Success Story: इंजीनियरिंग छोड़ गांव लौटा शख्स, खड़ा कर दिया करोड़ों का साम्राज्य

Success Story: बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले संतोष कुमार पेशे से इंजीनियर हैं। एक बड़ी कंपनी में नौकरी भी करने लगे। लेकिन उनका नौकरी में मन नहीं लगा। इसके बाद वापस अपने घर पटना आ गए और डेयरी का बिजनेस शुरू कर दिया है। आज इस बिजनेस से मोटी कमाई करने के साथ ही कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।

Jitendra Singh
अपडेटेड28 Apr 2026, 06:16 AM IST
Success Story: संतोष कुमार की डेयरी का टर्नओवर डेढ़ करोड़ रुपये है।
Success Story: संतोष कुमार की डेयरी का टर्नओवर डेढ़ करोड़ रुपये है। (ETV Bharat )

Success Story: आजकल के इस अर्थयुग में कई लोगों को नौकरी से गुजारा करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में बहुत से लोग दूसरे सेक्टर का रूख करते हैं। कुछ लोग नौकरी के बाद बिजनेस में भी हाथ आजमाना शुरू कर देते हैं। कुछ ऐसा ही पटना के संतोष कुमार ने शुरू कर दिया। संतोष पेशे से इंजीनियर हैं। प्राइवेट सेक्टर में नौकरी भी करने लगे। लेकिन नौकरी में उनका मन नहीं लगा। इसके बाद पैतृक घर वापस लौट आए और पशुपालन का बिजनेस शुरू कर दिया। संतोष ने इस क्षेत्र में आज अलग पहचान बना ली है। संतोष के इस कदम से अन्य लोगों की भी आर्थिक सेहत बेहतर हो रही है।

संतोष पटना जिले के धनेरूआ ब्लॉक के बीर गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने बीटेक की पढ़ाई की है। गुजरात में एबीजी शिपयार्ड में काम करना शुरू कर दिया। एक स्थायी नौकरी होने के बावजूद उन्होंने गांव लौटकर अपना व्यवसाय करने का फैसला किया। उन्होंने अपने गांव लौटकर डेयरी का बिजनेस शुरू किया। शुरुआती दौर में उनके पास 7 साहीवाल नस्ल की गाय थीं। आज उनके पास 125 गाय हैं।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संतोष कुमार पटना शहर में करीब 250 से 300 परिवारों को A2 मिल्क की होम डिलीवरी कर रहे हैं। इससे उनकी कंपनी महीने में करीब 10 लाख रुपये की कमाई कर रही है। संतोष का लक्ष्य है कि आने वाले दिनों में पटना में 15,000 लीटर A2 मिल्क की बिक्री करें।

गायों का रखते हैं विशेष ध्यान

संतोष ने बताया कि फार्म में गायों की काफी देखभाल करते हैं। गाय को क्या खिलाना है, कब खिलाना है उसका पूरा ध्यान रखा जाता है। गायों के लिए हरा चारा वो अपने खेत में ही उगाते हैं। गाय के दाने में सरसों की खली, बिनौला, सोयाबीन, मक्का, गेहूं, मिनरल मिक्सर समेत 17 चीजें मिलाते हैं। इस दाने को खाने से जहां गाय सेहतमंद रहती हैं, वहीं दुग्ध का उत्पादन भी बढ़ जाता है।

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गांव में रोजगार की संभावनाएं

संतोष कुमार का कहना है कि, गांव में रहकर भी लोग लाखों रुपये महीने कमा सकते हैं। साथ ही दूसरों को रोजगार भी दे सकते हैं। गांव में जमीन की कोई कमी नहीं होती है। ऐसे में अगर आप रोजगार का कोई साधन ढूंढ रहे हैं, तो आप खुद गाय या भैंस पाल कर डेयरी फार्मिंग में अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। संतोष ने गांव के 10 किसानों को भी बैंक से लोन दिलाकर डेयरी का बिजनेस शुरू कराया। ये सभी किसान संतोष के फॉर्म से जुड़े हुए हैं। संतोष कुमार का डेयरी फार्मिंग मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण का एक बेहतरीन उदाहरण है। उनके इस बिजनेस स्थानीय किसानों को भी आत्मनिर्भर बनने में मदद मिली है।

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