Success Story: तीन उंगलियों से शख्स ने लिखा मेंस का पेपर, बन गए अफसर

Success Story: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के रहने वाले सूरज तिवारी ने यूपीएससी में 971वीं रैंक हासिल की थी। हालांकि ये सफलता उन्होंने काफी मुश्किलों के बीच हासिल की थी। एक रेल हादसे में उनके दोनों पैर और एक हाथ वो खो चुके थे, लेकिन सूरज तिवारी ने हार नहीं मानी। 

Jitendra Singh
पब्लिश्ड16 Mar 2026, 06:07 AM IST
Success Story: मैनपुरी के सूरज तिवारी बचपन से ही पढ़ने में होशियार थे।
Success Story: मैनपुरी के सूरज तिवारी बचपन से ही पढ़ने में होशियार थे।

Success Story: अगर जीवन में कठिनाइयां हैं तो रास्ते भी हैं…दिन है तो रात आएगी ही। दुख है तो सुख भी आएगा। ये शब्द और पंक्तियां हम सबने खूब सुने होंगे। लेकिन ये पंक्तियां सूरज तिवारी (Suraj Tiwari) की जिंदगी पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं, जिनकी हिम्मत और हौसले ने सबको हैरान कर दिया। हादसे में उनके हाथ-पैर गए लेकिन हौसले ने जीतकर ही दम लिया। व्हील चेयर पर बैठकर उन्होंने UPSC जैसी कठिन परीक्षा को बिना किसी कोचिंग के, सिर्फ तीन उंगलियों से पास कर इतिहास रच दिया। उनकी सफलता की कहानी उन सभी के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं।

सूरज तिवारी मैनपुरी जिले के कुरावली तहसील के मोहल्ला घरनाजपुर के रहने वाले हैं, उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा नगर के महर्षि परशुराम स्कूल से की। 2011 में एसबीआरएल इंटर कॉलेज मैनपुरी से दसवीं और 2014 में संपूर्णानंद इंटर कॉलेज अरम सराय बेवर से उत्तीर्ण किया।

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सूरज के पिता राजेश तिवारी दर्जी का काम करते हैं। सूरज तिवारी ने साल 2022 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में 971वीं रैंक हासिल की थी। पहले ही अटेंप्ट में उन्होंने इस कठिन एग्जाम को क्लियर कर लिया। यूपीएससी एग्जाम के लिए सूरज ने कहीं से कोई भी कोचिंग नहीं ली थी।

एक हादसे ने सब कुछ बदल दिया

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूरज 24 जनवरी को एक ट्रेन से सफर कर रहे थे, तो दादरी में एक बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे में उन्होंने दोनों पैर, दायां हाथ, और बाएं हाथ की दो उंगलियां खो दीं। ऐसी परिस्थिति में जहां कोई आम इंसान टूट जाता है, वहां सूरज ने हार मानने के बजाय नया रास्ता चुना और यह संघर्ष का रास्ता था। इस हादसे के बाद वह चार महीने तक अस्पताल में रहे और करीब तीन महीने तक बेड रेस्ट पर रहे।

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इस भयानक हादसे के बाद उनका जज्बा नहीं टूटा और वह तैयारी में जुट गए। साल 2018 में उन्होंने जेएनयू दिल्ली में नए सिरे से बीए में प्रवेश लिया। वहां से वर्ष 2021 में बीए पास किया और एमए के प्रवेश ले लिया। उन्होंने घर पर रहकर ही सेल्फ-स्टडी की और खुद पर भरोसा किया। उनके पास हाथ नहीं थे, लेकिन हौसला था. पैर नहीं थे, लेकिन सपनों को उड़ान देने का जज़्बा था।

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सूरज ने किया इंटरव्यू का खुलासा

सूरज ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब वह यूपीएससी परीक्षा के दौरान इंटरव्यू दे रहे थे तो एक अधिकारी ने उनसे पूछा कि वह एक स्पेशल कैटेगरी से आते हैं और आने वाले दिनों में वह अपनी कैटेगरी के लोगों के लिए किसी तरह की स्कीम बनाना चाहेंगे। इसके जवाब में सूरज ने अधिकारी से कहा कि मैं किसी स्पेशल कैटेगरी से नहीं आता, मैं आप ही की तरह हर काम को करने में सक्षम हूं। वहीं, सूरज का यह जवाब सुनने के बाद पैनल में मौजूद अधिकारियों ने उनकी जमकर तारीफ की।

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