Success Story: पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक को अपनाकर किसान अब बेहतर आमदनी का नया रास्ता तैयार कर रहे हैं। ऐसे ही छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा के ग्राम फुलनार के जागरूक किसान संतुराम पोड़ियाम ने मछली पालन का बिजनेस शुरू किया है। इस बिजनेस को शुरू करने के लिए राज्य सरकार से आर्थिक मदद मिली। संतुराम पहले धान की पारंपरिक खेती करते थे। लेकिन कम आमदनी होने की वजह से संतुराम में मछली पालन का बिजनेस शुरू कर दिया।
संतुराम ने बताया कि अगर धान की खेती से उनकी अच्छी कमाई होती तो वो उसे जारी रखते, लेकिन धान से जीवन निर्वाह कठिन हो रहा था। धान उत्पादन में अत्यधिक लागत, मेहनत, मजदूरों की कमी और सीमित उपज जैसी समस्याओं की वजह से मछली पालन की ओर रुझान बढ़ा। जरूरत पड़ने पर जब भी बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं, किसान मछली बेचकर तुरंत आय हासिल कर लेते हैं।
मछली पालन किसानों के लिए बना ATM
संतुराम ने मछली पालन का काम शुरू करने के लिए सबसे पहले मत्स्य विभाग से संपर्क किया। विभाग की ओर से उन्हें 1.00 हेक्टेयर भूमि पर तालाब निर्माण का अवसर मिला। विभागीय सहयोग से तालाब खुदवाकर उन्होंने मछली पालन शुरू किया। इसके बाद विभागीय योजनाओं के अंतर्गत वे आधुनिक मत्स्य तकनीक, आइस बॉक्स, जाल, फिश माउंट, अंगुलिका संचयन योजना के तहत मछली बीज एवं मछुआ प्रशिक्षण से लाभान्वित हुए। इस सहयोग ने उनके उत्पादन और प्रबंधन क्षमता को मजबूत किया।
सालाना हो रही है 2 लाख की कमाई
सन्तुराम बताते हैं कि पहले धान की खेती से वे केवल 8-10 क्विंटल उपज प्राप्त कर पाते थे, जो परिवार के जीवन-यापन के लिए भी पर्याप्त नहीं होती थी,लेकिन मत्स्य पालन से अब वे प्रति वर्ष लगभग 2 लाख रुपये की कमाई हो रही है। इस पहल ने उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा दी और जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाया। वे मानते हैं कि आज उनका जीवन पहले के मुकाबले अधिक सुखमय और आत्मनिर्भर है। उनकी यह सफलता गांव-अंचल के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा और ग्रामीण आजीविका के नए मॉडल का उदाहरण बन चुकी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, थोक बाजार में मछली 130–150 रुपये किलो में बिक जाती है, जबकि खुदरा में इसका भाव 180–200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता है। कम लागत और लगातार आय की सुविधा के चलते संतुराम का मत्स्य पालन आज धान खेती से कहीं अधिक लाभदायक साबित हो रहा है।