Success Story: 15 साल में घर छोड़ा, आज बन गईं 100 करोड़ कंपनी की मालकिन

Success Story: 15 साल की उम्र में आमतौर पर बच्चे पढ़ाई कर रहे होते हैं। इस बीच मुंबई की चीनू के सिर से छत का साया ही उजड़ गया। चीनू को पिता ने घर से निकाल दिया। फिर चीनू की रातें स्टेशन में गुजरने लगीं। रोजी-रोटी के लिए दर - दर भटकती रही। आज चीनू 7 करोड़ रुपये की कंपनी की मालकिन बन गई है। 

Jitendra Singh
पब्लिश्ड26 Nov 2025, 06:11 AM IST
Success Story: आर्टिफिशियल ज्वेलरी बेचने वाली कंपनी रुबांस की मालकिन चीनू काला है।
Success Story: आर्टिफिशियल ज्वेलरी बेचने वाली कंपनी रुबांस की मालकिन चीनू काला है।

Success Story: कहते हैं कि जो इंसान हिम्मत नहीं हारता वो कभी भी हारता नहीं है। इंसान की जिंदगी में कई तरह की परिस्थितियां आती हैं और हर बार किस्मत साथ नहीं देती। ऐसे ही मुंबई की चीनू काला है। 15 साल की उम्र में बेघर हो गईं थीं। जेब में सिर्फ 300 रुपये थे। इसी से आगे की जिंदगी गुजारना था। चीनू ने कई रातें स्टेशन में गुजारी। कभी भी अपने सपनों को मरने नहीं दिया। फौलादी इरादों की बदौलत आज चीनू करोड़ों की मालकिन बन गई। इसके लिए रात दिन एक करना पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई की चीनू की उम्र जब एक साथ थी, तभी उसकी मां उसे छोड़कर साऊदी अरब चली गई। फिर कुछ समय बाद पिता ने दूसरी शादी कर ली। इसके बाद चीनू के जीवन में उथल-पुथल शुरू हो गई। उसे मां के प्यार के बजाय डांट और मार पड़ती थी। एक दिन पिता ने कह दिया, घर छोड़कर चली जाओ। तभी चीनू ने एक बैग में अपने कपड़े भरे और जेब में 300 रुपये थेऔर घर से निकल गई।

घर-घर बेचा सामान

चीनू अब दर दर ठोकरे खाने लगी। तभी एक महिला से मुलाकात हुई। उनसे जब अपने हालात बताए तो उन्होंने सेल्स जॉब के बारे में बताया। एक कंपनी के साथ कॉन्टैक्ट करवा दिया। हर रोज घर-घर में जाकर डेली यूज की चीजें बेचने का काम चानू को मिल गया। सेल अच्छी होने पर कमीशन के तौर पर पैसे मिलते थे। कोई फिक्स सैलरी नहीं थी। रोजाना 20-40 रुपये की कमाई हो जाती थी। एक डोरमेट्री में रोजाना 20 रुपये किराया देकर रहती थी। लेकिन, हार नहीं मानी। उनकी मेहनत रंग लाई। 2014 में उन्होंने बेंगलुरु के एक छोटे से मॉल में 'रुबंस एक्सेसरीज' की शुरुआत की।

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3 लाख में शुरु किया एक्सेसरीज का बिजनेस

साल 2014 में चीनू ने बेंगलुरु के एक मॉल में 3 लाख रुपये की शुरुआती निवेश के साथ रुबांस की शुरुआत की। चीनू बताती हैं कि बेंगलुरु के एक मॉल में बड़ी मुश्किल से मुझे 6×6 की एक जगह मिली थी। इसमें खड़ा होना भी मुश्किल था। 80,000 रुपए महीने का किराया था। अपने दृढ़ संकल्प और अथक परिश्रम से उन्होंने इस ब्रांड को भारतीय फैशन ज्वेलरी बाजार में एक प्रमुख कंपनी बना दिया।

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यह कंपनी 10 लाख से ज्यादा एक्सेसरीज़ बेच चुकी हैं। धीरे-धीरे एक मॉल से दो मॉल में स्टोर खुल गए। प्रोडक्ट क्वालिटी की बदौलत बेंगलुरु में ही अब 7 स्टोर हो गए हैं। कंपनी का सालाना टर्नओरव करोड़ों में पहुंच गया है। उनके प्रोडक्ट आज स्टोर्स के अलावा फ्लिपकार्ट व मिंत्रा जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी मिलते हैं।

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