Success Story: कैंसर के भीषण दर्द में दिन-रात की पढ़ाई, CBSE बोर्ड में आरव ने किया टॉप

Success Story: एमिटी इंटरनेशनल स्कूल, साकेत के छात्र आरव वत्स ने CBSE 10वीं की परीक्षा में टॉप किया है। आरव कैंसर जैसी असाध्य बीमारी से जूझने के बावजूद रात दिन पढ़ाई करते रहे।

Jitendra Singh
अपडेटेड18 Apr 2026, 06:07 AM IST
Success Story: आरव ने  96.6% अंक हासिल कर टॉप किया है।
Success Story: आरव ने 96.6% अंक हासिल कर टॉप किया है।

CBSE 10th Result 10th Topper Success Story: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के 10वीं की परीक्षा में इस साल 93.70 फीसदी छात्र पास हुए हैं। इस रिजल्ट में कई शानदार कहानियां सामने आई हैं, लेकिन दिल्ली के आरव वत्स की कहानी सबसे अलग और प्रेरणादायक है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझते हुए भी आरव ने 96.6 फीसदी अंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि फौलादी इरादों के आगे असाध्य बीमारियां भी बौनी साबित होती हैं।

दिल्ली के महरौली निवासी आरव की कहानी सिर्फ एक छात्र की सफलता की नहीं, बल्कि साहस, धैर्य और अटूट विश्वास की मिसाल है। साल 2022 में जब आरव को कैंसर (लिम्फोब्लास्टिक लिम्फोमा) जैसी गंभीर बीमारी का पता चला, तो पूरा परिवार टूट गया। लेकिन इस कठिन समय में आरव और उनके परिवार ने खुद को संभाला और सकारात्मक सोच के साथ इस लड़ाई को स्वीकार किया।

छड़ी लेकर चलते हैं आरव

आरव के पिता डॉ. अजय वत्स का कहना है कि बीमारी का पता चलते ही आरव का लंबा इलाज शुरू हुआ। कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, नियमित एमआरआई स्कैन और सर्जरी जैसे कठिन दौर से गुजरते हुए उन्होंने कई बार शारीरिक कमजोरी का सामना किया। साल 2022 में जब आरव कक्षा 7 में थे तभी उनकी बीमारी का पता चला। उनका चलना-फिरना तक बंद हो गया था।

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उनका स्पाइन ऑपरेशन हुआ, जिसमें प्लेट्स डाली गईं। इसके बाद रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी जैसे कई कठिन इलाज से उन्हें गुजरना पड़ा। करीब एक साल तक वह बेड पर रहे और फिर वॉकर की मदद से चलना शुरू किया। पिता ने बेटे को यही समझाया कि परिस्थिति जो भी हो पाजिटिव रहना है और हम तुम्हारे साथ हैं।

बिना कोचिंग पाई सफलता, यूट्यूब गूगल से पढ़ाई

आरव ने यह सफलता बिना किसी कोचिंग के पाई है। पिता ने बताया कि इलाज के दौरान कई बार पढ़ाई प्रभावित होती है लेकिन बेटे ने सेल्फ स्टडी के साथ अपनी पढ़ाई को जारी रखा। गूगल और यूट्यूब के माध्यम से सेल्फ स्टडी की। स्कूल के शिक्षकों ने भी हर कदम पर उनका साथ दिया।

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आरव के पिता अजय वत्स और मां रजनी वत्स दोनों डॉक्टर हैं। आज भी आरव नियमित चेकअप और दवाइयों के साथ आब्जर्वेशन में हैं। पिता का कहना है कि आरव की गणित में गहरी रुचि है और वह आगे चलकर खगोल भौतिकी (एस्ट्रोफिजिक्स) में करियर बनाना चाहता हैं।

पेंटिंग और गिटार बजाने का है शौक

पढ़ाई के साथ-साथ आरव को—पेंटिंग, ड्राइंग और गिटार बजाना पसंद है। यही चीजें उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में मदद करती हैं। आरव अपने पसंदीदा हीरोज की कहानियां पढ़कर उनसे प्रेरणा लेते हैं और हर दिन को एक नई उम्मीद के साथ जीते हैं। आरव का मानना है कि 'जिंदगी में जो भी मुश्किलें आती हैं, वह किसी वजह से आती हैं और हमें उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।' आरव ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती है।

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