बार बार मिली असफलता, अब 14000 करोड़ की है कंपनी

Success Story: केरल के एम पी रामचंद्रन की सफलता की कहानी किसी फिल्म स्क्रिप्ट से कम नहीं है। एक जमाना था, जब हर घर में ‘आया नया उजाला, चार बूंदों वाला…।’ विज्ञापन शोर मचा रहा था। इसके मालिक रामचंद्रन ने सिर्फ 5000 रुपये में बिजनेस शुरू किया है। आइये जानते हैं रामचंद्रन के सफलता की कहानी

Jitendra Singh
अपडेटेड7 Jan 2026, 06:03 AM IST
Success Story: ज्योति लैब ने सफेद कपड़ों का रंग बरकरार रखने वाला लिक्विड उजाला बनाया है।
Success Story: ज्योति लैब ने सफेद कपड़ों का रंग बरकरार रखने वाला लिक्विड उजाला बनाया है। (Yourstory.com )

Success Story: कहते हैं अगर इंसान सच्ची लगन से मेहनत करता है तो उसके सपने जरूर पूरे होते हैं। गरीबी हो या पैसे की तंगी उसके रास्ते में बाधा नहीं बन सकती। ऐसी ही एक कहानी है केरल के रहने वाले एम पी रामचंद्रन की। रामचंद्रन की सफलता की कहानी किसी फिल्मी दुनिया से कम नहीं है। रामचंद्रन की सफलता का सफर आपको हैरान और प्रेरित करने वाला है। उन्होंने न तो कोई बड़ा निवेश करके अपना व्यवसाय शुरू किया और न ही कोई लग्ज़री उत्पाद बनाया। बल्कि, सिर्फ़ 2 रुपये की एक साधारण सी वस्तु के साथ, उन्होंने देश भर के घरों तक अपनी पहुंच बनाई और अंततः हज़ारों करोड़ रुपये का एक विशाल साम्राज्य खड़ा कर लिया।

न्यूज 18 में छपी खबर के मुताबिक, केरल के त्रिशूर निवासी रामचंद्रन की कहानी उनके स्कूल के दिनों से शुरू होती है। उन्होंने सेंट थॉमस कॉलेज से बी.कॉम की डिग्री हासिल की और बाद में अकाउंटेंट की नौकरी करने लगे। इस नौकरी से उन्हें अच्छी-खासी आमदनी होती थी, लेकिन उनके दिल में हमेशा लीक से हटकर कुछ करने की इच्छा थी। रामचंद्रन शुरू से ही क्रिएटिव माइंड के थे। वो हमेशा कुछ क्रिएटिव प्रोडक्ट बनाना चाहते थे। उनके दिमाग में शुरू से ही एक लॉन्ड्री व्हाइटर बनाने की इच्छा थी।

ऐसे बना उजाला

रामचंद्रन कपड़ों के लिए व्हाइटनर बनाना चाहते थे। इसके लिए वह रसोई में प्रयोग करते थे। एक दिन उनकी नजर एक मैगजीन पर पड़ी। उसमें लिखा था कि बैंगनी रंग के इस्तेमाल से कपड़े को ज्यादा सफेद और चमकीला बनाया जा सकता है। इसके बाद उन्होंने इस पर कुछ प्रयोग किए। रामचंद्रन एक साल तक बैंगनी रंगों के साथ प्रयोग करते रहे। इसके बाद वह उजाला नील बनाने में कामयाब रहे।

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5000 रुपये उधार लेकर शुरू की फैक्ट्री

एमपी रामचंद्रन ने 5000 रुपये उधार लेकर फॅक्ट्री शुरू की। उन्‍होंने अपनी बेटी के नाम पर इस लैब का नाम ज्‍योति रखा। पहले उन्‍होंने कुछ प्रोडक्‍ट बनाए, लेकिन असली सफलता ‘उजाला सुप्रीम लिक्विड फैब्रिक व्‍हाइटनर’ नाम के प्रोडक्‍ट से मिली। यह सस्‍ता प्रोडक्‍ट पूरे देश में पसंद किया गया और घर-घर का हिस्‍सा बन गया।

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आज ज्योति लैब का बना प्रडक्ट उजाला एक मल्टी ब्रांड कंपनी बन गई है। ज्योति लेबोरेटरीज का मार्केट कैप 13,583 करोड़ रुपये है। इस नील का इस्तेमाल सफेद कपड़ों को चमकाने में किया जाता है। ज्योति लेबोरेटरीज के दो अहम प्रोडेक्ट उजाला लिक्विड क्लॉथ व्हाइटनर और मैक्सो मॉस्किटो रिपेलेंट्स देश में काफी मशहूर हुए हैं।

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