क्लास में बच्चे चबाते थे तंबाकू, फिर IAS अफसर ने बदल दी तकदीर

Success Story: तेलंगाना के आदिलाबाद जिले के जिला अधिकारी राजर्षि शाह आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है। वो युवाओं के दिल में राज कर रहे हैं। क्लास में जब बच्चे तंबाकू का सेवन कर रहे थे। बच्चे स्कूल पढ़ने नहीं जाते थे। शाह ने बच्चों को एक नई जिंदगी दी है। 

Jitendra Singh
अपडेटेड22 Dec 2025, 06:07 AM IST
Success Story: IAS अफसर राजर्षि शाह ने 20 मिनट के लिए स्पेशल क्लास शुरू किया।
Success Story: IAS अफसर राजर्षि शाह ने 20 मिनट के लिए स्पेशल क्लास शुरू किया।(Arogya pathshala )

Success Story: सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर चिंताजनक है। सरकार की ओर से की जारी अनदेखी और ग्रामीण इलाकों में जागरूकता नहीं होने की वजह से आज भी स्कूल आखिरी सांस ले रहे हैं। कुछ ऐसा स्कूलों की दुर्दशा देखकर IAS अधिकारी राजर्षि शाह हैरान रह गए। इसके बाद बच्चों का भविष्य संवारने के लिए उन्होंने जो बीड़ा उठाया, आज पूरे देश में चर्चा हो रही है। IAS अफसर राजर्षि शाह तेलंगाना के आदिलाबाद जिले के जिला अधिकारी हैं। एक बार स्कूलों का अचानक निरीक्षण करने पहुंच गए। वहां के हालात देखते ही शाह के पैरों तले जमीन धंस गई।

क्लास में बहुत कम छात्र थे। 11 साल के तक छात्र धड़ल्ले से तंबाकू चबा रहे थे। स्कूल के बहुत से बच्चे नशे के शिकार थे। पढ़ाई-लिखाई से उनका कोई रिश्ता नहीं रह गया था। ऐसे में इन बच्चों का भविष्य संवारने के लिए शाह ने खुद कई उपाय किए। उन्होंने सबसे पहले सुबह की प्रार्थना के समय में कई बदलाव किए।

राजर्षि शाह ने की आरोग्य पाठशाला की स्थापना

द बेटर इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, सुबह की होन वाले प्रर्थना सत्र आरोग्य पाठशाला नाम दिया। इस दौरान पहले प्रार्थना होती है। इसके बाद जागरूक करने के मकसद से कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह कार्यक्रम हर दिन अलग होते हैं। जैसे - सोमवार को व्यक्तिगत स्वच्छता के बारे में जानकारी दी जाती है। मंगलवार को स्वस्थ्य और पोषण के बारे में जानकारी दी जाती है। बुधवार को स्ट्रेस मैनेजमेंट और मेंटल हेल्थ के बारे में जानकारी दी जाती है। इसी तरह गुरुवार को एंटी- ड्रग्स के बारे में जागरूकता फैलाई जाती है। शुक्रवार को बीमारियों से बचाव के बारे में पढ़ाया जाता है और शनिवार को आत्मविश्वास और नेतृत्व के बारे में जानकारी दी जाती है।

यह भी पढ़ें | फूलों के साथ टीचर की बदल गई जिंदगी, हर जगह मिला सम्मान

आरोग्य पाठशाला से बच्चों को मिला नया जीवनदान

इस तरह से जो छात्र नशे में डूबे थे, अब उनके अंदर जागरूकता फैलने लगी और स्कूल आने लगे। छात्रों की उपस्थिति 50 फीसदी भी नहीं हो पाती थी, वो बढ़कर 70 फीसदी पहुंच गई। बहुत से छात्रों के भीतर स्कूल जाने की लालसा बढ़ने लगी। इस पहल की शुरुआत 14 नवंबर 2024 को की गई थी। इस दिन बाल दिवस भी मनाया जाता है। आज आज करीब 250 से ज्यादा स्कूलों में आरोग्य पाठशाला चलाई जाती है। इससे गांव के बच्चों का स्कूल जाने के प्रति दृष्टिकोण बदल गया है।

आखिर आरोग्य पाठशाला की जरूरत क्यों पड़ी?

दरअसल, आदिलाबाद भारत के सबसे सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े ज़िलों में से एक है। इसकी लगभग 45 फीसदी आबादी अनुसूचित जातियों और जनजातियों की है। यहां के लोग गरीबी, कुपोषण की मार झेल रहे हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं तक लोगों की पहुंच बिल्कुल भी नहीं है। शाह ने बताया कि बच्चों और यहाँ तक कि अभिभावकों में भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बेहद कम थी।

यह भी पढ़ें | दिन में ड्यूटी, रात में पढ़ाई, पढ़ाई सिपाही बन गईं असिस्टेंट प्रोफेसर

यहां बहुत से लोग नहाते-धोते भी नहीं थे। बहुत से लोग परीक्षा के तनाव से गुजर रहे थे। सबसे चिंताजनक बात ये थी कि छोटे-छोटे बच्चे भी तंबाकू का सेवन करते थे। जिससे यहां की आबादी का एक बड़ा हिस्सा नशे का शिकार हो चुका था। ऐसे में यहां जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी था। इस तरह से यहां आरोग्य पाठशाला का जन्म हुआ। आरोग्य पाठशाला का फायदा ये हुआ कि आज नई पीढ़ी नशे के शिकार से दूर है।

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़ट्रेंड्सक्लास में बच्चे चबाते थे तंबाकू, फिर IAS अफसर ने बदल दी तकदीर
More
बिजनेस न्यूज़ट्रेंड्सक्लास में बच्चे चबाते थे तंबाकू, फिर IAS अफसर ने बदल दी तकदीर