकारक है। इससे त्वचा संबंधी कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। सिंदूर में सीसा और पारा जैसे हानिकारक केमिकल मिलाए जाते हैं। इससे त्वचा में जलन, बालों का झड़ना और यहाँ तक कि गंजापन भी पैदा कर सकते हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के अशोक तपस्वी ने ऑर्गेनिक सिंदूर की खेती करना शुरू कर दिया।

अशोक केमिकल युक्त सिंदूर के सख्त खिलाफ है। उन्होंने बंजर जमीन को भारत का पहला ऑर्गेनिक सिंदूर फार्म बना दिया है। इससे वे सालाना लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं। अशोक तपस्वी पहले महाराष्ट्र के पुणे शहर में रहते थे। वहां की आरामदायक जिंदगी छोड़कर, वे अपने पुश्तैनी घर फतेहपुर लौट आए। उन्होंने यहां पुश्तैनी जमीन पर सिंदूर की खेती करने का फैसला किया, जो कि एक नया काम था।

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ऑर्गेनिक सिंदूर की खेती

द बेटर इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, अशोक ने सिंदूर की खेती के लिए अनैट्टो (Annatto) नाम के पौधे की खोज की। इसके बीज लाल रंग के होते हैं। इसके बीज पूरी तरह से प्राकृतिक हैं और केमिकल फ्री हैं। अशोक के इलाके में कोई सिंदूर की खेती नहीं कर रहा था। लिहाजा अशोक ने खुद ही इसका प्रयोग करना शुरू कर दिया। शुरुआत में उन्होंने 5-6 पौधे लगाए। उन्होंने जैविक पद्धतियों और आयुर्वेद रिसर्च (organic practices and Ayurvedic research) का इस्तेमाल करके अपनी जमीन को फिर से उपजाऊ बना दिया। कई सालों की कोशिश के बाद आज उनके फार्म हाउस में 400 से ज्यादा अनाट्टो पेड़ लगे हुए हैं।

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सिंदूर के बीजों से बना रहे हैं कई चीजें

रिपोर्ट के मुताबिक, बीजों से निकाले गए चमकीले लाल रंग के दृव्य का इस्तेमाल अब सिर्फ सिंदूर बनाने में ही इ्स्तेमाल नहीं हो रहा है, बल्कि लिपिस्टिक, कपड़ों का रंग, खाने का रंग बनाने में किया जा रहा है। अशोक तपस्वी 500 रुपये प्रति 10 ग्राम के हिसाब से सिंदूर की बिक्री कर रहे हैं। इससे उन्होंने 45 लाख रुपये से ज्यादा कमाए हैं। अशोक कहते हैं कि उनका मिशन सिर्फ कमाई नहीं बल्कि केमिकल युक्त सिंदूर की छुट्टी करना है।

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