
Success Story: कहते हैं 'मेहनत वह सुंदर चाभी है, जो किस्मत के फाटक खोल देती है।' ऐसे बच्चों में लग्न होती है, एक जिद होती है कि वो किसी भी हाल में अपने जी जान से मेहनत कर के अपने माता पिता की तकलीफों को दूर करें। आज हम आपको बिहार के औरंगाबाद जिले के छोटे से गांव शिवगंज के रहने वाले आदर्श कुमार के बारे में बता रहे हैं। इनकी सफलता की कहानी ऐसी है जिसे जानकर आपकी आंखें नम हो जाएंगी। आदर्श कुमार ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की ओर से आयोजित परीक्षा में 120वीं रैंक हासिल कर जज बन गए हैं।
आदर्श के पिता विजय साव ठेले पर अंडा और ब्रेड बेचकर अपने परिवार का गुजारा करते हैं। उन्होंने अपने बेटे को पढ़ाने के लिए दिन-रात मेहनत की। सात सदस्यों के परिवार के भरण-पोषण के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा के लिए उन्होंने कभी अपने कदम पीछे नहीं खींचे। मां सुनैना ने भी अपने बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए कर्ज लिया और परिवार से यह बात छिपाकर बच्चों की पढ़ाई में योगदान दिया।
आदर्श कहते हैं कि उनके माता-पिता उनके भगवान हैं और आज वो जो कुछ भी हैं उन्हीं की बदौलत है। उन्होंने कहा कि अपनी मां और पिता की मेहनत देखकर ही उसने उसी मेहनत और लगन से पढ़ाई की है, तभी यह सफलता उन्हें हाथ लगी है। आदर्श ने साल 2017 में CLAT परीक्षा दी जिसके जरिए उन्हें चाणक्या नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी पटना में दाखिला मिला। यहां से साल 2022 में लॉ (LLB) की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। आखिरकार, 2024 में उनकी मेहनत रंग लाई और परीक्षा में 120वीं रैंक हासिल कर सफलता प्राप्त की।
आदर्श की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों में हार मान लेते हैं। उनका कहना है अगर आपके इरादे मजबूत हैं और आप अपने लक्ष्य के लिए मेहनत करते हैं, तो कोई भी मुश्किल आपको रोक नहीं सकती।
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