Success Story: मौसम की मार से परेशान किसान ने शुरू की खजूर की खेती, हो रही है लाखों में कमाई

Success Story: देश के किसानों की खेती मौसम पर निर्भर करती है। कभी बारिश ज्यादा हुई तो फसल को नुकसान और नहीं हुई तो पैदावार नहीं होती है। ऐसे में मौसम की समस्या से परेशान होकर महाराष्ट्र के बीड़ जिले के एक किसान ने ऐसा उपया किया कि अब उनको मौसम की मार नहीं झेलना पड़ता है। आइये जानते हैं क्या करते हैं

Jitendra Singh
अपडेटेड23 Mar 2026, 06:32 AM IST
Success Story: खजूर की खेती से किसानों की मोटी कमाई हो रही है।
Success Story: खजूर की खेती से किसानों की मोटी कमाई हो रही है।

Success Story: आजकल पारंपरिक खेती छोड़कर किसान नकदी फसल की ओर रूख कर रहे हैं। वहीं खेती में अब पढ़े-लिखे लोग भी आ रहे हैं। जिससे बहुत से लोगों ने किसानों को भी कमाई का बड़ा जरिया बना दिया है। किसानों की खेती करने के लिए सबसे ज्यादा मौसम पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके साथ ही अगर सिंचाई की सुविधा बेहतर नहीं हुई तो फसल का चौपट होना निश्चित है। इस बीच महाराष्ट्र के बीड़ जिले के दत्तात्रेय घुले ने पारंपरिक खेती छोड़कर अन्य फसल की ओर रूख किया। आज वो इस फसल से मोटी कमाई कर रहे हैँ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, किसान दत्तात्रेय ने अपने डेढ़ एकड़ खेत में 80 खजूर के पेड़ लगाए हैं, जिनसे उसे सालाना 10 से 12 लाख रुपये की कमाई हो रही है। बीड़ के केलसंगवी गांव के इस किसान का यह प्रयोग अन्य किसानों के लिए एक आदर्श बन गया है। बता दें कि बीड जिले का आष्टी तालुका सूखाग्रस्त क्षेत्र है। इस क्षेत्र में कभी भारी बारिश होती है तो कभी सूखा पड़ता है। ऐसे में यहां बोई गई फसलें कभी भारी बारिश तो कभी सूखे के कारण खराब हो जाती हैं, इसलिए किसान दत्तात्रेय घुले ने पारंपरिक खेती छोड़कर खजूर की खेती करना शुरू कर दिया।

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बारली किस्म की खजूर का बढ़िया उत्पादन

दो पेड़ों के बीच की दूरी 25x25 रखी. खजूर के पेड़ को कम पानी की जरूरत रहती है। किसान दत्तात्रेय घुले ने बताया कि एक एकड़ में 65 पेड़ लगा सकते हैं। जिसमें प्रति पेड़ से 200 किलो तक फल मिलते हैं। इसी तरह हर पेड़ से 20,000 रुपये तक की कमाई हो जाती है। बीड़ में खजूर की किस्म बारली उगाई जाती है। इस किस्म के फल देखने में आकर्षक और खाने में स्वादिष्ट होते हैं।

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किसानों को सब्सिडी की दरकार

किसान ने बताया कि खजूर के बारली किस्म के पौधे की कीमत करीब 4500 रुपये तक पहुंच जाती है। इतना महंगा पौधा हर कोई नहीं खरीद सकता है। लिहाजा महाराष्ट्र सरकार को पौधे खरीदने के लिए सब्सिडी मुहैया करानी चाहिए। वहीं पौधे खरीदने के लिए गुजरात, राजस्थान जैसे राज्यों में किसानों को सब्सिडी मिलती है। अगर किसानों को वित्तीय सहयता और अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएं तो ड्रैगन जैसे अन्य फलों की भी खेती शुरू की जा सकती है।

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