Success Story: खेती को केवल अनाज या सब्जियां उगाने तक सीमित मानने वालों के लिए मध्य प्रदेश के नीमच जिले के किसान कमलाशंकर की कहानी नई सोच पेश करती है। उन्होंने बांस की खेती को ऐसा बिजनेस मॉडल बनाया है, जहां फसल से होने वाली आय के साथ-साथ एग्री-टूरिज्म भी कमाई का बड़ा जरिया बन चुका है। आज उनके खेत में प्रकृति का आनंद लेने, बांस के बगीचे को देखने और फोटो-वीडियो शूट कराने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं।
कई साल पहले शुरू हुई बांस की खेती आज उनकी सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है। व्यवस्थित तरीके से तैयार किए गए बांस के प्लांटेशन ने खेत को हरियाली से भर दिया है। यही वजह है कि यह जगह अब किसानों, छात्रों, पर्यावरण प्रेमियों और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स के बीच आकर्षण का केंद्र बन गई है।
खेत देखने के लिए भी देनी पड़ती है फीस
इस अनोखे फार्म को देखने आने वाले लोगों से प्रवेश शुल्क लिया जाता है। खेत में घूमने के लिए प्रति व्यक्ति ₹50 का टिकट रखा गया है। वहीं अगर कोई यहां वीडियोग्राफी या विशेष शूट करना चाहता है, तो उसके लिए अलग शुल्क लिया जाता है, जो ₹2,100 तक है। इससे खेती के साथ अतिरिक्त कमाई का नया जरिया बन गया है।
खेती के साथ एग्री-टूरिज्म का सफल प्रयोग
भारत में एग्री-टूरिज्म धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहा है। कमलाशंकर ने इसी सोच को अपनाकर अपने खेत को ऐसा अनुभव केंद्र बनाया है, जहां लोग सिर्फ फसल नहीं देखते, बल्कि प्रकृति के बीच समय बिताने का अनुभव भी लेते हैं। इससे उनकी आय के कई स्रोत बन गए हैं और खेती का जोखिम भी कम हुआ है।
दूसरे किसानों के लिए सीख
ऐसे में अगर किसान स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इस तरह की वैल्यू एडिशन गतिविधियां अपनाएं, तो केवल फसल बेचने पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। एग्री-टूरिज्म, फार्म विजिट, प्रशिक्षण और अन्य गतिविधियों के जरिए अतिरिक्त आय हासिल की जा सकती है। कमलाशंकर का मॉडल इसी दिशा में एक प्रेरक उदाहरण माना जा रहा है।
क्यों खास है यह मॉडल?
बांस की खेती पर्यावरण के लिहाज से भी फायदेमंद मानी जाती है। इसके साथ पर्यटन को जोड़कर उन्होंने खेती को एक अनुभव आधारित बिजनेस में बदल दिया है। यही कारण है कि उनका फार्म सिर्फ कृषि उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण उद्यमिता (Rural Entrepreneurship) का सफल उदाहरण बन गया है।