हल्दी से बदली तकदीर, अब हो रही है मोटी कमाई

Success Story: मध्य प्रदेश का नर्मदापुरम गांव नर्मदा नदी के किनारे बसा है। इसकी उपजाऊ काली मिट्टी खेती के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब नर्मदा किनारे की यही मिट्टी हल्दी की खेती के लिए सफलता की गारंटी बनकर उभरी है। हल्‍दी की इस सफल खेती का लीडर महिला किसान कंचन वर्मा को मान जा रहा है।

Jitendra Singh
अपडेटेड27 Dec 2025, 06:25 AM IST
Success Story: कंचन वर्मा साल 2020 से हल्दी की खेती कर रही हैं।
Success Story: कंचन वर्मा साल 2020 से हल्दी की खेती कर रही हैं।(The Better India )

Success Story: मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के किनारे नर्मदापुरम गांव है। यर इलाका अपनी उपजाऊ काली मिट्टी के लिए मशहूर है। इस मिट्टी में अव्‍वल दर्जे के गेहूं की बंपर पैदावार होती है। कहा जाता है कि नर्मदापुरम गेहूं उत्पादन के मामले में पूरे पंजाब को टक्कर देता है। नर्मदापुरम के किसान सोयाबीन, गन्ना, चना और धान सहित अलग-अलग फसलों को उगाने के लिए बेहतरीन नहर सिंचाई सुविधाओं का इस्‍तेमाल करते हैं। हालांकि, यहां की एक प्रगतिशील किसान कंचन वर्मा ने क्षेत्र में पारंपरिक फसलों के बजाय हल्दी की खेती शुरू करके कुछ नया करने का फैसला किया। उनका यह दांव बिल्‍कुल सटीक पड़ा। इस कदम ने उनकी इनकम को डबल कर दिया।

कंचना का कहना है कि एक किसान होने के नाते हमें खेती में नए-नए प्रयोग करते रहना चाहिए। The Better India से बातचीत करते हुए कंचन ने कहा कि पारंपरिक फसलें उगाकर हम एक एकड़ में डेढ़ लाख रुपये कमा पाते थे। जबकि हल्दी उगाकर हमने अपनी आय दोगुनी करके तीन लाख रुपये कर ली है। साल 2023 में हल्दी की खेती से कंचन ने 12 लाख रुपये की कमाई की है।

पुराना खेत, नई फसल, बड़ी सफलता

कंचन का कहना है कि उनका परिवार खेती ही जुड़ा रहा है। कंचन ने बीए किया है। शादी के बाद कंचन ने खेती की ओर रूख किया। उन्होंने सब्जियां, गेहूं, मक्का की खेती शुरू की। लेकिन इससे खास कमाई नहीं हो पाती थी। ऐसे में कंचन ने साल 2020 में पहली बार हल्दी की खेती शुरू की। कंचन ने बताया कि एक बार एक टेलीविजन शो में हल्दी के फायदों के बारे में बताया जा रहा था। फिर इसके बारे में अधिक जानकारी हासिल करने के लिए मैं कृषि विज्ञान केंद्र ( Krishi Vigyan Kendra - KVK) गई। यहां हल्दी की खेती करने के लिए 7 दिन की ट्रेनिंग ली। फिर कंचन ने हल्दी की खेती शुरू कर दी।

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इसके लिए हल्की सांगली किस्म का चयन किया। इसमें करक्यूमिन की मात्रा सबसे ज्यादा होती है। इसके इस्तेमाल सबसे ज्यादा दवाइयों में किया जाता है। इस तरह की हल्‍दी गहरे नारंगी रंग की होती है। मजबूत जड़ों के चलते इसकी बंपर फसल हुई। पारंपरिक फसलों के मुकाबले हल्दी से दोगुना कमाई हुई।

हल्दी के लिए बनाया खेत

कंचन वर्मा ने हल्‍दी की खेती शुरू करने के लिए बहुत सावधानी के साथ भूमि को तैयार किया। मिट्टी की गुणवत्‍ता समझी। ह्यूमस मटीरियल से भरपूर अच्छी तरह से पानी सोखने वाली रेतीली दोमट मिट्टी का चयन किया। ऑर्गेनिक फार्मिंग के तरीकों को अपनाया। मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और कीटों के हमले कम करने के लिए गाय के गोबर और जीवामृत पर भरोसा किया। इन सभी कदमों ने हल्दी पैदावार बढ़ाने में मदद की।

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30 लाख रुपये की आमदनी

आज, कंचन वर्मा हल्दी की खेती में एक लीडर बन गई हैं। वह अन्य किसानों को भी हल्दी की खेती की ओर प्रेरित कर रही हैं। 10 एकड़ भूमि पर हल्दी की खेती कर रही हैं। उन्हें उम्मीद है कि इ बार 30 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई होगी। कंचन किसी समय में गेहूं की खेती करती थीं लेकिन आज उन्‍हें हल्‍दी की खेती ने एक नया मुकाम दिया है।

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