Success Story: कई बार एक हादसा जिंदगी की दिशा बदल देता है। झारखंड के खूंटी जिले के किसान चैतन्य कुमार गंझू के साथ भी ऐसा ही हुआ। 36 एकड़ जमीन पर हजारों लीची, आम और महोगनी के पेड़ों से तैयार उनकी शानदार बागवानी थी। यह बागवानी एक भीषण आग की चपेट में आ गई और कुछ ही घंटों में उनके सपने राख हो गए। बीमा का दावा भी नहीं मिला और वर्षों की मेहनत खत्म हो गई। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय ऐसी खेती चुनी, जिसके बारे में उस समय बहुत कम लोग जानते थे।
आज वही किसान स्पाइनलेस कैक्टस की खेती और नर्सरी के जरिए लाखों रुपये का कारोबार खड़ा कर रहे हैं और देशभर के किसानों के लिए नई मिसाल बन गए हैं। चैतन्य ने साल 2020 में 36 एकड़ जमीन लीज पर लेकर लीची, आम और महोगनी के हजारों पौधे लगाए थे। लेकिन तीन साल बाद रहस्यमयी आग में पूरा बाग जल गया। पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं होने के कारण उन्हें बीमा का लाभ भी नहीं मिला। इस घटना ने उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से झकझोर दिया।
कैक्टस की खेती से खुले किस्मत के द्वार
द बेटर इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, नई शुरुआत की तलाश में उन्होंने इंटरनेशनल सेंटर फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च इन द ड्राई एरियाज (International Center for Agricultural Research in the Dry Areas - ICARDA) से संपर्क किया और Opuntia ficus-indica यानी स्पाइनलेस कैक्टस के बारे में जानकारी जुटाई। उन्होंने 10,000 कैक्टस क्लैडोड खरीदकर 2.5 एकड़ में इसकी खेती शुरू की। यह फसल कम पानी में तैयार होती है, खराब जमीन पर भी उग जाती है और पशुओं के चारे से लेकर बायो-लेदर तक कई उपयोगों में आती है।
हर साल 2 लाख पौधे तैयार करने की क्षमता
आज चैतन्य की नर्सरी में करीब 25 किस्मों के स्पाइनलेस कैक्टस उगाए जाते हैं। उनकी नर्सरी की क्षमता हर साल करीब 2 लाख पौधे तैयार करने की है। उनका अनुमान है कि मौजूदा उत्पादन क्षमता के आधार पर यह कारोबार करीब ₹40 लाख तक पहुंच सकता है।
60 ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार
यह कारोबार सिर्फ उनकी कमाई तक सीमित नहीं रहा। पौध तैयार करने और देखभाल के काम में उन्होंने आसपास के गांवों की करीब 60 महिलाओं को रोजगार दिया है। इससे स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त आय के अवसर भी पैदा हुए हैं।
सरकारी योजनाओं से बढ़ेगी मांग
झारखंड सरकार और ICARDA राज्य में स्पाइनलेस कैक्टस को बढ़ावा दे रहे हैं। विभिन्न जिलों में बड़े पैमाने पर इसकी खेती की योजना बनाई जा रही है। चैतन्य को उम्मीद है कि इन परियोजनाओं के लिए बड़ी संख्या में पौधों की जरूरत होगी, जिससे उनकी नर्सरी को भी बड़ा बाजार मिलेगा।
दूसरे किसानों के लिए भी बन रहे प्रेरणा
उनकी सफलता देखकर आसपास के कई किसान भी स्पाइनलेस कैक्टस की खेती शुरू कर चुके हैं। चैतन्य का सपना केवल अपनी कमाई बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों का एक ऐसा नेटवर्क तैयार करना है जो कैक्टस की खेती, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सके।