Success Story: किसान ने अपनी फसल देखते ही बना डाली कंपनी, अब इतनी हो रही है कमाई

Success Story: मध्य प्रदेश के खंडवा के किसान ललित शंकर पाटिल ने वैदिक और जैविक पद्धति से हल्दी की खेती कर मिसाल पेश की है। उन्होंने असली वैदिक हल्दी की पहचान दिलाई है। आज ललित दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। आइये जानते हैं किसान ललिल के संघर्ष की कहानी...

Jitendra Singh
अपडेटेड16 Apr 2026, 06:12 AM IST
Success Story: किसान ने जैविक हल्दी को ब्रांड बना दिया।
Success Story: किसान ने जैविक हल्दी को ब्रांड बना दिया।

Success Story: आजकल के युवाओं का फोकस खेती की ओर भी तेजी से बढ़ा है। खेती को अगर समझदारी और तकनीक के साथ किया जाए, तो यही खेत किसान को लखपति बना सकते हैं। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के अहमदपुर खेगांव गांव के किसान ललित शंकर पाटिल इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं। जहां ज्यादातर किसान रासायनिक खादों और दवाओं पर निर्भर रहते हैं, वहीं ललित ने जैविक खेती का रास्ता चुना। आज उनकी हल्दी की खेती पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन चुकी है।

न्यूज 18 में छपी खबर के मुताबिक, ललित कुछ साल पहले तक गेहूं, सोयाबीन और कपास जैसी पारंपरिक खेती करते थे। इससे उन्हें ज्यादा मुनाफा नहीं होता था। बढ़ती लागत, घटती उपज और मिट्टी की बिगड़ती हालत ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया। तभी उन्होंने यूट्यूब पर किसानों के कुछ वीडियो देखे, जहाँ जैविक हल्दी की खेती से लाखों रुपये कमाने का आइडिया मिला। यहीं से उनकी सोच बदल गई और उन्होंने नई राह चुन ली।

जैविक हल्दी को बनाया ब्रांड

ललित शंकर पाटिल ने जैविक तरीके से हल्दी की खेती शुरू की। लेकिन उन्होंने सिर्फ उत्पादन तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि अपनी हल्दी को प्रोसेस कर पैकिंग के साथ खुद का ब्रांड तैयार किया। आज उनकी हल्दी कई शहरों में पहुंच रही है और लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही है। उनकी हल्दी को ऑनलाइन मार्केटिंग से खूब फायदा मिल रहा है।

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कम लागत, बड़ा मुनाफा

एक एकड़ में करीब 7000 से 9000 की लागत आती है, लेकिन बाजार में वैदिक हल्दी की कीमत 270 प्रति किलो तक पहुंच चुकी है। यह सामान्य हल्दी की तुलना में कहीं ज्यादा है। सिर्फ एक एकड़ में ही किसान लाखों कमा सकता है बशर्ते वह प्रकृति और परंपरा के साथ चले।

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कैसे अलग होती है वैदिक हल्दी?

जहां रासायनिक खेती की हल्दी में अवशेष और जहरीले तत्व रहते हैं, वहीं वैदिक हल्दी में प्राकृतिक औषधीय गुण पूरी तरह बरकरार रहते हैं। इसमें इतनी शक्ति होती है कि यह कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने में सहायक मानी जाती है।

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