Success Story: कभी बच्चों के लिए गुब्बारे बनाती थी MRF कंपनी, आज बन गई देश की टायर किंग

Success Story: MRF की नींव एक गुब्बारे बनानी वाली कंपनी के तौर पर केएम मैमन मापिल्लई ने आजादी से पहले 1946 में केरल में रखी थी। एमआरएफ का पूरा नाम मद्रास रबड़ फैक्ट्री (MRF-Madras Rubber Factory ) है।

Jitendra Singh
अपडेटेड9 Jun 2026, 06:16 AM IST
Success Story: MRF की वैल्यू 53,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है।
Success Story: MRF की वैल्यू 53,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है।

MRF Success Story: कहते हैं संघर्षों के सागर में जिसने दिन रात नहाया है, ऐसे ही वीर नागरिकों ने स्वर्णिम इतिहास बनाया है। ऐसे में सफलता अक्सर उन लोगों के हिस्से में आती है जो हालात के आगे झुकने के बजाय उनसे लड़ना जानते हैं। भारत के सबसे बड़े टायर ब्रांडों में शामिल MRF की कहानी (MRF Success Story) भी कुछ ऐसी ही है। यह सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसने कठिनाइयों को अपनी ताकत बना लिया।

आज जब सड़क पर दौड़ती किसी कार, ट्रक या बाइक के टायर पर MRF का नाम दिखाई देता है, तो शायद ही कोई सोचता हो कि इस विशाल कंपनी की शुरुआत कभी एक छोटे से गुब्बारा बनाने वाले कारखाने से हुई थी और यही हकीकत है। इस सफलता के जनक के.एम. मैमन मप्पिल्लई (K.M. Mammen Mappillai) थे। इनकी दूरदृष्टि, मेहनत और जोखिम उठाने की क्षमता ने MRF को एक ग्लोबल ब्रांड बना दिया।

जानिए कौन हैं के.एम. मैमन मप्पिल्लई

के.एम. मैमन मप्पिल्लई का जन्म 28 नवंबर 1922 को केरल के एक प्रतिष्ठित सीरियन क्रिश्चियन परिवार में हुआ था। उनके परिवार का सामाजिक और व्यावसायिक क्षेत्र में बड़ा नाम था। उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करने के बजाय उन्होंने अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। वर्ष 1946 में चेन्नई के तिरुवोत्तियूर इलाके में एक छोटे से शेड में खिलौना गुब्बारे बनाने का काम शुरू किया।

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शुरुआत में गुब्बारे बनाती थी MRF

MRF का पूरा नाम मद्रास रबड़ फैक्ट्री (MRF-Madras Rubber Factory ) है। बताया जाता है कि त्रावणकोर के राजा ने आजादी की लड़ाई में शामिल होने की वजह से उनके पिता केसी मैमन मापिल्लई की सारी प्रॉपर्टी को जब्त कर लिया था। ऐसे में उनके सभी धंधे ठप हो गए थे। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और गुब्बारे बनाने वाली कंपनी शुरू की।

पहले हर दुकान पर जाकर बेचते थे गुब्बारे

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआत में केएम खुद दुकान पर जाकर दुकानदारों को गुब्बारे बेचते थे। इसके बाद उनकी जिदंगी में अहम मोड़ आज़ादी के बाद आया। उन्होंने सन 1954 में ट्रेड रबड़ उत्पादन की ट्रेनिंग ली। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। सन 1962 में एमआरएफ ने टायर बनाना शुरू किया। सन 1964 में एमआरएफ टायर का अमेरिका को एक्सपोर्ट शुरू किया।

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इसके बाद सन 1973 में देश का पहला रेडियल टायर पेश किया। वेबसाइट पर दी गई जानकारी साल 2007 में कंपनी का कारोबार पहली बार एक अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया। इसके बाद 4 साल कारोबार 4 गुना तक बढ़ गया।

कंपनी बनाती है लड़ाकू विमान सुखोई के टायर

कंपनी आज ट्यूब, बेल्ट, ट्रेड, हवाईजहाज तक के टायर बनाती है। एमआरएफ भारत की एकमात्र टायर निर्माता कंपनी है जो सुखोई 30 एमकेआई सिरीज के लड़ाकू विमानों के लिए टायर बनाती है। दुनिया के करीब 65 देशों को प्रोडक्ट एक्सपोर्ट किए जाते हैं।

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